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जियो क्रेडिट और बैंक ऑफ अमेरिका में डील: अंबानी की कंपनी में खरीदेगा 49.9% हिस्सा, कितने करोड़ में हुआ सौदा?
Wed, 12 Aug 2026 10:44 PM IST
राकेश कुमार
बिजनेस डेस्क अमर उजाला, मुंबई।
बिजनेस डेस्क अमर उजाला, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 12 Aug 2026 10:44 PM IST
सार
जियो क्रेडिट में बैंक ऑफ अमेरिका की 49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी का प्रस्ताव भारत के वित्तीय क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा है। 18,268 करोड़ रुपये के इस निवेश से जियो क्रेडिट को पूंजी और वैश्विक विशेषज्ञता मिलेगी, जबकि बैंक ऑफ अमेरिका को भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का मौका मिलेगा।
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जियो क्रेडिट और बैंक ऑफ अमेरिका में डील
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा क्षेत्र में अमेरिका की बड़ी वित्तीय ताकत की एंट्री होने जा रही है। बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के बीच पक्का समझौता हुआ है। इसके तहत बैंक ऑफ अमेरिका, जियो क्रेडिट लिमिटेड में 49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदेगा। इस सौदे का कुल मूल्य 18,268 करोड़ रुपये, यानी करीब 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर है।
जियो क्रेडिट में 49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी
जियो क्रेडिट लिमिटेड, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की पूरी तरह स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है। कंपनी कर्ज देने का कारोबार करती है। प्रस्तावित निवेश में शेयर और वारंट शामिल हैं। यह सौदा शेयर और वारंट के वरीयता आवंटन के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सौदे के बाद जियो क्रेडिट में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका की अहम साझेदारी होगी। दोनों कंपनियों को निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा।
सिर्फ दो साल में 30,667 करोड़ रुपये की संपत्ति
जियो क्रेडिट ने अपने परिचालन के महज दो साल के भीतर कर्ज कारोबार में तेजी से विस्तार किया है। 30 जून 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन संपत्तियां 30,667 करोड़ रुपये, यानी करीब 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर थीं।
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प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की डिजिटल पहुंच और भारतीय बाजार की समझ को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय सेवा विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा।
कंपनियों के मुताबिक, इस साझेदारी से जियो क्रेडिट को कर्ज कारोबार को टिकाऊ तरीके से बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पूंजी मिलेगी। इसके साथ वित्तीय सेवाओं, शासन व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में बैंक ऑफ अमेरिका की विशेषज्ञता भी कंपनी को मिलेगी।
सौदे की पांच बड़ी बातें
49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी: बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में अधिकतम 49.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगा।
18,268 करोड़ रुपये का निवेश: प्रस्तावित सौदे का कुल मूल्य 18,268 करोड़ रुपये है।
30,667 करोड़ रुपये की संपत्ति: 30 जून 2026 तक जियो क्रेडिट की प्रबंधनाधीन संपत्तियां 30,667 करोड़ रुपये थीं।
निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व: जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका को निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा।
मौजूदा प्रबंधन संभालेगा कामकाज: कंपनी की रणनीति और संचालन की जिम्मेदारी मौजूदा प्रबंधन टीम के पास ही रहेगी।
यह भी पढ़ें: SEBI Chief: 'कमोडिटी बाजारों को चाहिए घरेलू वास्तविकताओं वाले स्थानीय मानक', सेबी अध्यक्ष ने की वकालत
अंबानी की डिजिटल ताकत को मिलेगा वैश्विक अनुभव
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस साझेदारी को कंपनी के मिशन में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि बैंक ऑफ अमेरिका के साथ सहयोग जियो की डिजिटल पहुंच और बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक विशेषज्ञता को जोड़कर जिम्मेदार कर्ज तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।
वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन मोयनिहान ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत के भविष्य में बैंक ऑफ अमेरिका के भरोसे को दिखाता है। उनके मुताबिक, बैंक इस बाजार को अच्छी तरह समझता है और कई दशकों से भारत का समर्थन करता आया है।
अभी तुरंत पूरा नहीं होगा सौदा
समझौते की घोषणा हो चुकी है, लेकिन सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए लागू नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां जरूरी हैं। दोनों कंपनियों का कहना है कि प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा क्षेत्र में मौजूद विकास के अवसरों का लाभ उठाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, 18,268 करोड़ रुपये का यह निवेश जियो क्रेडिट के लिए सिर्फ पूंजी जुटाने का सौदा नहीं है। इससे कंपनी को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञता, जोखिम प्रबंधन और तकनीकी अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं बैंक ऑफ अमेरिका को भारत के तेजी से बढ़ते कर्ज और वित्तीय सेवा बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने का मौका मिलेगा।
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जियो क्रेडिट में 49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी
जियो क्रेडिट लिमिटेड, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की पूरी तरह स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है। कंपनी कर्ज देने का कारोबार करती है। प्रस्तावित निवेश में शेयर और वारंट शामिल हैं। यह सौदा शेयर और वारंट के वरीयता आवंटन के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सौदे के बाद जियो क्रेडिट में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका की अहम साझेदारी होगी। दोनों कंपनियों को निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा।
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सिर्फ दो साल में 30,667 करोड़ रुपये की संपत्ति
जियो क्रेडिट ने अपने परिचालन के महज दो साल के भीतर कर्ज कारोबार में तेजी से विस्तार किया है। 30 जून 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन संपत्तियां 30,667 करोड़ रुपये, यानी करीब 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर थीं।
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प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की डिजिटल पहुंच और भारतीय बाजार की समझ को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय सेवा विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा।
कंपनियों के मुताबिक, इस साझेदारी से जियो क्रेडिट को कर्ज कारोबार को टिकाऊ तरीके से बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पूंजी मिलेगी। इसके साथ वित्तीय सेवाओं, शासन व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में बैंक ऑफ अमेरिका की विशेषज्ञता भी कंपनी को मिलेगी।
सौदे की पांच बड़ी बातें
49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी: बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में अधिकतम 49.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगा।
18,268 करोड़ रुपये का निवेश: प्रस्तावित सौदे का कुल मूल्य 18,268 करोड़ रुपये है।
30,667 करोड़ रुपये की संपत्ति: 30 जून 2026 तक जियो क्रेडिट की प्रबंधनाधीन संपत्तियां 30,667 करोड़ रुपये थीं।
निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व: जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका को निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा।
मौजूदा प्रबंधन संभालेगा कामकाज: कंपनी की रणनीति और संचालन की जिम्मेदारी मौजूदा प्रबंधन टीम के पास ही रहेगी।
यह भी पढ़ें: SEBI Chief: 'कमोडिटी बाजारों को चाहिए घरेलू वास्तविकताओं वाले स्थानीय मानक', सेबी अध्यक्ष ने की वकालत
अंबानी की डिजिटल ताकत को मिलेगा वैश्विक अनुभव
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस साझेदारी को कंपनी के मिशन में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि बैंक ऑफ अमेरिका के साथ सहयोग जियो की डिजिटल पहुंच और बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक विशेषज्ञता को जोड़कर जिम्मेदार कर्ज तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।
वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन मोयनिहान ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत के भविष्य में बैंक ऑफ अमेरिका के भरोसे को दिखाता है। उनके मुताबिक, बैंक इस बाजार को अच्छी तरह समझता है और कई दशकों से भारत का समर्थन करता आया है।
अभी तुरंत पूरा नहीं होगा सौदा
समझौते की घोषणा हो चुकी है, लेकिन सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए लागू नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां जरूरी हैं। दोनों कंपनियों का कहना है कि प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा क्षेत्र में मौजूद विकास के अवसरों का लाभ उठाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, 18,268 करोड़ रुपये का यह निवेश जियो क्रेडिट के लिए सिर्फ पूंजी जुटाने का सौदा नहीं है। इससे कंपनी को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञता, जोखिम प्रबंधन और तकनीकी अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं बैंक ऑफ अमेरिका को भारत के तेजी से बढ़ते कर्ज और वित्तीय सेवा बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने का मौका मिलेगा।