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Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बैंक ऑफ अमेरिका का बड़ा दावा, कहा- प्रभावी टैरिफ महज 13% रहने का अनुमान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 11 Feb 2026 03:49 PM IST
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सार

बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय निर्यात पर प्रभावी टैरिफ घटकर 12-13% रह सकता है। इसमें कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स पर जीरो ड्यूटी से राहत मिलेगी, जबकि कुछ सेक्टर पर 25% टैरिफ जारी रह सकता है। 

Bank of America makes a big claim on India-US trade deal, says effective tariffs are expected to be just 13%
भारत अमेरिका के बीच व्यापार समझौता - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर रेसिप्रोकल टैरिफ की दर 18 प्रतिशत पर बरकरार रहती है, तो भारतीय निर्यात पर प्रभावी टैरिफ घटकर 12-13 प्रतिशत तक आ सकता है।

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भारतीय निर्यात में कितनी है इलेक्ट्रानिक्स की हिस्सेदारी?

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी 40-45 प्रतिशत है, जिस पर फिलहाल जीरो टैरिफ लागू है। हालांकि, अमेरिका के सेक्शन 232 प्रावधान के तहत लगने वाले शुल्क को जोड़ने पर प्रभावी टैरिफ दर 12 प्रतिशत से कुछ ऊपर रह सकती है।

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पहले चरण की डील में सेक्शन 232 के तहत लगने वाले टैरिफ पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई है। ऐसे में भारतीय ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, लोहा, स्टील और एल्युमिनियम पर करीब 25 प्रतिशत टैरिफ जारी रह सकता है।

श्रम-प्रधान क्षेत्रों को खास फायदा मिलने की उम्मीद

रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेड डील से श्रम-प्रधान क्षेत्रों को खास फायदा मिलने की उम्मीद है। टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण जैसे सेक्टर निर्यात में बढ़त दर्ज कर सकते हैं।

भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी कितनी है?

बोफा ने यह भी कहा है कि भारत द्वारा अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है, जो सालाना करीब 100 अरब डॉलर के आयात के बराबर है। वर्तमान में भारत का कुल आयात बिल लगभग 750 अरब डॉलर है, जिसमें अमेरिकी उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल नहीं होगा।

भारत के चालू खाते पर सीमित असर पड़ने की संभावना

अमेरिका से बढ़े हुए आयात का भारत के चालू खाते पर सीमित असर पड़ने की संभावना जताई गई है, क्योंकि भारत रूस जैसे अन्य देशों की जगह अमेरिका से ऊर्जा आयात कर सकता है। साथ ही सेवाओं के निर्यात में संभावित सुधार से चालू खाते को सहारा मिल सकता है। रिपोर्ट में दिसंबर 2025 तक चालू खाता अधिशेष में रहने का अनुमान जताया गया है।

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