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Budget: बजट से देश के एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा, लाखों को मिलेगा रोजगार

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sun, 01 Feb 2026 06:12 PM IST
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सार

बजट 2026 में एमएसएमई सेक्टर का भी खास ध्यान रखा गया है। इससे देश में चलने वाली छोटी छोटी फैक्ट्रियों को मदद मिलेगी। बजट से देश की निर्माण इकाइयों को बल मिलेगा। 

budget 2026 India will boost the country's MSME sector and create jobs for millions
बजट में एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने की कोशिश - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- @पीआईबी
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में किसानों, युवाओं और महिलाओं के साथ-साथ एमएसएमई सेक्टर को मजबूत बनाने की कोशिश की है। यही कारण है कि देश के एमएसएमई सेक्टर से बजट पर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली में जगह-जगह छोटी-छोटी फैक्ट्रियों में विभिन्न वस्तुओं का निर्माण होता है और इसमें लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि दिल्ली से भी बजट को लेकर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। विशेषकर छोटे-छोटे उत्पादों को निर्माण करने वाले लोगों ने इस बजट का जबरदस्त स्वागत किया है।   

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दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. अनिल गुप्ता ने अमर उजाला से कहा कि बजट से देश की निर्माण इकाइयों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक विकास की धुरी विनिर्माण उद्योग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं। केंद्र सरकार ने बजट में जिस तरह इस सेक्टर को बढ़ावा दिया है, उससे यह साफ हो गया है कि सरकार निर्माण को बढ़ावा देकर देश को एक सुदृढ़ बनाने का काम किया है।

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डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि इस बजट में एमएसएमई क्षेत्र को केवल सहायता प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास का सक्रिय भागीदार माना गया है। उन्होंने कहा कि दस हजार करोड़ के समर्पित एमएसएमई विकास कोष से उद्योगों को इक्विटी आधारित विस्तार पूंजी उपलब्ध होगी जो नए निवेश और रोजगार सृजन को गति देगी। इसके साथ ही स्वावलंबी भारत कोष में 2,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान विकासशील उद्योगों को मिश्रित वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा एमएसएमई से की जाने वाली खरीद को व्यापार देय रसीद छूट प्रणाली (टी-रेड्स) मंच पर अनिवार्य करना, समय पर भुगतान सुनिश्चित करेगा। साथ ही ऋण गारंटी न्यास योजना के अंतर्गत बिना संपार्श्विक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना एमएसएमई क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है।

दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव विनीत जैन ने कहा कि जीईएम और टी-रेड्स के एकीकरण से ऑर्डर से भुगतान तक एक पारदर्शी और तेज़ डिजिटल प्रक्रिया बनेगी। द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के शहरों में प्रस्तावित कॉरपोरेट मित्र से अनुपालन लागत कम होगी और छोटे उद्योगों को सस्ती पेशेवर सहायता मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा कि कई औद्योगिक कच्चे माल और पुर्ज़ों पर आयात शुल्क में राहत से उत्पादन लागत घटेगी। 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन की योजना से स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी। निर्यात उन्मुख एमएसएमई के लिए शुल्क राहत और समय सीमा विस्तार से कार्यशील पूंजी पर दबाव कम होगा।

विनीत जैन ने कहा कि सेवा क्षेत्र के लघु उद्योगों के लिए देखभाल अर्थव्यवस्था, चिकित्सा मूल्य पर्यटन, एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स), डिज़ाइन तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे, जिससे रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि बजट की घोषणाओं को समयबद्ध और प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो यह बजट भारत को उत्पादन, रोजगार और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

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