Budget: औद्योगिक ढांचे को मजबूती उपलब्ध कराता बजट, उत्पादन, निर्यात और खपत केंद्रित व्यवस्था बनाने पर जोर
बजट में औद्योगिक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुओं, मशीनों, कलपुर्जों और तकनीक के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य से लेकर दस प्रतिशत के बीच कर दी गई है।
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चीन और अमेरिका इस समय निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र बने हुए हैं। चीन सामान्य उपभोग की वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बना हुआ है तो अमेरिका और यूरोप के कुछ देश तकनीक, मशीन और युद्ध सामग्री के निर्यातक के रूप में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। भारत अब तक अपनी आंतरिक खपत, खाद्यान्न प्रसंस्कृत उत्पादों और सेवाओं के निर्यात से एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है। लेकिन 2026-27 का बजट यह बताता है कि भारत अब मूलभूत वस्तुओं-सेवाओं के निर्यात के साथ-साथ उन्नत तकनीक पर आधारित वस्तुओं के उत्पादन-निर्यात पर आधारित व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। निर्मला सीतारमण द्वारा पेश नौवां बजट उसी औद्योगिक ढांचे को विश्वसनीय मजबूती प्रदान करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है।
बजट में औद्योगिक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुओं, मशीनों, कलपुर्जों और तकनीक के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य से लेकर दस प्रतिशत के बीच कर दी गई है। सरकार का यह कदम देश में रक्षा उत्पादों, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए सहायक होगा। केंद्र सरकार लगातार देश को रक्षा उत्पादों के एक वैश्विक निर्यातक के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। इससे यह समझ आता है कि सरकार का विजन ही बजट में कानूनी प्रावधानों के रूप में उभर कर सामने आया है।
आज घरेलू उपभोग की छोटी-छोटी वस्तुओं से लेकर कारों-वायुयानों और उपग्रह निर्माण तक में जिस तरह सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग बढ़ रहा है, कोई भी देश चिप्स के लिए चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश पर निर्भर नहीं रह सकता। बजट में देश को इस सेक्टर में मजबूत बनाकर देश को रणनीतिक मजबूती देने की कोशिश की गई है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा सेंटरों के भारत में सेंटर निर्माण करने पर विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलीडे प्रदान करना भी सरकार की उसी नीयत को स्पष्ट करता है जिसके अंतर्गत वह महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहती है।
2047 का विकसित भारत बनाने वाला बजट- भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जर्मनी की ड्यूश बैंक की भारतीय इकाई के पूर्व प्रबंध निदेशक जफर इस्लाम ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को 2047 में एक विकसित देश बनाने की बात करते रहे हैं। वर्तमान बजट देश को उसी दिशा में ले जाने का एक रोड मैप दिखाई देता है। लेकिन कोई भी देश औद्योगिक उत्पादन का केंद्र बने बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता। यह बजट देश को सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्माण की एक वैश्विक इकाई के रूप में विकसित करने का फ्रेम वर्क प्रदान करता है।
जफर इस्लाम ने कहा कि यह बजट नेशन बिल्डिंग का बजट है। भारत की अर्थव्यवस्था को आंतरिक घरेलू खपत ने मजबूत आधार प्रदान किया है। बजट में आंतरिक खपत को प्रोत्साहित करने के लिए दीर्घकालिक प्रावधान किए गए हैं। बजट में 12 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर रखा गया है। सात हाई स्पीड कॉरिडोर, जल मार्ग कॉरिडोर और क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर बनाने का रोडमैप भी बजट में तैयार किया गया है। एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने और पर्यटन को बढ़ाने का प्रावधान भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि स्पेशल टाउनशिप, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और मध्यम-तृतीयक स्तर के शहरों के निर्माण का ढांचा सुधारने की बात भी बजट में प्रमुखता से की गई है। इससे देश के हर हिस्से में रोजगार का निर्माण होगा और लोगों के हाथ में पैसे आएंगे। इससे घर-वाहनों और एफएमसीजी उत्पादों की घरेलू खपत को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। यह पूरे देश के औद्योगिक ढांचे को एक मजबूत और विश्वसनीय उपभोक्ता आधार देता है जो देश को मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।
