सरकार ने उधार में की कटौती: अक्तूबर-मार्च में 7.86 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेगी केंद्र, जानें क्या है प्लान
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अपनी उधारी योजना में 1.20 लाख करोड़ रुपये की बड़ी कटौती की है। जानिए वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये की नई उधारी योजना और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड का विवरण। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अपनी उधारी योजना में बड़ी कटौती की है। सरकार ने अपनी कुल उधारी को 1.20 लाख करोड़ रुपये कम करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी एक सरकारी बयान में दी गई है। सरकार इस अवधि में प्रतिभूतियों के माध्यम से 7.86 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कुल उधार में 1,20,494 करोड़ रुपये की कमी की गई है। यह राजकोषीय विवेक के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कमी मुख्य रूप से 2026-27 में परिपक्व होने वाले जी-सेक की 1,14,286 करोड़ रुपये की अदला-बदली के कारण हुई है। यह भारत सरकार की एक सोची-समझी ऋण-प्रबंधन रणनीति है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 2026-27 के लिए बाजार उधार 15,99,506 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह चालू वित्तीय वर्ष के बजट अनुमान 17,20,000 करोड़ रुपये से कम है। दूसरी छमाही की 7,86,000 करोड़ रुपये की उधार में 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं। चालू माह में समाप्त हो रही पहली छमाही में सरकार ने बॉन्ड से 8,13,506 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह 8.2 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से थोड़ा कम है।
राजकोषीय घाटा और कुल उधार कितनी?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में 17.2 लाख करोड़ रुपये की उधार का प्रस्ताव किया था। यह राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करने के लिए था। राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 फीसदी अनुमानित है। 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 16.9 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार उधार 11.7 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। शेष वित्तपोषण छोटी बचत और अन्य स्रोतों से आने की उम्मीद है।
कैसे होगी यह उधार और क्या हैं शर्तें?
वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में 7,86,000 करोड़ रुपये की कुल बाजार उधार 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरी की जाएगी। यह बाजार उधार 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली प्रतिभूतियों में फैलेगी। विभिन्न परिपक्वता अवधियों के तहत उधार का हिस्सा 3-वर्षीय (6.9 फीसदी) से लेकर 50-वर्षीय (9.9 फीसदी) तक होगा। सरकार प्रतिभूतियों की अदला-बदली और पुनर्खरीद जारी रखेगी। सरकार के पास प्रत्येक प्रतिभूति के लिए 2,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त सदस्यता बनाए रखने का अधिकार होगा।
ट्रेजरी बिल और अन्य वित्तीय उपाय क्या हैं?
वित्तीय वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के दौरान सरकार 13 नीलामी सप्ताहों में प्रति सप्ताह 23,000 करोड़ रुपये ट्रेजरी बिल जारी करेगी। इसमें 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल के तहत 8,000 करोड़ रुपये, 182-दिवसीय ट्रेजरी बिल के तहत 8,000 करोड़ रुपये और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल के तहत 7,000 करोड़ रुपये होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकारी खातों में अस्थायी विसंगतियों को दूर करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही के लिए वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज़ की सीमा 50,000 करोड़ रुपये तय की है। सभी नीलामियों में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली की सुविधा होगी। इसमें अधिसूचित राशि का पांच फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित होगा।