करप्शन इंडेक्स 2025: देश में कुछ भ्रष्टाचारी घटे, ईमानदारों की रैंकिंग में 96 से 91वें नंबर पर; डेनमार्क अव्वल
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से से जारी करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स 2025 में भारत की रैंकिंग सुधरी है। भारत इस रैंकिंग में पायदान चढ़कर 91वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं, डेनमार्क शीर्ष पर है। हालांकि, पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति को अब भी चुनौतीपूर्ण कहा गया है। पढ़ें पूरी खबर।
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दुनिया में भारत की छवि से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आई है। भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से जारी 'करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स (सीपीआई) 2025' में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है। 182 देशों की इस सूची में भारत पांच पायदान की छलांग लगाकर अब 91वें नंबर पर पहुंच गया है। हालांकि, रिपोर्ट में पत्रकारों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ रिपोर्टिंग को लेकर अब भी गंभीर चिंता जाहिर की गई।
रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग के बारे में क्या कहा गया?
मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पिछले साल के मुकाबले अपनी स्थिति बेहतर की है। 2024 में भारत 96वें स्थान पर था, जो अब सुधरकर 91वें स्थान पर आ गया है।
- स्कोर में मामूली बढ़त: इंडेक्स में देशों को 0 (बेहद भ्रष्ट) से 100 (बेहद साफ-सुथरा) के पैमाने पर आंका जाता है। भारत के स्कोर में पिछले साल के मुकाबले 1 अंक की बढ़ोतरी हुई है और यह 39 पर पहुंच गया है।
- ग्लोबल औसत से पीछे: सुधार के बावजूद, भारत का स्कोर (39) अभी भी वैश्विक औसत (42) से कम है। रिपोर्ट बताती है कि 50 से कम स्कोर वाले देशों में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
डेनमार्क टॉप पर, अमेरिका-ब्रिटेन फिसले
सूचकांक में डेनमार्क ने अपनी बादशाहत कायम रखी है। 89 अंकों के साथ वह दुनिया का सबसे कम भ्रष्ट देश बना हुआ है। इसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर का नंबर आता है।
वहीं, दुनिया की स्थापित अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट देखी गई है। अमेरिका 29वें और ब्रिटेन 20वें स्थान पर है। सूची में सबसे निचले पायदान पर दक्षिण सूडान और सोमालिया हैं, जिनका स्कोर महज 9 है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे मजबूत लोकतंत्रों में भी भ्रष्टाचार से निपटने के मानकों में गिरावट आ रही है।
भारत को भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक बताया
बिजनेस और निवेश के लिहाज से रैंकिंग में सुधार अच्छा संकेत है, लेकिन रिपोर्ट का एक पहलू चिंताजनक भी है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को उन देशों की श्रेणी में रखा है जो 'भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक' हैं।
- खतरे की घंटी: रिपोर्ट के अनुसार, 2012 के बाद से दुनिया भर में मारे गए 829 पत्रकारों में से 90% हत्याएं उन देशों में हुई हैं जिनका सीपीआई स्कोर 50 से कम है।
- अन्य देश: इस श्रेणी में भारत (39) के अलावा ब्राजील (35), मैक्सिको (27) और पाकिस्तान (28) भी शामिल हैं। संस्था का कहना है कि जब पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है, तो जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है और भ्रष्टाचार बढ़ता है।
दुनियाभर के देशों के बीच घट रही जवाबदेही
रिपोर्ट में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति को धीमा बताया गया है। साथ ही यह चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में लोग जवाबदेही की कमी से नाराज हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत के लिए संदेश साफ है- रैंकिंग में सुधार स्वागत योग्य है, लेकिन 39 का स्कोर यह बताता है कि अभी 'भ्रष्टाचार मुक्त' होने के लिए लंबा सफर तय करना बाकी है।