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डिफेंस ट्रेड फेयर सिंगापुर एयरशो: एशिया के सुपर-रिच खरीदारों को साधने की होड़, निजी जेट कारोबार में तेज उछाल
अमर उजाला नेटवर्क, सिंगापुर शहर
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 11 Feb 2026 05:31 AM IST
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सार
सिंगापुर एयरशो में एशिया के सुपर-रिच ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए निजी जेट कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा दिख रही है। बिजनेस एविएशन और लग्जरी जेट बाजार तेजी से बढ़ रहा है। लंबी दूरी वाले और हाई-टेक निजी विमान मुख्य आकर्षण बने हैं।
प्राइवेट जेट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
एशिया के सबसे बड़े एविएशन और डिफेंस ट्रेड फेयर सिंगापुर एयरशो में इस बार निजी जेट उद्योग की बढ़ती ताकत साफ नजर आई। विमान निर्माता कंपनियां अब कमर्शियल एयरलाइंस के बजाय बेहद अमीर निजी ग्राहकों और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को साधनों की तैयारी कर रही हैं।
इस रणनीति के तहत गल्फस्ट्रीम ने अपने फ्लैगशिप बिजनेस जेट जी700 को प्रमुखता से प्रदर्शित किया, जिसकी कीमत करीब 7.5 से 8 करोड़ डॉलर (620-660 करोड़ रुपये) बताई जाती है। एयरशो परिसर में यात्री विमानों और सैन्य एयरक्राफ्ट से अलग खड़े इस निजी जेट को देखने को लंबी कतारें लगी रहीं।
बीबीसी के मुताबिक, विमान के भीतर संभावित ग्राहकों के साथ सौदे को लेकर बातचीत चलती रही, जिससे साफ है कि एशिया में सुपर-रिच खरीदारों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
विमान में पैनोरमिक खिड़कियों से आती रोशनी हल्के रंग की लेदर सीटों और पॉलिश्ड लकड़ी के वेनियर पर पड़ती है। केबिन में अलग-अलग लिविंग एरिया हैं। टीवी कंसोल और पीछे की ओर शावर के साथ ग्रैंड सुइट मौजूद है। यह डिजाइन सिर्फ लग्जरी नहीं, बल्कि उद्योग में रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।
बिजनेस एयरक्राफ्ट की मांग में बदलाव
गल्फस्ट्रीम के वर्ल्डवाइड सेल्स प्रमुख स्कॉट नील ने कहा, हम बड़े कॉरपोरेशनों और हाई-नेटवर्थ व्यक्तियों के लिए बिजनेस एयरक्राफ्ट की मांग में बड़ा बदलाव देख रहे हैं। अधिक कंपनियां वैश्विक स्तर पर कारोबार कर रही हैं और उन्हें ज्यादा जगहों तक यात्रा करनी पड़ती है। ऐसा करने का सबसे कुशल तरीका बिजनेस एयरक्राफ्ट है।
ये भी पढ़ें- कारोबार में खूब इस्तेमाल हो रहा AI, अमेरिका के बाद सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा भारत; सुरक्षा अब भी चुनौती
बॉम्बार्डियर से दसॉ तक सभी कंपनियां आमने-सामने
इस सेगमेंट में गल्फस्ट्रीम अकेला खिलाड़ी नहीं है। दसॉ, बॉम्बार्डियर, एम्ब्रेयर और टेक्सट्रॉन एविएशन जैसी कंपनियां भी अमीर ग्राहकों को लुभाने की दौड़ में हैं। हालांकि, पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर निजी विमानों की आलोचना भी हो रही है, लेकिन विमान निर्माताओं ने इसमें बड़ा कारोबारी अवसर देख लिया है।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक, एयरलाइंस आमतौर पर अपने खर्च से सिर्फ दो-चार फीसदी अधिक मुनाफा कमा पाती हैं। इसके उलट, निजी जेट कम संख्या में बिकते हैं, लेकिन उनकी कीमत बेहद ऊंची होती है। कंपनियां सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस प्रोग्राम्स से भी अतिरिक्त कमाई करती हैं।
नई रणनीति: कम थकान, ज्यादा आराम
आज निजी जेट निर्माताओं के लिए यात्रियों की थकान कम करना बड़ा सेलिंग पॉइंट बन गया है। कंपनियां दावा कर रही हैं कि उन्होंने केबिन एयर प्रेशर सुधारा है। शोर कम किया है और इंटीरियर को ऐसे डिजाइन किया है कि लंबी उड़ानें ज्यादा आरामदेह बन सकें। यही तकनीकी सुधार और समय बचत की सुविधा आज के सुपर-रिच ग्राहकों को निजी विमान खरीदने की ओर तेजी से आकर्षित कर रही है।
पांच साल में 70% से ज्यादा बढ़े सुपर-रिच एविएशन इंटेलिजेंस फर्म विंगएक्स के मुताबिक, 2025 में वैश्विक स्तर पर निजी जेट उड़ानों की संख्या 37 लाख रही, जो 2024 से 5 फीसदी और महामारी पूर्व स्तर से 35 फीसदी अधिक है। 2020 से 2025 के बीच दुनिया में अल्ट्रा हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है।
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बीबीसी के मुताबिक, विमान के भीतर संभावित ग्राहकों के साथ सौदे को लेकर बातचीत चलती रही, जिससे साफ है कि एशिया में सुपर-रिच खरीदारों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
विमान में पैनोरमिक खिड़कियों से आती रोशनी हल्के रंग की लेदर सीटों और पॉलिश्ड लकड़ी के वेनियर पर पड़ती है। केबिन में अलग-अलग लिविंग एरिया हैं। टीवी कंसोल और पीछे की ओर शावर के साथ ग्रैंड सुइट मौजूद है। यह डिजाइन सिर्फ लग्जरी नहीं, बल्कि उद्योग में रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।
बिजनेस एयरक्राफ्ट की मांग में बदलाव
गल्फस्ट्रीम के वर्ल्डवाइड सेल्स प्रमुख स्कॉट नील ने कहा, हम बड़े कॉरपोरेशनों और हाई-नेटवर्थ व्यक्तियों के लिए बिजनेस एयरक्राफ्ट की मांग में बड़ा बदलाव देख रहे हैं। अधिक कंपनियां वैश्विक स्तर पर कारोबार कर रही हैं और उन्हें ज्यादा जगहों तक यात्रा करनी पड़ती है। ऐसा करने का सबसे कुशल तरीका बिजनेस एयरक्राफ्ट है।
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बॉम्बार्डियर से दसॉ तक सभी कंपनियां आमने-सामने
इस सेगमेंट में गल्फस्ट्रीम अकेला खिलाड़ी नहीं है। दसॉ, बॉम्बार्डियर, एम्ब्रेयर और टेक्सट्रॉन एविएशन जैसी कंपनियां भी अमीर ग्राहकों को लुभाने की दौड़ में हैं। हालांकि, पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर निजी विमानों की आलोचना भी हो रही है, लेकिन विमान निर्माताओं ने इसमें बड़ा कारोबारी अवसर देख लिया है।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक, एयरलाइंस आमतौर पर अपने खर्च से सिर्फ दो-चार फीसदी अधिक मुनाफा कमा पाती हैं। इसके उलट, निजी जेट कम संख्या में बिकते हैं, लेकिन उनकी कीमत बेहद ऊंची होती है। कंपनियां सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस प्रोग्राम्स से भी अतिरिक्त कमाई करती हैं।
नई रणनीति: कम थकान, ज्यादा आराम
आज निजी जेट निर्माताओं के लिए यात्रियों की थकान कम करना बड़ा सेलिंग पॉइंट बन गया है। कंपनियां दावा कर रही हैं कि उन्होंने केबिन एयर प्रेशर सुधारा है। शोर कम किया है और इंटीरियर को ऐसे डिजाइन किया है कि लंबी उड़ानें ज्यादा आरामदेह बन सकें। यही तकनीकी सुधार और समय बचत की सुविधा आज के सुपर-रिच ग्राहकों को निजी विमान खरीदने की ओर तेजी से आकर्षित कर रही है।
पांच साल में 70% से ज्यादा बढ़े सुपर-रिच एविएशन इंटेलिजेंस फर्म विंगएक्स के मुताबिक, 2025 में वैश्विक स्तर पर निजी जेट उड़ानों की संख्या 37 लाख रही, जो 2024 से 5 फीसदी और महामारी पूर्व स्तर से 35 फीसदी अधिक है। 2020 से 2025 के बीच दुनिया में अल्ट्रा हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है।
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