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Report: कारोबार में खूब इस्तेमाल हो रहा AI, अमेरिका के बाद सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा भारत; सुरक्षा अब भी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 11 Feb 2026 05:15 AM IST
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सार
एंटरप्राइज एआई और मशीन लर्निंग उपयोग में भारत अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। जून से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय उद्यमों ने 82.3 अरब एआई लेनदेन किए, जो एशिया-प्रशांत का 46.2 प्रतिशत है। रिपोर्ट में सरकार समर्थित डिजिटल ढांचे, क्लाउड निवेश और कौशल विकास को मुख्य कारण बताया गया है। एआई सुरक्षा और डेटा नियंत्रण को लेकर चिंता भी जताई गई है।
एआई आधारित स्किल्स की बढ़ी डिमांड
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने के मामले में दुनिया में बड़ी ताकत बनकर उभरा है। एंटरप्राइज एआई/एमएल के इस्तेमाल में अमेरिका के बाद भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। क्लाउड सुरक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जेडस्केलर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उद्यमों ने जून से दिसंबर, 2025 के बीच कुल 82.3 अरब एआई/एमएल लेनदेन दर्ज किए। यह संख्या एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुल एआई गतिविधियों का 46.2 फीसदी है, जो भारत को इस क्षेत्र का निर्विवाद अगुवा बनाती है।
भारत की यह वृद्धि 2025 में सरकार समर्थित निरंतर डिजिटल परिवर्तन प्रयासों के साथ एआई बुनियादी ढांचे और कौशल विकास में बड़े सार्वजनिक एवं निजी निवेश के बिल्कुल अनुरूप है। एआई-सक्षम कार्यबल के विस्तार और क्लाउड-फर्स्ट ढांचे ने पिछले वर्षों की तुलना में देश की इस उल्लेखनीय वृद्धि में योगदान दिया है। क्लाउड-फर्स्ट ढांचे एआई सेवाओं का तेजी से प्रसार करने में मदद करते हैं। यह रिपोर्ट कंपनी के जीरो ट्रस्ट एक्सचेंज मंच पर जनवरी से दिसंबर, 2025 के बीच 1,000 अरब एआई/मशीन लर्निंग लेनदेन के विश्लेषण पर आधारित है।
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प्रौद्योगिकी-संचार क्षेत्र कर रहे वृद्धि की अगुवाई
जेडस्केलर ने थ्रेटलैब्ज-2026 एआई सुरक्षा रिपोर्ट में कहा, भारत में एआई के बढ़ते उपयोग का नेतृत्व मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी और संचार ने किया है। इन क्षेत्रों में 31.3 अरब लेनदेन हुए हैं। इसके बाद विनिर्माण (15.7 अरब), सेवा (12.6 अरब) और वित्त-बीमा (12.2 अरब) क्षेत्रों का स्थान है।
भारत में जेडस्केलर के सीआईएसओ-इन-रेजिडेंस सुब्रत सिन्हा ने कहा, देश में एंटरप्राइज एआई अपनाने का पैमाना अधिकांश संगठनों की इसे नियंत्रित करने की क्षमता से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
कंपनियों के पास संवेदनशील डाटा की जानकारी नहीं
जेडस्केलर ने कहा, भारत में एआई की स्वीकार्यता की मजबूत गति के बावजूद सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें एजेंटिक एआई का हथियार के तौर पर इस्तेमाल और नवाचार-सुरक्षा उपायों के बीच बड़ा अंतर शामिल है।
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अपनाने की रफ्तार में तेजी के बावजूद कई संगठनों के पास अपने सक्रिय एआई मॉडल और उनमें शामिल खूबियों की बुनियादी सूची तक नहीं है। इस कारण उन्हें इस बात की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती कि उनका संवेदनशील डाटा कहां असुरक्षित है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में पिचाई समेत दुनियाभर के दिग्गज होंगे शामिल : यह रिपोर्ट दिल्ली में 16-20 फरवरी तक आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 से एक सप्ताह पहले आई है। इस सम्मेलन में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और क्वालकॉम के क्रिस्टियानो आमोन जैसे दुनिया के प्रौद्योगिकी दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और नवोन्मेषकों के शामिल होने की उम्मीद है।
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जेडस्केलर ने थ्रेटलैब्ज-2026 एआई सुरक्षा रिपोर्ट में कहा, भारत में एआई के बढ़ते उपयोग का नेतृत्व मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी और संचार ने किया है। इन क्षेत्रों में 31.3 अरब लेनदेन हुए हैं। इसके बाद विनिर्माण (15.7 अरब), सेवा (12.6 अरब) और वित्त-बीमा (12.2 अरब) क्षेत्रों का स्थान है।
भारत में जेडस्केलर के सीआईएसओ-इन-रेजिडेंस सुब्रत सिन्हा ने कहा, देश में एंटरप्राइज एआई अपनाने का पैमाना अधिकांश संगठनों की इसे नियंत्रित करने की क्षमता से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
कंपनियों के पास संवेदनशील डाटा की जानकारी नहीं
जेडस्केलर ने कहा, भारत में एआई की स्वीकार्यता की मजबूत गति के बावजूद सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें एजेंटिक एआई का हथियार के तौर पर इस्तेमाल और नवाचार-सुरक्षा उपायों के बीच बड़ा अंतर शामिल है।
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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में पिचाई समेत दुनियाभर के दिग्गज होंगे शामिल : यह रिपोर्ट दिल्ली में 16-20 फरवरी तक आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 से एक सप्ताह पहले आई है। इस सम्मेलन में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और क्वालकॉम के क्रिस्टियानो आमोन जैसे दुनिया के प्रौद्योगिकी दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और नवोन्मेषकों के शामिल होने की उम्मीद है।
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