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Explainer: ईपीएफओ ने पीएफ का पूरा सिस्टम बदल दिया; नया पोर्टल कैसे करेगा काम, आप पर इसका क्या होगा असर?

Sat, 11 Jul 2026 06:20 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 11 Jul 2026 06:20 AM IST
सार

ईपीएफओ ने पीएफ से जुड़ी व्यवस्था में कई बड़े बदलाव कर दिए हैं, जिनका असर करोड़ों कर्मचारियों पर पड़ेगा। नया पोर्टल, आसान क्लेम, तेज ब्याज, ऑटो ट्रांसफर और बदले हुए निकासी नियम, अब पीएफ का पूरा सिस्टम पहले जैसा नहीं रहेगा। आखिर क्या-क्या बदलने वाला है और इसका आपकी जेब पर क्या असर होगा, जानिए इस एक्सप्लेनर में।

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EPFO Overhauls the PF System: How the New Portal Works and What It Means for You
EPFO - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पिछले कुछ दिनों में ईपीएफओ ने पीएफ से जुड़े नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। अगर आपकी सैलरी से हर महीने पीएफ कटता है, तो ये बदलाव सीधे आप पर असर डालेंगे। नया ईपीएफओ पोर्टल, एक राष्ट्रीय डेटाबेस, क्लेम करने का नया सिस्टम, ब्याज मिलने का बदला तरीका और नई ईपीएफ स्कीम 2026, आखिर इन सबका मतलब क्या है? क्या अब पीएफ निकालना पहले से आसान हो जाएगा? नौकरी बदलने पर क्या अब भी पुराने ईपीएफओ ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे? इमरजेंसी में कितने पैसे निकाल सकेंगे? और क्या अब पीएफ का ब्याज भी जल्दी मिलेगा? आइए जानते हैं। 

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क्या है यह राष्ट्रीय डेटाबेस?

पहले ईपीएफओ के हर क्षेत्रीय कार्यालय का अपना अलग डेटाबेस होता था। अब ईपीएफओ ने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्रोजेक्ट के तहत अपने सभी सदस्यों का डेटा एक ही राष्ट्रीय डेटाबेस में स्थानांतरित कर दिया है। यानी अब अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों में अलग-अलग डेटाबेस रखने की व्यवस्था खत्म हो गई है। इससे किसी भी अधिकृत ईपीएफओ कार्यालय से सेवाएं मिल सकेंगी।

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EPFO Overhauls the PF System: How the New Portal Works and What It Means for You
ईपीएफओ - फोटो : Amar Ujala

नए ईपीएफओ पोर्टल पर क्या सुविधाएं?

नए ईपीएफओ सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करते ही एक ही जगह पर सदस्यता से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी। इसमें पीएफ बैलेंस, क्लेम की स्थिति, पेंशन योग्य सेवा का रिकॉर्ड और अब तक मिले सभी लाभ दिखाई देंगे। पहले यह जानकारी अलग-अलग सिस्टम में बंटी हुई रहती थी।

क्लेम करने से पहले ही पता चल जाएगी गलती

अब किसी भी पीएफ क्लेम को प्रोसेस करने से पहले उसका स्वतः सत्यापन (प्री-वैलिडेशन) होगा। अगर आवेदन में कोई कमी या गलती होगी, तो उसकी जानकारी पहले ही एसएमएस और पोर्टल के माध्यम से दे दी जाएगी। इससे क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना कम होगी और पहली बार में ही क्लेम मंजूर होने की संभावना बढ़ेगी।

अब पहले से पता होगा कितना पैसा निकाल सकते हैं

पहले कई सदस्य यह नहीं जानते थे कि अलग-अलग श्रेणियों में वे कितनी राशि निकाल सकते हैं। ऐसे में तय सीमा से अधिक राशि का आवेदन करने पर क्लेम खारिज हो जाता था। अब पोर्टल पर यह भी दिखाई देगा कि किस श्रेणी में कितनी राशि निकाली जा सकती है। इससे सदस्य सही राशि के लिए आवेदन कर सकेंगे।

कितने रुपये तक के क्लेम का होगा खुद निपटारा?

पूरी तरह केवाईसी से जुड़े और सत्यापित पांच लाख रुपये तक के एडवांस क्लेम अब ऑटो सेटलमेंट के जरिए निपटाए जाएंगे। पहले यह सीमा 1 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है।

अगर अतिरिक्त जानकारी मांगी गई तो क्या होगा?

अगर क्लेम की जांच के दौरान किसी अतिरिक्त जानकारी या स्पष्टीकरण की जरूरत होगी, तो ईपीएफओ ऑनलाइन ही सदस्य से जानकारी मांगेगा। सदस्य भी ऑनलाइन जवाब दे सकेंगे। इससे ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और क्लेम का निपटारा तेजी से होगा। अब क्लेम का भुगतान केंद्रीय भुगतान प्रणाली के जरिए किया जाएगा। क्लेम मंजूर होने वाले दिन ही पैसा सीधे सदस्य के बैंक खाते में भेज दिया जाएगा।

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EPFO Overhauls the PF System: How the New Portal Works and What It Means for You
ईपीएफओ - फोटो : Amar Ujala

पीएफ निकासी के नियम में हुए क्या बदलाव?

अब पीएफ से पैसे निकालने के नियम भी आसान कर दिए गए हैं। पहले आंशिक निकासी के लिए 13 अलग-अलग नियम थे, लेकिन अब इन्हें सिर्फ तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

  • पहली श्रेणी है 'आवश्यक जरूरतें', इसमें बीमारी, पढ़ाई और शादी जैसी जरूरतें शामिल हैं।
  • दूसरी श्रेणी है 'आवास संबंधी जरूरतें', इसके तहत घर खरीदना, घर बनाना, जमीन खरीदना, होम लोन चुकाना और घर की मरम्मत या रेनोवेशन जैसे कामों के लिए पीएफ से पैसे निकाले जा सकते हैं।
  • तीसरी श्रेणी है 'विशेष परिस्थितियां', इसमें वे हालात शामिल हैं, जो पहली दो श्रेणियों में नहीं आते।

हालांकि, एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। अब भी पीएफ का पूरा पैसा कभी भी नहीं निकाला जा सकता। नई व्यवस्था के तहत खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि रखना जरूरी होगा। यानी अगर आपके पीएफ खाते में 1 लाख रुपये जमा हैं, तो सामान्य स्थिति में कम से कम 25 हजार रुपये खाते में रहेंगे। बाकी तय नियमों के अनुसार निकाले जा सकेंगे। अगर इलाज के लिए पैसे चाहिए, तो सदस्य अपने या परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद पीएफ से राशि निकाल सकता है। वहीं, अगर पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए, तो अपनी या परिवार के किसी सदस्य की शिक्षा के लिए 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद निकासी की जा सकती है। इसके लिए सदस्य अपने पूरे कार्यकाल में अधिकतम 10 बार पैसे निकाल सकता है।

इसी तरह, अपनी या परिवार के किसी सदस्य की शादी के लिए भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद पीएफ से राशि निकाली जा सकती है। शादी के लिए पूरे कार्यकाल में अधिकतम पांच बार निकासी की अनुमति होगी।

EPFO Overhauls the PF System: How the New Portal Works and What It Means for You
ईपीएफओ - फोटो : Amar Ujala

नौकरी बदलते ही अपने आप ट्रांसफर होगा पीएफ

अब आधार से जुड़े यूएएन वाले पीएफ खाते नौकरी बदलने पर स्वतः ट्रांसफर हो जाएंगे। इसके लिए अलग से आवेदन करने या पुराने और नए नियोक्ता की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पहले सदस्य केवल उसी क्षेत्रीय कार्यालय से सहायता ले सकते थे, जहां उनका पीएफ खाता था। अब देश के किसी भी ईपीएफओ कार्यालय से सहायता और जानकारी ली जा सकेगी।

पेंशनर्स को भी मिलेगा फायदा

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के पेंशनधारक अब किसी भी ईपीएफओ कार्यालय में सेवाएं ले सकेंगे और जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे। साथ ही केंद्रीय पेंशन भुगतान प्रणाली के तहत किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय से मंजूर हुई पेंशन देश के किसी भी बैंक खाते में भेजी जा सकेगी।

EPFO Overhauls the PF System: How the New Portal Works and What It Means for You
ईपीएफओ - फोटो : Amar Ujala

अब पीएफ का ब्याज जल्दी कैसे मिलेगा?

हर साल ईपीएफओ आपके पीएफ खाते में ब्याज जोड़ता है, लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि ब्याज का पैसा काफी देर से मिलता है। कई बार इसके लिए अक्तूबर-नवंबर तक इंतजार करना पड़ता है।

अब सरकार का कहना है कि नया ईपीएफओ पोर्टल इस पूरी प्रक्रिया को तेज कर देगा। रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 का करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का ब्याज नए सिस्टम के जरिए ऑटो प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद फील्ड अधिकारी उसका सत्यापन करेंगे। लक्ष्य है कि 15 जुलाई तक करीब 34 करोड़ ईपीएफ खातों में 8.25% ब्याज जमा हो जाए। लेकिन बदलाव सिर्फ ब्याज जल्दी मिलने तक ही सीमित नहीं है। अब ब्याज की गणना का तरीका भी बदल गया है।

इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपने अपना पूरा पीएफ निकालने के लिए आवेदन किया। पहले नियम यह था कि आपके ब्याज की गणना सिर्फ पिछले महीने के आखिरी दिन तक होती थी। अगर उसके बाद आपका भुगतान 10, 15 या 20 दिन बाद हुआ, तो उस बीच के दिनों का ब्याज आपको नहीं मिलता था, जबकि इंतजार आपको ही करना पड़ता था।

अब नए नियम के तहत अंतिम पीएफ सेटलमेंट में ब्याज की गणना भुगतान की मंजूरी की तारीख तक होगी। यानी जिस दिन आपके भुगतान को मंजूरी मिलेगी, उसी दिन तक का ब्याज आपके खाते में जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर भुगतान में कुछ दिन की देरी भी होती है, तो उन अतिरिक्त दिनों का ब्याज भी अब सदस्य को मिलेगा। 29 जून से सरकार ने ईपीएफ स्कीम 1952 की जगह नई ईपीएफ स्कीम 2026 लागू कर दी है। यह बदलाव सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को लागू करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। 

जल्द आएगा ई-प्राप्ति पोर्टल

ईपीएफओ जल्द ही E-PRAAPTI (इम्प्लोयी प्रोविडेंट फंड आधार बेस्ड एक्सेस पोर्टल फॉर ट्रैकिंग इनऑपरेटिव अकाउंट्स) पोर्टल शुरू करेगा। इसके जरिए पुराने और निष्क्रिय पीएफ खातों की पहचान, ट्रैकिंग, यूएएन से लिंकिंग और उन्हें दोबारा सक्रिय करना आसान होगा। शुरुआत में यह सदस्य आईडी के आधार पर काम करेगा। बाद में उन सदस्यों को भी इसमें शामिल किया जाएगा, जिन्हें अपनी पुरानी सदस्य आईडी याद नहीं है। इस पोर्टल का उद्देश्य मैनुअल प्रक्रिया कम करना, दस्तावेजों की जरूरत घटाना और पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तेज बनाना है।

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