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Finance Minister: वित्त मंत्री सीतारमण सरकारी बैंकों के प्रमुखों से मिलेंगी, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चा

Fri, 10 Jul 2026 08:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 10 Jul 2026 08:27 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों से मिलेंगी। इस बैठक में विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाने और उत्पादक क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रवासी भारतीयों के लिए जमा पर ब्याज दर की सीमा हटा दी है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Finance Minister's Meeting: Focus on Boosting Foreign Currency Deposits, Will it Change the Economy
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : Loksabha

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों से मिलेंगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा जमा जुटाने की प्रगति की समीक्षा करना है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अप्रवासी भारतीयों, भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों और भारतीय मूल के व्यक्तियों की ओर से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
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आरबीआई ने 30 सितंबर तक 3-5 साल की परिपक्वता वाले नए विदेशी मुद्रा अप्रवासी (बैंक) जमा पर ब्याज दर की सीमा हटा दी है। यह कदम तब आया जब एफसीएनआर (बी) जमा का प्रवाह काफी कमजोर हो गया था। वित्त वर्ष 2026 में शुद्ध प्रवाह गिरकर सिर्फ 946 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 7.1 अरब अमेरिकी डॉलर था। सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने पर भी जोर दे सकती हैं।
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विदेशी मुद्रा जमा क्यों महत्वपूर्ण हैं?

विदेशी मुद्रा जमा देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये देश में विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाते हैं। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है। यह रुपये के मूल्य को स्थिर रखने में भी सहायक होता है।
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आरबीआई ने क्या सुविधाएं दी हैं?

आरबीआई ने बैंकों को एफसीएनआर (बी) जमा के लिए रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा दी है। यह सुविधा तीन से पांच साल की परिपक्वता वाले जमा पर लागू होगी। इससे बैंकों को विदेशी मुद्रा जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। यह बैंकों के लिए लागत को भी काफी कम करेगा।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को क्या लाभ मिलेगा?

आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को ईसीबी जुटाने के लिए भी रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा की घोषणा की है। यह सुविधा 30 सितंबर, 2026 तक उपलब्ध रहेगी। राज्य के स्वामित्व वाले उद्यम, विशेष रूप से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, आमतौर पर ईसीबी के माध्यम से सालाना 10-12 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाते हैं।


एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सुविधा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को प्रतिस्पर्धी शुद्ध मूल्य पर धन प्राप्त करने में मदद करेगी। इससे कुल ईसीबी/विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड प्रवाह में गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी, जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 30 फीसदी गिरकर 42.9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया था।
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