{"_id":"6987bedbb5629acf9d0cd83a","slug":"fao-world-food-prices-fell-fifth-consecutive-month-but-rice-inflation-remains-challenge-dairy-prices-dropped-2026-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"एफएओ: लगातार 5वें माह विश्व खाद्य कीमतें गिरीं, चावल की महंगाई बनी चुनौती, डेयरी में करीब पांच प्रतिशत गिरावट","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
एफएओ: लगातार 5वें माह विश्व खाद्य कीमतें गिरीं, चावल की महंगाई बनी चुनौती, डेयरी में करीब पांच प्रतिशत गिरावट
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 08 Feb 2026 04:08 AM IST
विज्ञापन
सार
संयुक्त राष्ट्र की एफएओ रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज हुई। दूध, चीनी और मांस सस्ते हुए हैं, जिससे महंगाई के दबाव में कुछ राहत के संकेत मिले हैं। हालांकि चावल और वनस्पति तेल की कीमतें बढ़ी हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन
विस्तार
Trending Videos
भारत सहित दुनिया भर में महंगाई से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए जनवरी 2026 ने कुछ राहत के संकेत दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई है। दूध, चीनी और मांस जैसे जरूरी उत्पादों के सस्ते होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी आई है, हालांकि चावल और वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें अब भी चिंता का कारण बनी हुई हैं।
एफएओ का फूड प्राइस इंडेक्स, जो दुनिया भर में कारोबार होने वाले प्रमुख खाद्य उत्पादों की मासिक कीमतों में बदलाव को दर्शाता है, जनवरी 2026 में औसतन 123.9 अंक पर रहा। यह दिसंबर 2025 की तुलना में 0.4 फीसदी कम और पिछले साल की समान अवधि से 0.6 फीसदी नीचे है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर वैश्विक बाजार में राहत के संकेत हैं, लेकिन कुछ जरूरी वस्तुओं की महंगाई आने वाले महीनों में चुनौती बन सकती है।
ये भी पढ़ें- India-US Trade Deal: चीन पर भारी पड़ सकता है मेड इन इंडिया, व्यापार समझौते से भारतीय उद्योग को सीधी बढ़त
जनवरी में अनाज की कीमतों में दिसंबर 2025 की तुलना में मामूली 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अनाज मूल्य सूचकांक औसतन 107.5 अंक पर रहा। इस दौरान गेहूं और मक्के की वैश्विक कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली।
एफएओ के अनुसार दुनिया में गेहूं का पर्याप्त भंडार होने के कारण रूस और अमेरिका में मौसम से जुड़ी चिंताओं का असर सीमित रहा। अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी फसल की उम्मीद और वैश्विक स्तर पर ऊंचे भंडार भी कीमतों को नियंत्रित रखने में मददगार रहे। इसके उलट, जनवरी में चावल की कीमतों में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खास तौर पर खुशबूदार किस्मों की मांग बढ़ने से बाजार में मजबूती आई।
भारत के लिए क्या मायने?
वैश्विक स्तर पर दूध, चीनी और मांस की कीमतों में लगातार गिरावट भारत के लिए दोहरी राहत लेकर आ सकती है। इससे आयातित खाद्य उत्पादों की लागत कम होने की संभावना है। चीनी उत्पादन में भारत की बड़ी वृद्धि से घरेलू आपूर्ति मजबूत रहने और निर्यात संभावनाएं बढ़ने के संकेत हैं। इसका लाभ किसानों, चीनी मिलों को हो सकता है। हालांकि चावल, वनस्पति तेल चुनौती में हैं।
भारत-थाईलैंड में चीनी के उत्पादन में वृद्धि के संकेत ः एफएओ के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 में चीनी मूल्य सूचकांक में 1% की गिरावट रही। दिसंबर 2025 में 90.7 अंक पर रहा यह सूचकांक जनवरी में घटकर 89.8 पर आ गया। इसके पीछे भारत में उत्पादन में वृद्धि, थाईलैंड से सकारात्मक संकेत और ब्राजील में अच्छे उत्पादन अनुमानों के चलते वैश्विक आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
अन्य वीडियो-
एफएओ का फूड प्राइस इंडेक्स, जो दुनिया भर में कारोबार होने वाले प्रमुख खाद्य उत्पादों की मासिक कीमतों में बदलाव को दर्शाता है, जनवरी 2026 में औसतन 123.9 अंक पर रहा। यह दिसंबर 2025 की तुलना में 0.4 फीसदी कम और पिछले साल की समान अवधि से 0.6 फीसदी नीचे है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर वैश्विक बाजार में राहत के संकेत हैं, लेकिन कुछ जरूरी वस्तुओं की महंगाई आने वाले महीनों में चुनौती बन सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- India-US Trade Deal: चीन पर भारी पड़ सकता है मेड इन इंडिया, व्यापार समझौते से भारतीय उद्योग को सीधी बढ़त
जनवरी में अनाज की कीमतों में दिसंबर 2025 की तुलना में मामूली 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अनाज मूल्य सूचकांक औसतन 107.5 अंक पर रहा। इस दौरान गेहूं और मक्के की वैश्विक कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली।
एफएओ के अनुसार दुनिया में गेहूं का पर्याप्त भंडार होने के कारण रूस और अमेरिका में मौसम से जुड़ी चिंताओं का असर सीमित रहा। अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी फसल की उम्मीद और वैश्विक स्तर पर ऊंचे भंडार भी कीमतों को नियंत्रित रखने में मददगार रहे। इसके उलट, जनवरी में चावल की कीमतों में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। खास तौर पर खुशबूदार किस्मों की मांग बढ़ने से बाजार में मजबूती आई।
भारत के लिए क्या मायने?
वैश्विक स्तर पर दूध, चीनी और मांस की कीमतों में लगातार गिरावट भारत के लिए दोहरी राहत लेकर आ सकती है। इससे आयातित खाद्य उत्पादों की लागत कम होने की संभावना है। चीनी उत्पादन में भारत की बड़ी वृद्धि से घरेलू आपूर्ति मजबूत रहने और निर्यात संभावनाएं बढ़ने के संकेत हैं। इसका लाभ किसानों, चीनी मिलों को हो सकता है। हालांकि चावल, वनस्पति तेल चुनौती में हैं।
भारत-थाईलैंड में चीनी के उत्पादन में वृद्धि के संकेत ः एफएओ के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 में चीनी मूल्य सूचकांक में 1% की गिरावट रही। दिसंबर 2025 में 90.7 अंक पर रहा यह सूचकांक जनवरी में घटकर 89.8 पर आ गया। इसके पीछे भारत में उत्पादन में वृद्धि, थाईलैंड से सकारात्मक संकेत और ब्राजील में अच्छे उत्पादन अनुमानों के चलते वैश्विक आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
अन्य वीडियो-
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन