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VK Saraswat: 'भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स में निवेश बढ़ाने की जरूरत', नीति आयोग के सदस्य सारस्वत का बयान
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नागपुर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 08 Feb 2026 06:31 PM IST
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सार
VK Saraswat: नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने कहा कि भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स अब काफी तरक्की कर चुके हैं और उन्हें वेंचर कैपिटल्स की ओर से अधिक वित्तीय मदद की जरूरत है। उन्होंने अमेरिका और रूस के साथ संतुलन बनाते हुए रक्षा जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया। सारस्वत ने भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स पर क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत (फाइल)
- फोटो : एक्स/डॉ. वीके सारस्वत
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विस्तार
नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने रविवार को कहा कि रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये स्टार्टअप्स अब काफी तरक्की कर चुके हैं।
अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और रूस के साथ साझेदारी बनाए रखने के बीच संतुलन को लेकर पूछे गए सवाल पर सारस्वत ने कहा कि हमारा फोकस भारत की जरूरतों को पूरा करने पर होना चाहिए, न कि 'ए और बी के बीच चुनने' पर।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक सारस्वत ने कहा कि भारत अपनी प्रगति वैसे ही जारी रखेगा, जैसी देश ने पहले की है, चाहे वैश्विक परिस्थितियां कैसी भी हों। वह 'एडवांटेज विदर्भ -2026 बिजनेस कॉन्क्लेव और इंवेस्टमेंट समिट' के दौरान पीटीआई से बात कर रहे थे।
अमेरिका और रूस के साथ संतुलन के सवाल पर क्या कहा?
रूस के साथ संबंध प्रभावित न हों और अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी मजबूत हो, इस पर उन्होंने कहा कि यह हमारी सुरक्षा और नवीनतम हथियार तकनीक की जरूरतों को पूरा करने का सवाल है। यह 'ए और बी चुनने' का मामला नहीं है।
रक्षा क्षेत्र के बजट आवंटन पर क्या बोले सारस्वत?
ये भी पढ़ें: भारत घटाएगा रूसी तेल का आयात, अमेरिका के साथ मेगा डील के बाद फैसला?; ट्रंप ने हटाया 25% टैरिफ!
बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए कितना धन का आवंटन?
2026-27 के बजट में रक्षा खर्च 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले साल 6.81 लाख करोड़ रुपये था। इसमें से 2,19,306 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं, जिनमें नए हथियार, विमान, युद्धपोत और अन्य सैन्य उपकरण खरीदना शामिल है।
रक्षा अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) और रक्षा स्टार्टअप्स के समर्थन पर पूछे जाने पर सारस्वत ने कहा कि रक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने इसके लिए नवाचार (इनोवेशन) प्रक्रिया बनाई है। उन्होंने कहा कि यह पूरा पारिस्थितिकीतंत्र स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए है। स्टार्टअप्स तेजी से उभर रहे हैं, क्योंकि केंद्र सरकार की नीतियां उन्हें समर्थन दे रही हैं। सारस्वत ने कहा कि स्टार्टअप्स में निवेश करने वालों (वेंचर कैपिटल्स) को रक्षा स्टार्टअप्स को और अधिक वित्तीय समर्थन देना चाहिए, जो अभी पर्याप्त नहीं है।
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अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और रूस के साथ साझेदारी बनाए रखने के बीच संतुलन को लेकर पूछे गए सवाल पर सारस्वत ने कहा कि हमारा फोकस भारत की जरूरतों को पूरा करने पर होना चाहिए, न कि 'ए और बी के बीच चुनने' पर।
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक सारस्वत ने कहा कि भारत अपनी प्रगति वैसे ही जारी रखेगा, जैसी देश ने पहले की है, चाहे वैश्विक परिस्थितियां कैसी भी हों। वह 'एडवांटेज विदर्भ -2026 बिजनेस कॉन्क्लेव और इंवेस्टमेंट समिट' के दौरान पीटीआई से बात कर रहे थे।
अमेरिका और रूस के साथ संतुलन के सवाल पर क्या कहा?
रूस के साथ संबंध प्रभावित न हों और अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी मजबूत हो, इस पर उन्होंने कहा कि यह हमारी सुरक्षा और नवीनतम हथियार तकनीक की जरूरतों को पूरा करने का सवाल है। यह 'ए और बी चुनने' का मामला नहीं है।
रक्षा क्षेत्र के बजट आवंटन पर क्या बोले सारस्वत?
- 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा के लिए आवंटन पर नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने कहा कि इसका मतलब है कि अब देश भविष्य की युद्ध जरूरतों के लिए हथियार और उपकरण बड़े पैमाने पर बनाएगा।
- उन्होंने कहा कि इसका मकसद आत्मनिर्भरता बढ़ाना, निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना, लागत घटाना और उत्पादन दर बढ़ाना है, ताकि भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धी और किफायती बनें।
- सारस्वत ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के अनुसार हथियारों की पसंद और उनकी प्राथमिकता के हिसाब से बजट आवंटन किया गया है।
- उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध गैर-संपर्क युद्ध होंगे और इसके लिए जरूरी तकनीक अलग होगी।
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बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए कितना धन का आवंटन?
2026-27 के बजट में रक्षा खर्च 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले साल 6.81 लाख करोड़ रुपये था। इसमें से 2,19,306 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं, जिनमें नए हथियार, विमान, युद्धपोत और अन्य सैन्य उपकरण खरीदना शामिल है।
रक्षा अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) और रक्षा स्टार्टअप्स के समर्थन पर पूछे जाने पर सारस्वत ने कहा कि रक्षा मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने इसके लिए नवाचार (इनोवेशन) प्रक्रिया बनाई है। उन्होंने कहा कि यह पूरा पारिस्थितिकीतंत्र स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए है। स्टार्टअप्स तेजी से उभर रहे हैं, क्योंकि केंद्र सरकार की नीतियां उन्हें समर्थन दे रही हैं। सारस्वत ने कहा कि स्टार्टअप्स में निवेश करने वालों (वेंचर कैपिटल्स) को रक्षा स्टार्टअप्स को और अधिक वित्तीय समर्थन देना चाहिए, जो अभी पर्याप्त नहीं है।