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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 118 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार का दरवाजा खुला, भारतीय वस्त्र उद्योग को बड़ा मौका

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 08 Feb 2026 12:31 AM IST
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सार

भारत और अमेरिका के नए व्यापार समझौते से भारतीय वस्त्र उद्योग को बड़ा फायदा मिलने जा रहा है। 118 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात बाजार तक पहुंच आसान होगी। जवाबी शुल्क घटने से भारतीय उत्पाद सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे। परिधान, फुटवियर और रसायन जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा। 

India-US trade agreement Opens door 118 billion dollar US market huge opportunity for Indian textile industry
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार

भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए बड़ा अवसर खोल दिया है। इस समझौते के बाद अमेरिका का 118 अरब डॉलर का आयात बाजार भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए ज्यादा सुलभ हो जाएगा। सरकार ने इसे निर्यात, निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है। अमेरिका पहले से ही भारत के वस्त्र निर्यात का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है।

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वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक इस समझौते से भारतीय वस्त्र और परिधान उत्पादों पर लगने वाला 18 प्रतिशत जवाबी शुल्क घटेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को कीमत के मामले में सीधा फायदा मिलेगा। मंत्रालय का कहना है कि अब भारत की स्थिति बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में मजबूत होगी। बड़े अंतरराष्ट्रीय खरीदार भी अब अपनी खरीद रणनीति में भारत को प्राथमिकता दे सकते हैं।
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भारतीय निर्यात को मिलेगा सीधा लाभ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका को भारत का मौजूदा वस्त्र निर्यात करीब 10.5 अरब डॉलर का है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा परिधान का और करीब 15 प्रतिशत मेड-अप्स का है। शुल्क घटने से भारतीय उत्पाद सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे नए ऑर्डर मिलने और निर्यात बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। उद्योग को लागत के मोर्चे पर राहत मिलेगी।

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2030 के निर्यात लक्ष्य को मिलेगा सहारा
सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के वस्त्र निर्यात का लक्ष्य रखा है। मंत्रालय का कहना है कि नया व्यापार समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा। अनुमान है कि कुल वस्त्र निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी पांचवें हिस्से से ज्यादा रह सकती है। इससे बाजार जोखिम भी बंटेगा और निर्यात ढांचा मजबूत होगा।

परिधान, फुटवियर और रसायन क्षेत्र को भी बढ़ावा
इस अंतरिम व्यापार समझौते का फायदा सिर्फ कपड़ा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। परिधान, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर और रसायन जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी राहत मिलेगी। आयात शुल्क घटने से इन सेक्टरों के उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। उद्योग संगठनों का कहना है कि ऊंचे शुल्क के कारण हाल के महीनों में निर्यात प्रभावित हुआ था, अब स्थिति सुधर सकती है।

कई सेक्टरों के लिए कम या शून्य शुल्क का फायदा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार समझौते से कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, रत्न-हीरे, मशीनरी पार्ट्स और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों को भी कम या शून्य जवाबी शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे निर्यात बढ़ने के साथ रोजगार के नए मौके बनेंगे। सरकार का मानना है कि यह समझौता भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात सेक्टर को नई गति देगा।

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