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India-US Deal: भारत घटाएगा रूसी तेल का आयात, अमेरिका के साथ मेगा डील के बाद फैसला?; ट्रंप ने हटाया 25% टैरिफ!
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Sun, 08 Feb 2026 01:07 PM IST
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सार
सूत्रों के अनुसार, भारत आने वाले दिनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर सकता है। यह फैसला अमेरिका के साथ हुई एक व्यापारिक डील के तहत हुआ है। हालांकि, यह आयात अभी पूरी तरह बंद नहीं होगा, क्योंकि नायरा एनर्जी जैसी कुछ रिफाइनरियों के पास दूसरे विकल्प सीमित हैं।
भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने का बनाया प्लान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
India-US Deal: अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के बाद भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना धीरे-धीरे कम कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटाने के बाद केंद्र सरकार इस पर योजना बना रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को इस संबंध में एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए और कहा कि भारत की रूसी तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता के बाद यह कदम उठाया गया है। हालांकि, यह आयात नायरा एनर्जी जैसी कुछ रिफाइनरियों के पास दूसरे विकल्प सीमित होने के कारण अभी पूरी तरह बंद नहीं होगा।
रिफाइनरियों को दिए गए अनौपचारिक आदेश
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों को अभी तक रूस से तेल खरीद पूरी तरह रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है, लेकिन अनौपचारिक तौर पर खरीद कम करने को कह दिया गया है। आमतौर पर तेल के ऑर्डर 6 से 8 हफ्ते पहले दिए जाते हैं, इसलिए पहले से तय सौदों को पूरा किया जाएगा, लेकिन नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और HPCL-मित्तल एनर्जी जैसी कंपनियों ने भारत अमेरिका डील के बाद से ही रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। वहीं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) अब धीरे-धीरे अपनी खरीद घटा रही है।
देश की सबसे बड़ी खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी पिछले साल रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीद रोक दी थी। हालांकि, 1.5 लाख बैरल का एक खेप दोबारा शुरू की गई थी, जिसकी डिलीवरी अगले कुछ हफ्तों में होनी है। इसके बाद रिलायंस के भी पूरी तरह खरीद बंद करने की संभावना है।
नायरा एनर्जी को छूट की जरूरत
इस पूरी व्यवस्था में नायरा एनर्जी अपवाद बनकर सामने आ रही है। नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन ने रूस से संबंधों को लेकर प्रतिबंध लगाए थे। कंपनी में रूस की रोसनेफ्ट की 49.13 फीसदी हिस्सेदारी है। इन प्रतिबंधों की वजह से कोई और बड़ा सप्लायर नायरा से व्यापार करने को तैयार नहीं है, इसलिए कंपनी को गैर-प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से ही तेल खरीदना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस खास स्थिति की जानकारी दिसंबर में अमेरिकी व्यापार अधिकारियों को दी गई थी। ऐसे में नायरा को रूस से तेल न खरीदने की नीति से छूट या विशेष व्यवस्था दी जा सकती है।
रूस से आयात पहले ही घट रहा
सूत्रों ने बताया कि अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से भारत का रूस से तेल आयात पहले ही घट रहा है। दिसंबर 2025 में औसतन आयात 12 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई 2023 में 21 लाख बैरल प्रतिदिन के शिखर स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। अनुमान है कि फरवरी या मार्च में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है। अमेरिका के साथ नए समझौते के बाद इसमें आधी तक गिरावट आ सकती है।
यह भी पढ़ें: India-US Trade Deal: चीन पर भारी पड़ सकता है मेड इन इंडिया, व्यापार समझौते से भारतीय उद्योग को सीधी बढ़त
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90 फीसदी आयात के जरिए पूरा करता है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रूस ने तेल सस्ते दामों पर बेचा, जिससे भारत को आयात बिल कम करने में मदद मिली।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
केपलर के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से निकट भविष्य में रूस से तेल आयात में बड़ी गिरावट नहीं आएगी। उनके मुताबिक, अगले 8 से 10 हफ्तों तक रूसी तेल की सप्लाई पहले से तय है। यह भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से अहम है। पहली तिमाही और दूसरी तिमाही की शुरुआत तक आयात 11 से 13 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच बना रह सकता है।
इक्रा के प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा सकता है और वेनेजुएला से भी आयात शुरू कर सकता है। FY2023 से पहले रूस का भारत के कुल तेल आयात में हिस्सा 2 फीसदी से भी कम था। इसलिए रूसी तेल की जगह दूसरे स्रोतों से तेल लेने पर आयात बिल में 2 फीसदी से कम का ही इजाफा होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि वेनेजुएला का तेल भारी और खट्टा (हेवी और सॉर) होता है, जो आमतौर पर सस्ता होता है और भारत की कई रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
यह भी पढ़ें: अमेरिका से ₹45 लाख करोड़ की ट्रेड डील: भारत के दवा, विमान के पुर्जों और आभूषण सेक्टर को बड़ी राहत, समझें गणित
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रिफाइनरियों को दिए गए अनौपचारिक आदेश
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों को अभी तक रूस से तेल खरीद पूरी तरह रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है, लेकिन अनौपचारिक तौर पर खरीद कम करने को कह दिया गया है। आमतौर पर तेल के ऑर्डर 6 से 8 हफ्ते पहले दिए जाते हैं, इसलिए पहले से तय सौदों को पूरा किया जाएगा, लेकिन नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।
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हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और HPCL-मित्तल एनर्जी जैसी कंपनियों ने भारत अमेरिका डील के बाद से ही रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। वहीं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) अब धीरे-धीरे अपनी खरीद घटा रही है।
देश की सबसे बड़ी खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी पिछले साल रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीद रोक दी थी। हालांकि, 1.5 लाख बैरल का एक खेप दोबारा शुरू की गई थी, जिसकी डिलीवरी अगले कुछ हफ्तों में होनी है। इसके बाद रिलायंस के भी पूरी तरह खरीद बंद करने की संभावना है।
नायरा एनर्जी को छूट की जरूरत
इस पूरी व्यवस्था में नायरा एनर्जी अपवाद बनकर सामने आ रही है। नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन ने रूस से संबंधों को लेकर प्रतिबंध लगाए थे। कंपनी में रूस की रोसनेफ्ट की 49.13 फीसदी हिस्सेदारी है। इन प्रतिबंधों की वजह से कोई और बड़ा सप्लायर नायरा से व्यापार करने को तैयार नहीं है, इसलिए कंपनी को गैर-प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से ही तेल खरीदना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस खास स्थिति की जानकारी दिसंबर में अमेरिकी व्यापार अधिकारियों को दी गई थी। ऐसे में नायरा को रूस से तेल न खरीदने की नीति से छूट या विशेष व्यवस्था दी जा सकती है।
रूस से आयात पहले ही घट रहा
सूत्रों ने बताया कि अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से भारत का रूस से तेल आयात पहले ही घट रहा है। दिसंबर 2025 में औसतन आयात 12 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई 2023 में 21 लाख बैरल प्रतिदिन के शिखर स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। अनुमान है कि फरवरी या मार्च में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है। अमेरिका के साथ नए समझौते के बाद इसमें आधी तक गिरावट आ सकती है।
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भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90 फीसदी आयात के जरिए पूरा करता है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रूस ने तेल सस्ते दामों पर बेचा, जिससे भारत को आयात बिल कम करने में मदद मिली।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
केपलर के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से निकट भविष्य में रूस से तेल आयात में बड़ी गिरावट नहीं आएगी। उनके मुताबिक, अगले 8 से 10 हफ्तों तक रूसी तेल की सप्लाई पहले से तय है। यह भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से अहम है। पहली तिमाही और दूसरी तिमाही की शुरुआत तक आयात 11 से 13 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच बना रह सकता है।
इक्रा के प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा सकता है और वेनेजुएला से भी आयात शुरू कर सकता है। FY2023 से पहले रूस का भारत के कुल तेल आयात में हिस्सा 2 फीसदी से भी कम था। इसलिए रूसी तेल की जगह दूसरे स्रोतों से तेल लेने पर आयात बिल में 2 फीसदी से कम का ही इजाफा होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि वेनेजुएला का तेल भारी और खट्टा (हेवी और सॉर) होता है, जो आमतौर पर सस्ता होता है और भारत की कई रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
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