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FDI: भारत ने 10 हजार करोड़ के विदेशी निवेश को मंजूरी दी, इसमें चीन का हिस्सा सिर्फ एक करोड़

Mon, 03 Aug 2026 09:19 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 03 Aug 2026 09:19 AM IST
सार

FDI यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। सरकार के मुताबिक भारत ने 10 हजार करोड़ के विदेशी निवेश को मंजूरी दी, इसमें चीन का हिस्सा सिर्फ एक करोड़ है। हांगकांग से 610 करोड़ के 13 प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं।

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FDI India approved foreign investment worth 10k crore  share of China only 1 crore know hong kong and others
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का केवल एक प्रस्ताव मंजूर किया, जिसकी कुल राशि एक करोड़ रुपये थी। वहीं, हांगकांग से आए 13 निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनका कुल मूल्य 610.42 करोड़ रहा।

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उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान सरकार ने 63 एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनसे कुल निवेश 10,292.67 करोड़ रुपये (करीब 1.18 अरब डॉलर) रहा। मूल्य के लिहाज से सिंगापुर सबसे बड़ा निवेशक रहा।
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उसके पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनकी कुल राशि 3,259.88 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2024-25 में भी भारत ने 28.71 करोड़ रुपये के सिर्फ एक चीनी एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में आए कुल एफडीआई में चीन की हिस्सेदारी सिर्फ 0.32% रही। इस अवधि में चीन से कुल 2.51 अरब डॉलर (करीब 16,162 करोड़ रुपये) का निवेश आया और वह सूची में 23वें स्थान पर रहा। हांगकांग की
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ड्रैगन पर कड़ा पहरा
भारत ने 2020 में गलवां घाटी में भारत-चीन सैन्य संघर्ष के बाद जारी प्रेस नोट-3 प्रणाली के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चीन सहित भारत की सीमाओं से लगे देशों से आने वाले निवेश के नियम कड़े कर दिए थे। चीन के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान से आने वाले निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी।


इससे पहले ऐसे कई निवेश विभागीय या राज्य स्तर पर मंजूर कर लिए जाते थे। सरकार का उद्देश्य था कि महामारी के दौरान वित्तीय संकट झेल रही भारतीय कंपनियों का सस्ते मूल्य पर अधिग्रहण न हो सके।
हिस्सेदारी 0.62% रही। वह 4.91 अरब डॉलर (करीब 31,220 करोड़ रुपये) के साथ 15वें स्थान पर था।

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