Retail: तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से 80 लाख खुदरा विक्रेता बेचैन, FRAI ने सरकार से की ये अपील
एफआरएआई ने तंबाकू पर टैक्स बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की कीमतों में अचानक और तेज बढ़ोतरी का असर असंगठित रिटेल सेक्टर पर असमान रूप से पड़ता है।
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कानूनी तंबाकू उत्पादों पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी को लेकर फेडरेशन ऑफ रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआरएआई) ने गहरी चिंता जताई है। संगठन ने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील करते हुए कहा है कि इससे छोटे रिटेलरों को नुकसान होगा और अवैध कारोबारियों को बाजार में बढ़त मिल सकती है।
यह प्रतिक्रिया वित्त मंत्रालय की ओर से जारी उस अधिसूचना के बाद आई है, जिसमें वित्त मंत्रालय ने च्यूइंग टोबैको, जर्दा, सेंटेड टोबैको और गुटखा पैकिंग मशीन नियम, 2026 के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 से 8,500 रुपये तक की एक्साइज ड्यूटी तय की है। यह नई दरें 1 फरवरी से लागू होंगी।
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छोटे दुकानदारों की आजीविका पर खतरा
एफआरएआई ने बयान में कहा कि इस फैसले से छोटे दुकानदारों, फुटपाथ विक्रेताओं और फेरीवालों में भारी बेचैनी है, जिनकी आजीविका काफी हद तक रोजमर्रा की खपत वाले उत्पादों, खासकर तंबाकू पर निर्भर करती है। संगठन का दावा है कि वह करीब 80 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम रिटेलरों का प्रतिनिधित्व करता है।
संगठन ने चेतावनी दी कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की कीमतों में अचानक और तेज बढ़ोतरी का असर असंगठित रिटेल सेक्टर पर असमान रूप से पड़ता है, जहां मुनाफा कम और बिक्री वॉल्यूम ज्यादा होता है। कीमतों का झटका उपभोक्ताओं को वैध बाजार से दूर कर सकता है, मोहल्ले की दुकानों पर फुटफॉल घटा सकता है और अवैध व अनियंत्रित विकल्पों को बढ़ावा दे सकता है।
एफआरएआई के संयुक्त सचिव गुलाब चंद खोड़ा ने कहा कि कानूनी उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल से दुकान स्तर पर मांग तुरंत खत्म हो जाती है और ग्राहक अवैध विकल्पों की ओर मुड़ जाते हैं, जिससे छोटे दुकानदार घटती आय और अवैध आपूर्तिकर्ताओं के दबाव के बीच फंस जाते हैं।
व्यापक आर्थिक संदर्भ में संगठन ने क्या कहा?
संगठन ने कहा कि व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली श्रेणी में अचानक कीमत बढ़ने से अन्य क्षेत्रों में महंगाई में आई नरमी का लाभ भी खत्म हो जाता है और GST 2.0 जैसे सुधारों से बनी सकारात्मक धारणा कमजोर पड़ती है।
हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि वह कराधान या सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन उसने सरकार से करों को संतुलित, राजस्व-तटस्थ और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने वाला बनाने की मांग की है।