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Budget 2026: 1 अप्रैल से लागू होगा 'आयकर अधिनियम 2025', कमाई छिपाई तो लगेगा 100% जुर्माना; ITR सुधारने का समय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Sun, 01 Feb 2026 05:26 PM IST
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सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स नियमों में सख्ती और राहत का संतुलन बनाया; छोटी गलतियों पर अब जेल नहीं, लेकिन आय की गलत जानकारी देने वालों की खैर नहीं।
बजट 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश बजट में देश के प्रत्यक्ष कर ढांचे में ऐतिहासिक बदलावों का ऐलान किया है। सरकार ने जहां एक तरफ ईमानदार करदाताओं को अनुपालन में राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ टैक्स चोरी करने या आय छिपाने वालों के लिए नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। यह बजट छह दशक पुराने कानूनों की जगह नए 'आयकर अधिनियम 2025' की नींव रखता है।
जानिए बजट 2026 में टैक्स से जुड़े बड़े बदलावों के बारे में:
आय की गलत जानकारी देने पर 100% जुर्माना सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। बजट प्रस्ताव के अनुसार, अगर कोई करदाता अपनी आय की गलत जानकारी (Income Misreporting) देता है, तो उस पर 100 फीसदी जुर्माना लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि जितनी टैक्स चोरी की कोशिश की गई है, उसके बराबर ही अतिरिक्त राशि दंड के रूप में चुकानी होगी।
ITR सुधारने के लिए अब 31 मार्च तक का वक्त करदाताओं को एक बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 'रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न' (Revised ITR) दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब करदाता वित्त वर्ष खत्म होने के बाद 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक अपने रिटर्न में सुधार कर सकेंगे।
• यह सुविधा ओरिजिनल रिटर्न और देरी से भरे गए रिटर्न दोनों के लिए उपलब्ध होगी।
• हालांकि, 31 दिसंबर के बाद रिटर्न में बदलाव करने पर आय (5 लाख से कम या ज्यादा) के आधार पर 1,000 रुपये या 5,000 रुपये की मामूली फीस देनी होगी।
नियमित रिटर्न भरने की तारीख में बदलाव नहीं
अनिश्चितता से बचने के लिए नियमित रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
• सामान्य करदाताओं के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहेगी।
• बिना ऑडिट वाले बिजनेस या ट्रस्ट अपने रिटर्न 31 अगस्त तक दाखिल कर सकेंगे।
जांच शुरू होने के बाद भी रिटर्न अपडेट करने का मौका मुकदमेबाजी घटाने के लिए एक नई व्यवस्था पेश की गई है। अब करदाता रीअसेसमेंट की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी अपना रिटर्न अपडेट कर सकेंगे।
• इसके लिए उन्हें लागू टैक्स रेट पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना होगा।
• आय की मिस-रिपोर्टिंग के मामलों में, यदि करदाता टैक्स और ब्याज के अलावा बकाया टैक्स के बराबर (100%) अतिरिक्त राशि चुका देता है, तो उसे पेनल्टी और कानूनी कार्यवाही से छूट मिल जाएगी।
छोटी गलतियां अब अपराध नहीं, जेल का डर खत्म
टैक्स कानूनों को तर्कसंगत बनाते हुए वित्त मंत्री ने छोटी-मोटी भूलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है। अब लेखा-बही या दस्तावेज न दिखाने और वस्तु के रूप में भुगतान पर टीडीएस जमा न करने जैसी गलतियों पर सिर्फ जुर्माना लगेगा, मुकदमा नहीं चलेगा। अन्य मामलों में अधिकतम सजा को घटाकर दो साल कर दिया गया है। अदालतों को यह अधिकार दिया गया है कि वे साधारण कैद की सजा को भी जुर्माने में बदल सकें। 1 अप्रैल से लागू होगा नया कानून वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से 'आयकर अधिनियम 2025' लागू हो जाएगा। बजट 2026-27 में किए गए सभी बदलाव इसी नए कानून का हिस्सा होंगे और इसके लिए नए टैक्स रिटर्न फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे।
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जानिए बजट 2026 में टैक्स से जुड़े बड़े बदलावों के बारे में:
आय की गलत जानकारी देने पर 100% जुर्माना सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। बजट प्रस्ताव के अनुसार, अगर कोई करदाता अपनी आय की गलत जानकारी (Income Misreporting) देता है, तो उस पर 100 फीसदी जुर्माना लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि जितनी टैक्स चोरी की कोशिश की गई है, उसके बराबर ही अतिरिक्त राशि दंड के रूप में चुकानी होगी।
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ITR सुधारने के लिए अब 31 मार्च तक का वक्त करदाताओं को एक बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 'रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न' (Revised ITR) दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब करदाता वित्त वर्ष खत्म होने के बाद 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक अपने रिटर्न में सुधार कर सकेंगे।
• यह सुविधा ओरिजिनल रिटर्न और देरी से भरे गए रिटर्न दोनों के लिए उपलब्ध होगी।
• हालांकि, 31 दिसंबर के बाद रिटर्न में बदलाव करने पर आय (5 लाख से कम या ज्यादा) के आधार पर 1,000 रुपये या 5,000 रुपये की मामूली फीस देनी होगी।
नियमित रिटर्न भरने की तारीख में बदलाव नहीं
अनिश्चितता से बचने के लिए नियमित रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
• सामान्य करदाताओं के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहेगी।
• बिना ऑडिट वाले बिजनेस या ट्रस्ट अपने रिटर्न 31 अगस्त तक दाखिल कर सकेंगे।
जांच शुरू होने के बाद भी रिटर्न अपडेट करने का मौका मुकदमेबाजी घटाने के लिए एक नई व्यवस्था पेश की गई है। अब करदाता रीअसेसमेंट की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी अपना रिटर्न अपडेट कर सकेंगे।
• इसके लिए उन्हें लागू टैक्स रेट पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना होगा।
• आय की मिस-रिपोर्टिंग के मामलों में, यदि करदाता टैक्स और ब्याज के अलावा बकाया टैक्स के बराबर (100%) अतिरिक्त राशि चुका देता है, तो उसे पेनल्टी और कानूनी कार्यवाही से छूट मिल जाएगी।
छोटी गलतियां अब अपराध नहीं, जेल का डर खत्म
टैक्स कानूनों को तर्कसंगत बनाते हुए वित्त मंत्री ने छोटी-मोटी भूलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है। अब लेखा-बही या दस्तावेज न दिखाने और वस्तु के रूप में भुगतान पर टीडीएस जमा न करने जैसी गलतियों पर सिर्फ जुर्माना लगेगा, मुकदमा नहीं चलेगा। अन्य मामलों में अधिकतम सजा को घटाकर दो साल कर दिया गया है। अदालतों को यह अधिकार दिया गया है कि वे साधारण कैद की सजा को भी जुर्माने में बदल सकें। 1 अप्रैल से लागू होगा नया कानून वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से 'आयकर अधिनियम 2025' लागू हो जाएगा। बजट 2026-27 में किए गए सभी बदलाव इसी नए कानून का हिस्सा होंगे और इसके लिए नए टैक्स रिटर्न फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे।
