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EU का 'झटका': FTA से पहले भारत के 87% निर्यात पर टैक्स छूट खत्म, टेक्सटाइल से लेकर स्टील तक महंगी होगी डील

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 22 Jan 2026 06:28 PM IST
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सार

India-EU Trade: यूरोपीय यूनियन ने भारतीय निर्यातकों के लिए जीएसपी के फायदे सस्पेंड कर दिए हैं। 1 जनवरी 2026 से टेक्सटाइल, स्टील और प्लास्टिक निर्यात पर टैक्स बढ़ेगा। जानें भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते से पहले इस फैसले का बाजार पर क्या होगा असर?

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भारत और यूरोपीय संघ। (प्रतीकात्मक तस्वीर)) - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इस डील से पहले ही भारतीय निर्यातकों को एक बड़ा झटका लगा है। 1 जनवरी 2026 से ईयू ने भारत के लिए 'जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज' (GSP) के तहत मिलने वाली महत्वपूर्ण टैक्स छूट को निलंबित कर दिया है। इस फैसले के चलते अब यूरोप जाने वाले 87% भारतीय सामानों पर ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी चुकानी होगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत पर असर पड़ेगा।

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क्या है पूरा मामला?
यूरोपीय संघ ने 1 जनवरी, 2026 से 31 दिसंबर, 2028 तक भारत, इंडोनेशिया और केन्या के लिए कुछ विशिष्ट टैरिफ प्राथमिकताओं को निलंबित करने का नियम लागू किया है। आसान भाषा में कहें तो, जीएसपी एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत विकासशील देशों को यूरोप में सामान बेचने पर कम टैक्स देना पड़ता है। लेकिन ईयू के 'ग्रेजुएशन रुल' (Graduation Rules) के मुताबिक, जब किसी देश का निर्यात एक निश्चित सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे यह छूट मिलनी बंद हो जाती है। इसी नियम के तहत भारत के 87% उत्पादों से यह लाभ वापस ले लिया गया है। अब केवल 13% उत्पाद (मुख्य रूप से कृषि और चमड़ा क्षेत्र के ही) ही इस छूट के दायरे में रहेंगे।
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निर्यातकों पर असर: मुनाफा घटा, लागत बढ़ी 
इस फैसले का सबसे बुरा असर भारत के टेक्सटाइल, प्लास्टिक, रसायन, मशीनरी और जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर पर पड़ेगा।
• टैक्स का गणित: पहले जिस गारमेंट (कपड़े) पर GSP के तहत 9.6% ड्यूटी लगती थी, अब उस पर पूरी 12% ड्यूटी लगेगी।
• सेक्टर पर मार: मिनरल्स, केमिकल्स, रबर, पत्थर, सिरेमिक, कीमती धातुएं, लोहा, स्टील और इलेक्ट्रिकल गुड्स जैसे प्रमुख औद्योगिक सेक्टर अब पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आ गए हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय के मुताबिक, भारतीय निर्यातकों को पहले औसतन 20% का टैरिफ लाभ मिलता था, जो अब खत्म हो गया है।

बांग्लादेश और वियतनाम से पिछड़ने का डर
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने इसे 'बड़ा झटका' करार दिया है। चिंता की मुख्य बात यह है कि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों को अभी भी यूरोप में ड्यूटी-फ्री (शून्य टैक्स) या कम ड्यूटी का लाभ मिल रहा है। भारतीय माल महंगा होने से यूरोपीय खरीदार इन देशों का रुख कर सकते हैं, खासकर कपड़ों (Garments) जैसे प्राइस-सेंसिटिव सेक्टर में भारत अपनी पकड़ खो सकता है।

FTA से पहले दोहरी चुनौती 
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और EU 27 जनवरी को FTA वार्ता समाप्त करने की योजना बना रहे हैं। विडंबना यह है कि FTA लागू होने में अभी कम से कम एक साल का समय लग सकता है।

  • मुश्किल दौर: जब तक FTA लागू नहीं होता, भारतीय निर्यातकों को 'हायर टैरिफ' (Higher Tariffs) का सामना करना पड़ेगा।
  • कार्बन टैक्स की मार: GSP का खत्म होना और उसी समय EU के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) टैक्स का शुरू होना, निर्यातकों के लिए दोहरी मुसीबत लेकर आया है।

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा गुड्स ट्रेडिंग पार्टनर है, जिसके साथ 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। लेकिन GSP हटने से भारतीय निर्यात, जो पहले से ही नाजुक वैश्विक स्थितियों का सामना कर रहा है, अब उच्च अनुपालन लागत (Compliance Costs) और कमजोर प्रतिस्पर्धा के चक्रव्यूह में फंस गया है।

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