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Trade: यूरोपीय संघ-भारत के बीच व्यापार समझौता अमेरिका के लिए रणनीतिक संकेत, नोबेल विजेता अर्थशास्त्री का बयान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 30 Jan 2026 06:28 AM IST
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सार
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ व्यापार समझौता बेहद अहम है और यह अमेरिका के लिए एक रणनीतिक संकेत भी है। बनर्जी ने ये भी कहा कि इस व्यापार समझौते का पूरा फायदा उठाने के लिए भारत को अपनी आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा सुधार करना होगा।
नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी
- फोटो : ANI
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विस्तार
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को एक रणनीतिक तालमेल करार दिया। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता अमेरिका को साफ संदेश देता है कि भारत और यूरोप, वाशिंगटन पर उतना निर्भर नहीं हैं, जितना वह सोचता है। अभिजीत ने कहा, ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच यह व्यापार समझौता वॉशिंगटन के लिए एक रणनीतिक संकेत है। अर्थशास्त्री बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मदर ऑफ ऑल डील्स कहे जा रहे इस व्यापार समझौते से अपने-आप व्यापक आर्थिक लाभ नहीं मिलेंगे, इसके लिए भारत को अपनी कार्यकुशलता और आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा सुधार करना होगा।
वियतनाम-बांग्लादेश से कड़ी स्पर्धा
वियतनाम ने ईयू को दिया अमेरिका के बराबर राजनयिक दर्जा
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वियतनाम-बांग्लादेश से कड़ी स्पर्धा
- बनर्जी ने कहा, भारत टेक्सटाइल, चमड़ा और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों पर जोर दे रहा है, उनमें परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।
- भारत ज्वेलरी और चमड़ा उद्योग में मजबूत है, लेकिन टेक्सटाइल में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
- बनर्जी ने असली समस्या आपूर्ति शृंखला और डिलीवरी की गति को बताया।
वियतनाम ने ईयू को दिया अमेरिका के बराबर राजनयिक दर्जा
- वियतनाम व यूरोपीय संघ (ईयू) ने बृहस्पतिवार को अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का एलान किया। यह वियतनाम का सर्वोच्च राजनयिक स्तर है।
- इस उन्नयन से यूरोपीय संघ को अमेरिका, चीन व रूस के समान राजनयिक स्तर प्राप्त हो गया है।
- यह कदम अमेरिकी शुल्क दबाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल के बीच दोनों देशों की तरफ से व्यापार की नई रणनीति बनाने के लिए उठाया गया है। इसकी घोषणा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने हनोई यात्रा के दौरान की।
- कोस्टा ने कहा, ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था कई पक्षों से खतरे में है हमें विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदारों के रूप में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की जरूरत है। यह साझेदारी साझा समृद्धि के क्षेत्रों को विकसित करने के बारे में है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 वर्षों की बातचीत के बाद मंगलवार को कोस्टा वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे।
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