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चिंताजनक: निर्यात पर बढ़ता नियंत्रण और कार्बन कर व्यवस्था, क्या वैश्वीकरण अपने अंतिम दौर में?

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 30 Jan 2026 06:42 AM IST
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सार

निर्यात पर बढ़ते नियंत्रण, विकसित देशों द्वारा प्रौद्योगिकी साझा करने से पीछे हटना और कार्बन कर जैसी व्यवस्थाएं यह संकेत दे रही हैं कि वैश्वीकरण का दौर अब पहले जैसा नहीं रहा। ऐसे बदलते वैश्विक हालात भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

Rising Export Controls and Carbon Tax: Are These Signs of the End of Globalisation?
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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बढ़ते निर्यात नियंत्रण, विकसित देशों के प्रौद्योगिकी देने से इन्कार और कार्बन कर व्यवस्था वास्तव में वैश्वीकरण के अंत का संकेत दे रहे हैं। ऐसे में भारत में स्वदेशी नीतियों पर ध्यान देना अपरिहार्य और आवश्यक है। भारत को आयात प्रतिस्थापन, रणनीतिक मजबूती एवं रणनीतिक अनिवार्यता की अपनी निकट, मध्यम और दीर्घकालिक नीतिगत प्राथमिकताओं को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। समय बर्बाद करने का कोई औचित्य नहीं है। यह एक ही समय में मैराथन और तेजी से दौड़ने जैसा है या मैराथन को स्प्रिंट की तरह दौड़ना है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बृहस्पतिवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 में कहा गया है कि वर्तमान में कोई भी देश ऐसे वातावरण में काम कर रहा है, जहां कच्चा माल, प्रौद्योगिकी और बाजारों तक पहुंच को निर्बाध या स्थायी नहीं माना जा सकता है। ऐसी परिस्थितियों में स्वदेशी एक रक्षात्मक और आक्रामक नीतिगत साधन बन जाता है। यह बाहरी झटकों के बावजूद उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करने का एक माध्यम है।
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साथ ही, आर्थिक संप्रभुता को सुदृढ़ करने वाली स्थायी राष्ट्रीय क्षमताओं के निर्माण का रास्ता साफ करता है। हालांकि, स्वदेशीकरण के लिए एक अनुशासित दृष्टिकोण को लेकर यह स्पष्टता आवश्यक है कि हस्तक्षेप कब दीर्घकालिक क्षमता का निर्माण करता है और कब यह सिर्फ अक्षमता को बनाए रखता है।

चीन पर आयात निर्भरता में कमी
आर्थिक समीक्षा में आगे कहा गया है, सवाल अब यह नहीं है कि राज्य को स्वदेशी को प्रोत्साहित करना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि दक्षता, नवाचार या वैश्विक एकीकरण को कमजोर किए बिना ऐसा कैसे किया जाए। पीएम नरेंद्र मोदी ने बार-बार लोगों और उद्योगों दोनों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया है। सरकार ने चीन पर आयात निर्भरता घटाने और घरेलू विनिर्माण बढ़ाने को कई उपाय किए हैं।

स्वदेशी अनुशासित रणनीति
स्वदेशी एक अनुशासित रणनीति है, न कि सर्वव्यापी सिद्धांत। स्थायी संरक्षण उन क्षेत्रों में सही नहीं है, जहां भारत प्रतिस्पर्धी है, बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए कच्चा माल महत्वपूर्ण हैं। ऐसे संरक्षण के प्रति आगाह किया गया है, जो निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादकों को बढ़ावा देता है। उलट शुल्क ढांचे के जरिये मौजूदा स्थिति को मजबूत करता है। समर्थन और नवाचार, सीखने एवं वैश्विक एकीकरण के बीच संबंध को तोड़ता है।

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