सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   RBI Guidelines on Mis-selling Banking News Hindi RBI Draft Circular Financial Consumer Protection

लोन के साथ बीमा खरीदने का दबाव तो नहीं बना रहा आपका बैंक?: आरबीआई का यह अपडेट जान लीजिए, मिल सकता है हर्जाना

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 11 Feb 2026 10:10 PM IST
विज्ञापन
सार

अब बैंक कर्मचारी अपना 'टारगेट' पूरा करने के लिए आपको गलत उत्पाद नहीं बेच पाएंगे। रिजर्व बैंक ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए कड़े ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। जानिये रिफंड, बंडलिंग और इंसेंटिव पर क्या है नया प्रस्ताव।

RBI Guidelines on Mis-selling Banking News Hindi RBI Draft Circular Financial Consumer Protection
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार

क्या आप भी बैंकों के लगातार आने वाले अनचाहे कॉल्स या लोन लेते समय जबरन चिपकाए गए बीमा उत्पादों से परेशान हैं? अगर हां, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आपके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 'मिस-सेलिंग' (गलत तरीके से उत्पाद बेचना) की संस्कृति को खत्म करने के लिए बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

Trending Videos


आरबीआई ने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री के लिए नए मसौदा निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ प्रस्ताव दिया गया है कि बैंकों को ऐसी किसी भी प्रोत्साहन संरचना से बचना चाहिए, जो कर्मचारियों को ग्राहकों को गलत उत्पाद बेचने के लिए प्रेरित करती हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


इंसेंटिव और 'पुश' सेल पर लगेगा पूर्ण विराम
नए ड्राफ्ट में आरबीआई ने बैंकों के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी नीतियां और प्रथाएं न तो मिस-सेलिंग के लिए प्रोत्साहन पैदा करें और न ही कर्मचारियों या डायरेक्ट सेल्स एजेंटों (डीएसए) को उत्पादों की बिक्री को 'पुश' करने के लिए प्रोत्साहित करें।

अक्सर देखा जाता है कि बैंक कर्मचारियों के बीच ज्यादा प्रोडक्ट बेचने की होड़ लगी होती है। आरबीआई ने इस पर नकेल कसते हुए कहा है कि बिजनेस यूनिट्स के बीच बिक्री के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित करना या 'टार्गेटेड सेलिंग' के लिए विशिष्ट दिन तय करना जैसी प्रथाएं बंद होनी चाहिए। इसके अलावा, ड्राफ्ट में यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स (जैसे म्यूचुअल फंड या बीमा) बेचने वाले कर्मचारियों को उस तीसरी पार्टी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई इंसेंटिव नहीं मिलना चाहिए।

अब नहीं चलेगी 'लोन के साथ बीमा' जैसी बंडलिंग
ग्राहकों की सबसे बड़ी शिकायत 'बंडलिंग' को लेकर होती है, जहां बैंक लोन के साथ जबरदस्ती कोई अन्य प्रोडक्ट बेच देते हैं। आरबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, बैंकों को किसी भी थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट या सर्विस को अपने खुद के प्रोडक्ट के साथ बंडल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने जोर देकर कहा है कि ग्राहक को विभिन्न कंपनियों के विकल्पों में से अपनी पसंद का प्रोडक्ट चुनने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

गलती साबित हुई तो पूरा पैसा होगा वापस
इस ड्राफ्ट का सबसे कड़ा पहलू जवाबदेही तय करना है। आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि जिन मामलों में मिस-सेलिंग साबित हो जाएगी, वहां बैंकों को उत्पाद या सेवा की खरीद के लिए ग्राहक द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि वापस करनी होगी। इतना ही नहीं, बैंक को एक स्वीकृत पॉलिसी के तहत मिस-सेलिंग के कारण हुए किसी भी नुकसान के लिए ग्राहक को हर्जाना भी देना होगा।

कॉल करने के समय और 'डार्क पैटर्न' पर सख्ती
डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों को भ्रमित करने वाली तकनीकों पर भी आरबीआई की नजर है:

  • सहमति जरूरी: बैंक ग्राहकों को कॉल तभी कर सकेंगे जब उन्होंने इसकी सहमति दी हो।
  • समय सीमा: प्रमोशनल कॉल्स केवल ऑफिस के कामकाज के घंटों के दौरान ही किए जा सकेंगे।
  • डार्क पैटर्न: आरबीआई ने बैंकों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके यूजर इंटरफेस (ऐप या वेबसाइट) में किसी भी तरह के 'डार्क पैटर्न' का इस्तेमाल न हो। ड्राफ्ट में ऐसे लगभग एक दर्जन मामलों को सूचीबद्ध किया गया है जिनसे बैंकों को बचना चाहिए।

आम लोगों से 4 मार्च तक मांगी गई राय
उल्लेखनीय है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले ही इस तरह के विनियमों को लाने के व्यापक इरादे की घोषणा की थी, जिसके बाद यह ड्राफ्ट जारी किया गया है। आम जनता और हितधारकों को इस मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 4 मार्च तक का समय दिया गया है।

आरबीआई का यह कदम बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो ग्राहकों को न केवल अनचाहे उत्पादों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बैंकों की जवाबदेही भी तय होगी। अब गेंद बैंकों के पाले में है कि वे अपनी कार्यप्रणाली को कैसे सुधारते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed