Crypto: सरकार ने कसा शिकंजा, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर जुड़ने वाले यूजर्स के लिए जियो टैगिंग अनिवार्य
क्रिप्टो बाजार में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) ने सख्त नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए नए धनशोधन रोधी और अपने ग्राहक को जाने दिशानिर्देशों के तहत लाइवनेस डिटेक्शन के साथ सेल्फी लेना, जियो टैगिंग रिकॉर्ड करना और पेनी ड्रॉप तरीके से बैंक खाते का सत्यापन करना अनिवार्य कर दिया है।
इस महीने आठ तारीख को जारी इन ताजा दिशानिर्देशों के अनुसार क्रिप्टो एक्सचेंजों को आभासी डिजिटल संपत्ति (वीडीए) सेवा प्रदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अब इन्हें सिर्फ दस्तावेजों के अपलोड से आगे बढ़कर गहन जांच का सामना करना पड़ेगा।
एफआईयू ने 8 जनवरी को अपडेट दिशा-निर्देशों को जारी किया है। इसमें टंबलर, मिक्सर और गुमनामी बढ़ाने वाले टोकन से जुड़े लेनदेन को सुविधा नहीं दी जाएगी। ये दिशानिर्देश वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टोकरेंसी) से संबंधित सेवाएं देने वाली रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी (एएमएल) और आतंकवाद वित्तपोषण का मुकाबला (सीएफटी) दिशानिर्देश का हिस्सा हैं। इन दिशानिर्देशों को मार्च, 2023 में पहली बार प्रकाशित होने के लगभग तीन साल बाद अपडेट किया गया है।
‘डीपफेक’ के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रुकेगी
इसके तहत उपयोगकर्ताओं को अब एक ‘सजीव सेल्फी’ लेनी होगी। इसमें ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा, जो यह पुष्टि करेगा कि व्यक्ति खुद वहां मौजूद है। इसमें पलक झपकाने या सिर हिलाने को कहा जाएगा। यह कदम फोटो या ‘डीपफेक’ के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु:
केवाईसी सख्त: क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए ग्राहक का पैन, लाइवनेस डिटेक्शन वाली सेल्फी और ऑनबोर्डिंग लोकेशन के साथ आईपी एड्रेस लेना अनिवार्य।
वास्तविक उपयोगकर्ता की पुष्टि: ऑनबोर्डिंग के समय यह सुनिश्चित करना होगा कि दी गई जानकारी उसी व्यक्ति की हो जो वास्तव में एप का उपयोग कर रहा है और खाता बना रहा है।
लाइवनेस डिटेक्शन अनिवार्य: ग्राहक की लाइव फोटो लेकर शारीरिक उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी; यह तकनीक भारत में पहले से कई कानूनी प्रक्रियाओं में उपयोग होती है।
संपर्क विवरण का सत्यापन: मोबाइल नंबर और ईमेल का ओटीपी के जरिए सत्यापन जरूरी।
अतिरिक्त पहचान पत्र: पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसे अन्य पहचान दस्तावेज भी एकत्र करने के निर्देश।
बैंक खाता सत्यापन: पेनी-ड्रॉप तंत्र के जरिए बैंक खाते के स्वामित्व और सक्रियता की पुष्टि।
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केवाईसी अपडेट की आवृत्ति:
- उच्च जोखिम वाले ग्राहकों के लिए हर 6 महीने में
- अन्य ग्राहकों के लिए वार्षिक केवाईसी अपडेट
उच्च जोखिम की परिभाषा: कर आश्रय देशों या एफएटीएफ की ग्रे/ब्लैक लिस्ट से जुड़े व्यक्ति या संस्थाएं उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं।