The Bonus Market Update: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से फिसला बाजार; सेंसेक्स 561 अंक गिरा, निफ्ट 24052 पर
हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ; निफ्टी 158.95 अंक गिरकर 24,052.05 पर आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 54 पैसे गिरकर 96.22 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। आइए जानते हैं बाजार का पूरा हाल विस्तार से।
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विस्तार
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांग मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स 561.46 (0.72%) अंकों की गिरावट के बाद 77,054.94 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 158.96 (-0.66%) अंक फिसलकर 24,052.05 के स्तर पर चला गया। मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान टीएमपीवी, एचडीएफसी लाइफ के शेयरों में तीन-तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 54 पैसे गिरकर 96.22 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।
गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव हावी रहा, जिसमें वित्तीय, ऑटो, रियल एस्टेट और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। यह बाजार के सतर्क माहौल को दर्शाता है। स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स और एफएमसीजी जैसे सुरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ धातुओं में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली। कुल मिलाकर रुझान से पता चलता है कि निवेशकों ने व्यापक अनिश्चितता के बीच आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश कम करते हुए अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स कहां तक फिसला?
तीन दिन की तेजी के बाद 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 फीसदी गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 614.92 अंक या 0.79 फीसदी तक गिरकर 77,001.48 पर पहुंच गया था। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 फीसदी की गिरावट के साथ 24,052.05 पर समाप्त हुआ। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक के शेयरों में सर्वाधिक 4.42 फीसदी की गिरावट आई। बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, भारतीय स्टेट बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और लार्सन एंड टुब्रो भी प्रमुख नुकसान में रहे। वहीं, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, सन फार्मा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल के शेयर लाभ में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 4.26 फीसदी उछलकर 86.85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बाजार की चाल पर जानकारों की क्या राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने और भारत की कंपनियों की आय में सुधार में देरी की आशंका बढ़ी है। रुपये का 96 प्रति डॉलर के स्तर को पार करना भी चिंता का विषय रहा, जिससे आयातित महंगाई बढ़ने की आशंका है।
क्या महंगाई ने भी बाजार को झटका दिया?
जून में थोक मूल्य महंगाई दर बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई, जो मई में 9.68 फीसदी थी। खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि इसका मुख्य कारण रही। यह बढ़ती महंगाई भी बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत मानी जा रही है। निवेशकों को अब भविष्य की आर्थिक नीतियों पर नजर रखनी होगी।
विदेशी निवेशकों का क्या रुख रहा?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफएफआई) ने सोमवार को 3,062.27 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, यह बिकवाली बाजार पर अतिरिक्त दबाव का कारण बनी। सोमवार को सेंसेक्स 47.01 अंक या 0.06 फीसदी बढ़कर 77,616.40 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी सोमवार को मामूली 4.10 अंक या 0.02 फीसदी की बढ़त के साथ 24,211 पर समाप्त हुआ था।