Aviation Fare Row: हवाई किराये की मनमानी वसूली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जानिए सरकार को क्या निर्देश दिया गया
त्योहारों पर महंगे हवाई टिकट और छिपे हुए चार्ज से परेशान यात्रियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। जानिए क्या है भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 और सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के मायने।
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त्योहारों या आपात स्थिति में मनमाने हवाई किराए से परेशान यात्रियों को जल्द राहत मिल सकती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने निजी एयरलाइनों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के तहत नए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को तेज कर चुकी है और इसे तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दो टूक लहजे में कहा कि यदि एयरलाइंस नए नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन्हें उड़ान भरने से रोक दिया जाए (ग्राउंडेड कर दिया जाए)।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या कड़े निर्देश दिए हैं?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सरकार ने जब सीलबंद लिफाफे में नए नियमों का मसौदा पेश किया, तो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "आप इसे सात दिनों के भीतर प्रकाशित करें।" बेंच ने साफ चेतावनी दी कि यदि कोई भी एयरलाइन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसकी उड़ानें रोक दी जाएं। हालांकि, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने पीठ को भरोसा दिलाया कि आखिरी दौर की चर्चाएं जारी हैं और तीन हफ्ते के भीतर अंतिम नियमों को अधिसूचित कर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
हवाई यात्रियों की जेब पर किस तरह डाका डाल रही हैं निजी एयरलाइंस?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने अदालती तंत्र और मौजूदा नियमों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। याचिका में निजी एयरलाइंस के कई मनमाने कदमों को उजागर किया गया है:
- सामान के नियमों में कटौती: बिना किसी कारण के मुफ्त चेक-इन सामान की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी गई। इससे पहले जो सेवा मुफ्त टिकट का हिस्सा थी, उसे अब कमाई के नए जरिए में बदल दिया गया।
- सिंगल-पीस पॉलिसी: केवल एक ही बैग चेक-इन करने की अनुमति दी जा रही है। चेक-इन बैग का उपयोग नहीं करने पर भी यात्री को टिकट की कीमत में कोई छूट नहीं मिलती।
- त्योहारों पर लूट: त्योहारों या मौसम खराब होने पर किराए आसमान छूने लगते हैं, जिससे आखिरी वक्त में यात्रा करने वाले गरीब यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
क्या सरकार के पास किराए पर लगाम लगाने की शक्ति है?
सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि नागरिक उड्डयन मंत्री ने संसद में कहा था कि सरकार हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय नहीं कर सकती। वर्तमान में कोई भी स्वतंत्र नियामक नहीं है जिसके पास हवाई किराए या अन्य छिपे हुए शुल्कों की समीक्षा करने या उन पर नियंत्रण लगाने की कानूनी शक्ति हो। इसी वजह से एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के जरिए यात्रियों का शोषण करती हैं। याचिका में दलील दी गई है कि इस तरह की अपारदर्शी नीतियां नागरिकों के समानता और देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने के मौलिक अधिकारों का हनन करती हैं।
नए 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' से क्या बदलाव आएंगे?
विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाया गया यह नया कानून जनवरी 2025 में ही लागू हो चुका है, लेकिन इसके नियम अभी बनाए जा रहे हैं। अदालत ने मसौदे का अवलोकन करने के बाद टिप्पणी की कि इसमें यात्रियों की शिकायतों के निवारण और किराए को नियंत्रित करने के लिए एक तंत्र का सुझाव तो है, लेकिन नियामक की स्वायत्तता और शक्तियों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि नए नियमों के लागू होने तक पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे, लेकिन यात्रियों के हितों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।