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बजट 2026-27: कानून मंत्रालय के ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट को 1200 करोड़ रुपये; डिजिटल न्यायपालिका की ओर बड़ा कदम
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sun, 01 Feb 2026 05:35 PM IST
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सार
केंद्रीय बजट 2026-27 में कानून मंत्रालय के ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के लिए 1,200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह प्रोजेक्ट भारतीय न्यायपालिका को डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के बजट में कानून मंत्रालय के महत्वाकांक्षी ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के लिए 1,200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह योजना देश की सभी अधीनस्थ अदालतों को डिजिटलीकरण के माध्यम से आधुनिक बनाने का उद्देश्य रखती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सके।
ई-कोर्ट्स फेज- III का उद्देश्य और वित्तीय आवंटन
केंद्रीय बजट के मुताबिक, ई-कोर्ट्स फेज- III के लिए आवंटित 1200 करोड़ रुपये का बजट पिछले साल के 1,500 करोड़ रुपये से कम है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारतीय न्यायपालिका में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से सुधार लाना है, जिससे न्यायपालिका को पूरी तरह से डिजिटल बनाया जा सके।
2023 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट के तीसरे चरण को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी थी, जिसमें 7,210 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। यह योजना चार वर्षों में लागू की जाएगी और इसके तहत सबोर्डिनेट अदालतों को डिजिटल किया जाएगा।
ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि और महत्व
ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट की शुरुआत 2007 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत हुई थी। यह योजना भारतीय न्यायपालिका को ICT-enable करने का प्रयास है, ताकि अदालतों में विलंबित मुकदमे की समस्याओं को कम किया जा सके और मामलों की सुनवाई को तेज किया जा सके। प्रोजेक्ट के फेज- II का समापन 2023 में हुआ था और अब तीसरे चरण का उद्घाटन होने जा रहा है। इसके तहत, अदालतों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जहां केस की सुनवाई और अन्य दस्तावेजों का आदान-प्रदान ऑनलाइन होगा।
डिजिटल न्यायपालिका की दिशा में अहम कदम
इस कदम से भारत की न्यायपालिका को पूरी तरह से डिजिटल और स्वचालित बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अदालतों के दस्तावेज, न्यायिक रिकॉर्ड, और फाइलों का प्रबंधन किया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी और मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट न्यायालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक होगा, क्योंकि सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेंगी। इसके साथ ही, न्यायिक अधिकारियों और कानूनी कार्यकर्ताओं के लिए यह एक आदर्श उदाहरण बनेगा, जो डिजिटल तकनीकी का उपयोग कर अपनी कार्यकुशलता को बढ़ा सकते हैं।
सीतारमण के नाम है सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड
देश का सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम पर दर्ज है। उन्होंने 2020 में सबसे लंबा 2 घंटे 42 मिनट का बजट भाषण दिया था। उसके बाद उनका भाषण औसत तौर पर डेढ़ घंटे का रहा है। निर्मला सीतारमण ने 2019 में वित्त मंत्री बनने के बाद 2 घंटे 17 मिनट, 2020 में सबसे लंबा 2 घंटे 42 मिनट, 2021 में 1 घंटे 40 मिनट, 2022 में 1 घंटे 31 मिनट, 2023 में 1 घंटे 27 मिनट, 2024 में (अंतरिम बजट) 56 मिनट, 2024 में (पूर्ण बजट) 1 घंटे 25 , 2025 में 1 घंटे 17 मिनट और 2026 में 1 घंटे और 25 मिनट का भाषण दिया है।
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ई-कोर्ट्स फेज- III का उद्देश्य और वित्तीय आवंटन
केंद्रीय बजट के मुताबिक, ई-कोर्ट्स फेज- III के लिए आवंटित 1200 करोड़ रुपये का बजट पिछले साल के 1,500 करोड़ रुपये से कम है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारतीय न्यायपालिका में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से सुधार लाना है, जिससे न्यायपालिका को पूरी तरह से डिजिटल बनाया जा सके।
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2023 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट के तीसरे चरण को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी थी, जिसमें 7,210 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। यह योजना चार वर्षों में लागू की जाएगी और इसके तहत सबोर्डिनेट अदालतों को डिजिटल किया जाएगा।
ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि और महत्व
ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट की शुरुआत 2007 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत हुई थी। यह योजना भारतीय न्यायपालिका को ICT-enable करने का प्रयास है, ताकि अदालतों में विलंबित मुकदमे की समस्याओं को कम किया जा सके और मामलों की सुनवाई को तेज किया जा सके। प्रोजेक्ट के फेज- II का समापन 2023 में हुआ था और अब तीसरे चरण का उद्घाटन होने जा रहा है। इसके तहत, अदालतों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जहां केस की सुनवाई और अन्य दस्तावेजों का आदान-प्रदान ऑनलाइन होगा।
डिजिटल न्यायपालिका की दिशा में अहम कदम
इस कदम से भारत की न्यायपालिका को पूरी तरह से डिजिटल और स्वचालित बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अदालतों के दस्तावेज, न्यायिक रिकॉर्ड, और फाइलों का प्रबंधन किया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी और मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट न्यायालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक होगा, क्योंकि सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेंगी। इसके साथ ही, न्यायिक अधिकारियों और कानूनी कार्यकर्ताओं के लिए यह एक आदर्श उदाहरण बनेगा, जो डिजिटल तकनीकी का उपयोग कर अपनी कार्यकुशलता को बढ़ा सकते हैं।
सीतारमण के नाम है सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड
देश का सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम पर दर्ज है। उन्होंने 2020 में सबसे लंबा 2 घंटे 42 मिनट का बजट भाषण दिया था। उसके बाद उनका भाषण औसत तौर पर डेढ़ घंटे का रहा है। निर्मला सीतारमण ने 2019 में वित्त मंत्री बनने के बाद 2 घंटे 17 मिनट, 2020 में सबसे लंबा 2 घंटे 42 मिनट, 2021 में 1 घंटे 40 मिनट, 2022 में 1 घंटे 31 मिनट, 2023 में 1 घंटे 27 मिनट, 2024 में (अंतरिम बजट) 56 मिनट, 2024 में (पूर्ण बजट) 1 घंटे 25 , 2025 में 1 घंटे 17 मिनट और 2026 में 1 घंटे और 25 मिनट का भाषण दिया है।
