Budget 2026: क्या 2026-27 पुरानी टैक्स व्यवस्था का अंतिम वर्ष होगा? 72% हो चुके शिफ्ट, अब आपके फैसले की बारी
Union 2026: क्या नए बजट में खत्म होगी पुरानी कर व्यवस्था? 72% करदाता नई रिजीम में शिफ्ट हो चुके हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण से पहले जानें ₹12 लाख तक टैक्स छूट, नए स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन का पूरा सार।
विस्तार
भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा नई टैक्स व्यवस्था को 'डिफ़ॉल्ट' बनाने और इसे लगातार आकर्षक बनाने के कदमों का असर अब आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। वित्त मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 (आकलन वर्ष 2024-25) के लिए फाइल किए गए कुल आयकर रिटर्न (आईटीआर) में से लगभग 72% करदाताओं ने नई टैक्स व्यवस्था को चुना है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वित्त वर्ष 2026-27 पुरानी टैक्स व्यवस्था के अंत की शुरुआत होगी?
आंकड़ों से समझें: नई व्यवस्था की ओर कितना झुकाव?
आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर 2025 तक 7.3 करोड़ से ज्यादा आयकर रिटर्न (ITRs) दाखिल किए गए, जो पिछले वर्ष के 7.28 करोड़ के रिकॉर्ड को पार कर गया है। जिनमें से 5.27 करोड़ रिटर्न नई टैक्स व्यवस्था के तहत आए। यह कुल फाइलिंग का 72% से अधिक है। इसके विपरीत, केवल 28% (लगभग 2.01 करोड़) करदाताओं ने ही पुरानी व्यवस्था को चुनना पसंद किया। विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब के सरलीकरण और छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग तेजी से इस ओर आकर्षित हुआ है।
पिछले वर्ष की बजट में क्या बदलाव हुआ?
बजट 2025 के प्रस्तावों ने नई टैक्स व्यवस्था को और भी मजबूत बना दिया। वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए सरकार ने नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाने का फैसला। अब ₹12 लाख तक की सालाना आय वाले व्यक्तियों को (धारा 87A के तहत बढ़ी हुई रिबेट के कारण) प्रभावी रूप से कोई आयकर नहीं देना होगा। अब इस बार के बजट में इस बारे में सरकार के फैसले पर नजर टिकी रहेगी।
नई टैक्स व्यवस्था के मौजूदा स्लैब
- ₹0 से ₹4 लाख: शून्य
- ₹4 लाख से ₹8 लाख: 5%
- ₹8 लाख से ₹12 लाख: 10%
- ₹12 लाख से ₹16 लाख: 15%
- ₹16 लाख से ₹20 लाख: 20%
- ₹20 लाख से ₹24 लाख: 25%
- ₹24 लाख से अधिक: 30%
पुरानी टैक्स व्यवस्था के स्लैब (60 वर्ष से कम आयु के लिए)
- ₹0 से ₹2.5 लाख: शून्य
- ₹2.5 लाख से ₹5 लाख: 5% (धारा 87A के तहत ₹12,500 तक की रिबेट, यदि आय ₹5 लाख से कम है)
- ₹5 लाख से ₹10 लाख: 20%
- ₹10 लाख से अधिक: 30% (नोट: पुरानी व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 पर स्थिर है।)
इसके साथ ही, पिछले बजट में वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया था, जिससे ₹12.75 लाख तक की आय वाले वेतनभोगी करमुक्त हो सकते हैं। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार इसमें कोई बदलाव करती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
पुरानी व्यवस्था का भविष्य: क्या यह आखिरी चरण है?
पुरानी टैक्स व्यवस्था में पिछले कई वर्षों से स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जहां नई व्यवस्था में 30% का उच्चतम टैक्स रेट ₹24 लाख के बाद शुरू होता है, वहीं पुरानी व्यवस्था में यह मात्र ₹10 लाख के बाद ही प्रभावी हो जाता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक पुरानी व्यवस्था को बंद करने की किसी 'सनसेट डेट' (अंतिम तिथि) की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह से नई व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाया गया है और पुरानी व्यवस्था को स्थिर रखा गया है, उससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में यह अप्रासंगिक हो सकती है।
क्या करदाताओं के लिए आगे की राह होगी और आसान?
72% करदाताओं का नई व्यवस्था की ओर शिफ्ट होना इस बात का प्रमाण है कि लोग अब जटिल निवेश आधारित कटौती (80C, 80D) के बजाय कम दरों और सरल अनुपालन को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि आप भी पुराने निवेशों और कटौती के लाभों में फंसे हैं, तो वित्त वर्ष 2026-27 आपके लिए अपनी टैक्स प्लानिंग पर पुनर्विचार करने का महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। इस के बजट में देखने वाली बात यह होगी कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट भाषण में करदाताओं के लिए आगे की राह और आसान करने वाली हैं या नहीं।
