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West Asia Crisis: 'अर्थव्यवस्था के लिए अग्निपरीक्षा का दौर, लेकिन हम निपटने के लिए तैयार'; बोले सीईए नागेश्वरन

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 12 May 2026 06:31 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ा है और उसमें रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। इस बीच, सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने भारत की आर्थिक मजबूती के बारे में सकारात्मक बातें कहीं हैं। पीएम मोदी की ओर से देश के लोगों से मितव्ययिता की अपील के बीच सीईए क्या-क्या कहा है, आइए जानते हैं विस्तार से।

West Asia Crisis a Live BoP Stress Test for India, but Economy is Ready to Navigate: CEA Nageswaran
मुख्य आर्थिक सलाहार वी अनंत नागेश्वरन। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संकट देश के भुगतान संतुलन की असल परीक्षा है। इसका महंगाई, चालू खाते और विनिमय दर पर सीधा असर पड़ता है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को यह यह बात कही। हालांकि, नागेश्वरन ने यह भी कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे पर किया गए निवेश और सुधारों से मौजूदा स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है। 

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पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और संघर्ष का सीधा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद पिछले दो महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है, इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है। इस संकट पर देश के मंगलवार को मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस संकट को भारत के भुगतान संतुलन के लिए परीक्षा (लाइव बैलेंस ऑफ पेमेंट (बीओपी) स्ट्रेस टेस्ट) करार दिया। किसी देश के पास विदेशों से आने और विदेशों में जाने वाले डॉलर का हिसाब होता है। इसी को इसी को भुगतान संतुलन या बैलेंस ऑफ पेमेंट कहते हैं।
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उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर महंगाई, चालू खाते और विनिमय दर पर पड़ रहा है, लेकिन भारत का मजबूत बुनियादी ढांचा इस चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। वहीं, हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री ने भी देशवासियों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है।

सीआईआई इंडिया बिजनेस सत्र को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए चालू खाते को विश्वनीय तरीके से प्रबंधित करना, उसे फाइनेंस करना और रुपये की और अधिक गिरावट को रोकना सबसे बड़ी और व्यापक आर्थिक प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 2020 से पहले की वैश्विक आर्थिक स्थिति अब वापस नहीं लौटेगी और ऐसा सोचना एक रणनीतिक भूल होगी। नागेश्वरन ने दुनिया में हो रहे चार अहम संरचनात्मक बदलावों के बारे में बताया-

  1. भू-आर्थिक बिखराव: सप्लाई चेन को अब केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि संकट से बचाव के लिए दोबारा खड़ा किया जा रहा है।
  2. तकनीक का बंटवारा: सेमीकंडक्टर और डिजिटल बुनियादी ढांचा अब प्रतिस्पर्धी तकनीकी इकोसिस्टम में बंट रहा है।
  3. ऊर्जा संक्रमण: स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बढ़ने का प्रीमियम या लागत।
  4. भू-राजनीतिक जोखिम: हर बड़े बाजार में अब भू-राजनीतिक खतरों की कीमत स्थायी रूप से तय की जा रही है।

पश्चि एशिया संकट भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

नागेश्वरन ने बताया कि यह संकट केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर भारी निर्भरता है:

  • भारत अपनी जरूरत का 87 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसका 46 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
  • इस मार्ग पर टैंकरों की आवाजाही का सात-दिवसीय औसत गिरकर केवल 5 रह गया है।
  • देश का 60 प्रतिशत एलपीजी (एलपीजी) आयात होता है, और इसका 90 प्रतिशत से अधिक खाड़ी देशों से आता है।
  • भारत में आने वाले कुल रेमिटेंस (देश के बाहर रहने वाले लोगों की ओर से देश में भेजा जाने वाला धन) का 38 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है। 

महंगे कच्चे तेल के कारण भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ने की आशंका है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में सेंध लग सकती है। अनुमान है कि चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2026 के 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 1.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसका असर मुद्रा पर भी दिखा है और मंगलवार को एक डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। 

पीएम मोदी ने देश से क्या अपील की है?

पश्चिम एशिया के इस संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक रैली के दौरान विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम सुझाए। उन्होंने जनता से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, कार-पूलिंग करने, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने और शहरों में मेट्रो का सफर करने की अपील की। इसके अलावा, पीएम मोदी ने पार्सल भेजने के लिए रेलवे का उपयोग करने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने और सोने की खरीदारी व विदेश यात्राओं को फिलहाल टालने का आग्रह किया है ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे।

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