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Budget 2026: गिग वर्कर्स, यूट्यूबर-फ्रीलांसर्स को बजट से क्या चाहिए? टैक्स और सामाजिक सुरक्षा पर ये उम्मीद

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 30 Jan 2026 03:59 PM IST
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सार

बजट 2026-27 से देश में तेजी से बढ़ रहे गिग वर्कर्स, यूट्यूबर और फ्रीलांसर्स को क्या उम्मीदें हैं? टैक्स छूट, सामाजिक सुरक्षा और करों के मामले में उनकी क्या मांगें हैं, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

What are the expectations of Gig Workers, YouTubers, and Freelancers from Budget 2026-27? Union Budget
बजट 2026-27 - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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क्या भारत में अब 'नौकरी' का मतलब सिर्फ सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक की डेस्क जॉब है? जवाब है- नहीं। यूट्यूबर, फ्रीलांसर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एप-बेस्ड ड्राइवर अब देश की आर्थिक रीढ़ बन चुके हैं। ये न्यू एज वर्कर्स कमाते तो डिजिटल तरीके से हैं लेकिन टैक्स नियमों के पुराने जाल में फंसे हैं। डिजिटल इंडिया की इस बदलती तस्वीर के बीच 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश कर रही हैं। डिजिटल इंडिया की बदलती तस्वीर के बीच अब बड़ा सवाल नए जमाने के कामगारों (गिग वर्कर्स) को लेकर है। इन कामगारों में करीब 40 फीसदी ऐसे हैं, जिनकी मासिक कमाई 15,000 रुपये से भी कम है। देखना यह है कि क्या वित्त मंत्री इन्हें इस बजट में कोई राहत देंगी। 
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बदलती कमाई बनाम पुराना टैक्स ढांचा
भारत की अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल युग में है, लेकिन हमारा टैक्स सिस्टम अभी भी पारंपरिक वेतनभोगियों के हिसाब से ज्यादा डिजाइन किया हुआ लगता है। फ्रीलांसर्स और डिजिटल क्रिएटर्स की कमाई हर महीने एक जैसी नहीं होती; यह प्रोजेक्ट-बेस्ड और कमीशन-बेस्ड होती है।

आयकर विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए AIS और TIS जैसे डिजिटल टूल्स जरूर अपनाए हैं, लेकिन कमाई के मल्टीपल सोर्स होने के कारण सही डिडक्शन क्लेम करना और ITR फाइल करना आज भी इन प्रोफेशनल्स के लिए एक जटिल पहेली बना हुआ है।

आंकड़ों में गिग इकोनॉमी: 1.2 करोड़ का विशाल वर्कफोर्स
चार्टर्ड एकाउंटेंट शुभम सिंघल के अनुसार, सरकार के पास इस वर्ग की अनदेखी करने का विकल्प अब नहीं बचा है। 'इकोनॉमिक सर्वे 2025-26' के आंकड़े बताते हैं कि भारत में गिग वर्कर्स की संख्या वित्त वर्ष 2021 में 77 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2025 तक बढ़कर लगभग 1.2 करोड़ हो चुकी है।

अनुमान तो यहां तक है कि 2029-30 तक देश के कुल रोजगार में इनका हिस्सा 6.7% होगा। लेकिन चमकती डिजिटल दुनिया के पीछे एक कड़वा सच यह भी है कि करीब 40% गिग वर्कर्स की मासिक कमाई 15,000 रुपये से भी कम है। आय की अनिश्चितता और क्रेडिट प्रोफाइल की कमी इनके लिए बड़ी चुनौती है।

बजट 2026 से क्या हैं अपेक्षाएं?
इस बार के बजट से डिजिटल प्रोफेशनल्स और गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें  हैं:

  • सरल टैक्स नियम: डिजिटल और गिग इनकम के लिए कन्फ्यूजन रहित नियम।
  • अलग डिडक्शन: फ्रीलांसर्स के काम से जुड़े खर्चों के लिए अलग डिडक्शन स्ट्रक्चर।
  • सोशल सिक्योरिटी: गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा और पेंशन का प्रावधान, जो अभी नदारद है।
  • आसान रिफंड: कंप्लायंस प्रक्रिया को तेज और रिफंड को आसान बनाना।

हाउसहोल्ड टैक्सेशन: क्या मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?
सिंघल ने बताया कि बजट 2026-27 के लिए एक और दिलचस्प मांग 'हाउसहोल्ड टैक्सेशन' की है। कई विकसित देशों की तर्ज पर भारत में भी यह चर्चा है कि पति-पत्नी की आय को आंशिक रूप से मर्ज कर टैक्स लगाने या अतिरिक्त 'फैमिली-बेस्ड डिडक्शन' देने पर विचार हो। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों को ऊंचे टैक्स स्लैब से राहत मिल सकती है और घरेलू बचत को बढ़ावा मिलेगा।

भविष्य नहीं, 'वर्तमान' है यह वर्कफोर्स
फ्रीलांसर और गिग वर्कर्स अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि भारत की 'ग्रोथ स्टोरी' का वर्तमान हैं। बजट 2026 सरकार के पास एक सुनहरा मौका है- एक ऐसा टैक्स इकोसिस्टम बनाने का जो तकनीक-अनुकूल हो और नई पीढ़ी की कमाई को समझता हो। अब देखना यह है कि 1 फरवरी 2026 को सरकार इस डिजिटल वर्कफोर्स को अपनी प्राथमिकता सूची में कितना ऊपर रखती है।
 

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