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Budget: राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ने के बीच क्या घट पाएगा केंद्र के कर्ज का भार? बजट को लेकर ये बोले व्यय सचिव

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 02 Feb 2026 01:34 PM IST
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सार

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से राज्यों को केंद्र से ज्यादा पैसा मिलेगा, इसलिए केंद्र को खर्च, घाटा और कर्ज पर सावधानी बरतनी होगी। आयोग ने राज्यों की कर हिस्सेदारी 41% रखने और स्थानीय निकायों के अनुदान बढ़ाने की सिफारिश की है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Can the Centre Rein in Its Debt Burden as States Get a Bigger Share? Expenditure Secretary Speaks
16वें वित्त आयोग की सिफारिशें - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्यों को केंद्र से बहुत बड़ी रकम मिलने वाली है। इसी वजह से केंद्र सरकार को अपने खर्च, घाटे और कर्ज को कम करने की योजना पर बहुत सोच-समझकर चलना होगा। यह बात व्यय सचिव वी वुअलनाम ने सोमवार को कही।

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केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41% तय करने का सुझाव

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनागरिया की अगुआई वाले आयोग ने सुझाव दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से अगले पांच साल तक केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41% ही रखी जाए। यानी केंद्र जितना टैक्स वसूलेगा, उसका 41% हिस्सा राज्यों को मिलेगा।

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ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाला अनुदान को दोगुना

इसके अलावा आयोग ने कहा है कि ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों (जैसे पंचायतें और नगरपालिकाएं) को मिलने वाला अनुदान दोगुना किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास के काम बेहतर ढंग से हो सकें। 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 2026-27 से 2030-31 की अवधि में कुल 7.91 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है, जिससे जमीनी स्तर पर बुनियादी सेवाओं और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, राज्यों के लिए हस्तांतरण के बाद के राजस्व घाटे के अनुदान को समाप्त करने की सिफारिश की। 


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आयोग के फार्मूले के तहत राज्यों को कैसे मिलेगा लाभ?

बजट के बाद वुअलनाम ने कहा कि वित्त आयोग के फार्मूले के तहत केंद्रीय कर संग्रह से राज्यों को लगभग 14 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके अलावा, अनुदानों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) व केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं (Central Sector Schemes) को मिलाकर कुल मिलाकर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि राज्यों को हस्तांतरित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। अब यह जरूरी है कि हम बेहद सावधानी से आगे बढ़ें, ताकि हमारे राजकोषीय लक्ष्य और कर्ज घटाने की तय दिशा बनी रहे।

बजट में राजकोषीय घाटे को लेकर क्या अनुमान?

  • इसी बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3% पर रखने का लक्ष्य तय किया है, जो चालू वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान 4.4% से कम है।
  • बजट अनुमान के मुताबिक, कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 2026-27 में 55.6% रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह 56.1% था।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि कर्ज-से-जीडीपी अनुपात में लगातार गिरावट से ब्याज भुगतान का बोझ कम होगा।  
  • इससे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।
  • केंद्र सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को 50±1 प्रतिशत तक लाना है।
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