China-US: लैटिन अमेरिका में बढ़ रहा चीनी सामानों का दबदबा, जानिए स्थानीय उद्योग और नौकरियां पर इसका क्या असर
अमेरिकी टैरिफ के बाद चीन ने लैटिन अमेरिका में सस्ते सामानों का निर्यात बढ़ाया है। इससे उपभोक्ताओं को फायदा हुआ, लेकिन स्थानीय उद्योगों और नौकरियों पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते कई देश टैरिफ और अन्य सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं।
विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और भू-राजनीतिक कदमों के बाद चीन के निर्यातकों ने लैटिन अमेरिका को बड़ा बाजार बना लिया है। नतीजतन, क्षेत्र के देशों में सस्ती चीनी कारें, ई-कॉमर्स सामान, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स की बाढ़ आ गई है, जिससे स्थानीय उद्योगों और नौकरियों पर दबाव बढ़ रहा है।
चीन की घरेलू मांग कमजोर है और कई उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ चुकी है। ऐसे में 60 करोड़ से अधिक आबादी और बढ़ते मध्यम वर्ग वाला लैटिन अमेरिका चीनी कंपनियों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है। पिछले साल अमेरिका को चीन का निर्यात करीब 20% घटा, जबकि लैटिन अमेरिका और अन्य क्षेत्रों को शिपमेंट बढ़ा।
इंटर-अमेरिकन डायलॉग थिंक टैंक की एशिया-लैटिन अमेरिका प्रोग्राम निदेशक मार्गरेट मायर्स के अनुसार, लैटिन अमेरिका में क्रय शक्ति और वास्तविक मांग है, इसलिए चीन के लिए अतिरिक्त उत्पादन खपाने का यह सबसे आसान इलाका है।
सस्ता ई-कॉमर्स, स्थानीय कारोबार पर मार
लैटिन अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए सस्ते चीनी सामान राहत हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए चुनौती। चीनी प्लेटफॉर्म टेमू और शीन ने बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। सेंसर टॉवर के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में टेमू के लैटिन अमेरिका में औसत मासिक सक्रिय यूजर्स 11.4 करोड़ रहे एक साल में 165% की बढ़त। शीन के यूजर्स भी 18% बढ़े।
मेक्सिको सिटी के डाउनटाउन में चीनी माल से भरी दुकानों की संख्या हाल के वर्षों में तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है। स्थानीय दुकानदार प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए जूझ रहे हैं।
आयात से नौकरियों पर क्या असर?
अर्जेंटीना में हालात ज्यादा गंभीर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्तूबर में ई-कॉमर्स आयात (अधिकांश चीन से) 237% उछल गया। कपड़ा उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि रिकॉर्ड आयात के चलते फैक्ट्रियां कम क्षमता पर चल रही हैं और छंटनियां हो रही हैं।
ऑटो सेक्टर में चीनी कंपनियों की तेज एंट्री
लैटिन अमेरिका के ऑटो हब मेक्सिको और ब्राजील में सस्ती चीनी कारों का दबाव बढ़ा है। बीवाईडी और जीडब्ल्यूएम जैसे ब्रांड तेजी से बाजार पकड़ रहे हैं। ब्राजील में 2024 में बिके ईवी का 80% से ज्यादा हिस्सा चीनी ब्रांड्स का था। वहीं मेक्सिको 6.25 लाख चीनी कारों के आयात के साथ सबसे बड़ा गंतव्य बन गया।
यूबीएस के चीन ऑटो रिसर्च प्रमुख पॉल गोंग के मुताबिक, किफायती कीमतों और सरकारी समर्थन के कारण ईवी में चीन को स्पष्ट बढ़त है। हालांकि, दोनों देशों की अपनी मजबूत ऑटो इंडस्ट्री है और वे प्रतिस्पर्धा को लेकर सतर्क हैं।
तैयार माल से बढ़ता असंतुलन
चीन को ब्राजील का लिथियम, चिली का तांबा और पेरू का फिशमील चाहिए, लेकिन कई देशों के साथ व्यापार घाटा बढ़ रहा है। मेक्सिको का चीन के साथ घाटा 2024 में 120 अरब डॉलर तक पहुंचा। अर्जेंटीना का घाटा 2025 में 8.2 अरब डॉलर रहा। ब्राजील और चिली को कुछ अधिशेष जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर चीन से आयात तेज है।
2014-23 के दौरान चीन ने लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में 153 अरब डॉलर के ऋण-अनुदान दिए अमेरिका से लगभग तीन गुना। पेरू का चांके मेगापोर्ट जैसे प्रोजेक्ट चीन की गहरी मौजूदगी दिखाते हैं।
कुछ देशों की सख्ती, लेकिन सीमा तय
मेक्सिको ने चीनी आयात पर 50% तक टैरिफ लगाए हैं। ब्राजील और चिली ने कम-मूल्य पार्सल पर कर छूट घटाई/खत्म की और ईवी आयात शुल्क बढ़ाए। विश्लेषकों का मानना है कि और संरक्षणवादी कदम आ सकते हैं, लेकिन देशों को संतुलन साधना होगा क्योंकि चीन की आर्थिक पकड़ मजबूत है और प्रतिशोध का जोखिम भी।
