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Reliance Infra: मुंबई मेट्रो वन के खिलाफ दाखिल SBI और IDBI की दिवालिया याचिका एनसीएलटी से खारिज, जानें मामला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 15 Apr 2024 02:50 PM IST
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सार
Reliance Infra: एनसीएलटी ने मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (एमएमओपीएल) के खिलाफ एसबीआई और आईडीबीआई बैंक की दिवालिया याचिका को खारिज करते हुए इसका निपटारा कर दिया है। रिलायंस इंन्फ्रास्ट्रक्चर ने 15 अप्रैल को एक्सचेंज फाइलिंग में इस बात का खुलासा किया।
अनिल अंबानी की कंपनी को बड़ी राहत
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ी राहत देते हुए एनसीएलटी ने मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (एमएमओपीएल) के खिलाफ एसबीआई और आईडीबीआई बैंक की दिवालिया याचिका को खारिज करते हुए इसका निपटारा कर दिया है। कंपनी ने 15 अप्रैल को एक्सचेंज फाइलिंग में इस बात का खुलासा किया।
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कंपनी ने कहा, "हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि एसबीआई और आईडीबीआई बैंक की धारा 7 याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया है। एनसीएलटी मुंबई द्वारा सभी उधारदाताओं द्वारा जारी ओटीएस के मद्देनजर मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (एमएमओपीएल) के खिलाफ याचिका को खारित कर दिया गया है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) के साथ कंपनी का एक संयुक्त उद्यम है (जहां कंपनी 74% और एमएमआरडीए की 26% हिस्सेदारी है)।"
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इस साल जनवरी में इंडियन बैंक एमएमओपीएल के खिलाफ दिवालिया याचिका दायर करने वाला तीसरा बैंक बन गया था। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और आईडीबीआई बैंक ने बकाये की वसूली के लिए पिछले साल एमएमओपीएल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की थी।
एमएमओपीएल को परियोजना के लिए इन ऋणदाताओं से लोन मिला था। एमएमओपीएल में कंसोर्टियम का कुल कर्ज 1,711 करोड़ रुपये था। इससे पहले इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले को पलट पलटते हुए दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को रिलायंस इंफ्रा की सहायक कंपनी, दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का मध्यस्थता के तहत डीएमआरसी को लौटाने के लिए कहा था। हालांकि कंपनी ने दावा किया था कि उसे ऐसी कोई राशि मिली नहीं है, ऐसे में इस फैसले से उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आईबीसी की धारा 7 के तहत किसी कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ आवेदन एक वित्तीय लेनदार की ओर से या वित्तीय लेनदारों के समूह की ओर से संयुक्त रूप से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए शुरू दिया जाता है।
