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क्रिप्टोकरेंसी: निवेश को संसदीय समिति ने बताया चिंताजनक, देश से बाहर जा रहे पैसे पर सख्त टैक्स की वकालत

Wed, 20 May 2026 09:33 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 20 May 2026 09:33 PM IST
सार

क्रिप्टोकरेंसी में हजारों करोड़ के निवेश पर संसदीय समिति ने जताई गंभीर चिंता। भारत में क्रिप्टो पर टैक्स, आरबीआई के रुख और वैश्विक नियमों से जुड़ी पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें।

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Parliamentary Panel Flags 'Alarming' Crypto Investments, Stresses on Stringent Taxation
Crypto Currency - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) यानी क्रिप्टोकरेंसी में हो रहे भारी-भरकम निवेश को लेकर संसदीय समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। बुधवार को वित्त पर संसदीय स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें डिजिटल संपत्तियों में देश से बाहर जा रहे हजारों करोड़ रुपयों के निवेश को 'चिंताजनक' (अलार्मिंग) करार दिया गया। समिति ने इस बात पर जोर दिया है कि जब तक भारत में क्रिप्टो को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं बनता, तब तक इन सभी डिजिटल लेन-देन पर सख्त टैक्स व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

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हजारों करोड़ का निवेश और राजस्व अधिकारियों से चर्चा

भाजपा सांसद भतृहरि महताब की अध्यक्षता वाली इस स्थायी समिति ने वीडीए के विषय पर विस्तृत चर्चा की। महताब ने बताया कि भारत से हजारों करोड़ रुपये वर्चुअल डिजिटल एसेट्स में निवेश किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश से बाहर जा रहे हैं। इस जटिल मुद्दे को समझने के लिए समिति ने न केवल भारत में पंजीकृत और संचालित हो रहे क्रिप्टो स्टेकहोल्डर्स की प्रस्तुतियां देखीं, बल्कि कराधान (टैक्सेशन) के मुद्दे पर राजस्व सचिव, आयकर विभाग और कॉरपोरेट मामलों के सचिव को भी तलब किया। महताब ने स्पष्ट किया कि चूंकि कुछ संगठन सिंगापुर जैसे देशों में स्थित हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो भी पैसा वहां निवेश हो रहा है और जो कमाई हो रही है, उस पर भारत के भीतर ही टैक्स लगे।

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वैश्विक नीतियां बनाम आरबीआई का कड़ा रुख

समिति ने क्रिप्टो को लेकर दुनिया भर में अपनाए जा रहे तीन अलग-अलग मॉडलों का अध्ययन किया:

  • रेगुलेटेड मॉडल: अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे देशों ने वीडीए को विनियमित (रेगुलेट) किया है।
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  • बैन मॉडल: चीन जैसे देशों ने क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
  • मध्यम मार्ग: जापान और ब्राजील जैसे देश बिना किसी सीधे नियामक तंत्र के इसे अपने मौजूदा कानूनों के जरिए नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत में फिलहाल वीडीए से जुड़ा कोई विशेष कानून नहीं है। इसके विपरीत महताब ने यह भी बताया कि देश का केंद्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक, भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के संचालन को अनुमति देने या विनियमित करने के पूरी तरह से खिलाफ है।

टैक्स और नीति का ग्रे एरिया

चर्चा के दौरान समिति के कुछ सदस्यों ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब क्रिप्टोकरेंसी पर कोई स्पष्ट नीति ही नहीं है, तो सरकार इस पर 30 प्रतिशत का टैक्स कैसे वसूल रही है। वर्तमान में भारत में क्रिप्टोकरेंसी की कानूनी वैधता एक 'ग्रे एरिया' में है, लेकिन इसे आयकर और जीएसटी के दायरे में रखा गया है। 

  • 1 अप्रैल 2022 से क्रिप्टो संपत्तियों के लेन-देन पर 30 प्रतिशत आयकर, सेस और सरचार्ज लागू है, जिसे घुड़दौड़ या अन्य सट्टा लेनदेन से होने वाली जीत के समान माना जाता है।
  • वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में एक साल में 10,000 रुपये से अधिक के वर्चुअल करेंसी भुगतान पर 1 प्रतिशत टीडीएस (TDS) का प्रस्ताव किया गया था, जो 1 जुलाई 2022 से लागू हो चुका है।
  • विशेष व्यक्तियों (जिनके खातों का आयकर अधिनियम के तहत ऑडिट जरूरी है) के लिए टीडीएस की यह सीमा 50,000 रुपये तय की गई है। 

संसदीय समिति की इस बैठक से यह साफ हो गया है कि सरकार डिजिटल एसेट्स के आर्थिक प्रभाव को लेकर बेहद सतर्क है। महताब ने बताया कि स्टेकहोल्डर्स के दृष्टिकोण को समझने के बाद समिति इस विषय पर आगे और बैठकें करेगी। विचार-विमर्श की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद, यह पैनल क्रिप्टोकरेंसी पर भविष्य की कार्रवाई को लेकर अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपेगा। इन सिफारिशों के आधार पर ही भारत के भविष्य के क्रिप्टो नियामक ढांचे की दशा और दिशा तय होने की उम्मीद है।

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