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Chandigarh News: 740 करोड़ रुपये का बजट... बिल चाहिए तो मोबाइल दीजिए
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करोड़ों रुपये का बजट होने के बावजूद चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल जीएमएसएच-16 में मरीजों को बिल और जांच रिपोर्ट देने के लिए कागज तक उपलब्ध नहीं है।
पिछले चार दिनों से कागज की कमी के कारण फीस काउंटर पर मरीजों का मोबाइल लेकर उसी में बिल की फोटो खींचकर दी जा रही है। वहीं, जांच रिपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए भी छोटी पर्चियों और मोबाइल फोटो का सहारा लिया जा रहा है। यह स्थिति तब है जब चंडीगढ़ प्रशासन ने वित्त वर्ष 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए करीब 740 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसके बावजूद जीएमएसएच-16 में कागज की आपूर्ति बाधित होने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है।
छोटी पर्ची के सहारे मिल रही जांच रिपोर्ट:कागज की कमी का असर जांच और अन्य दस्तावेजों पर भी पड़ रहा है। मरीजों को छोटी पर्चियों पर जरूरी जानकारी दी जा रही है। कई लोग इन्हें सुरक्षित रखने के लिए मोबाइल से फोटो खींच रहे हैं। जांच रिपोर्ट को लेकर भी समस्या सामने आ रही है। डॉक्टर ओपीडी में जिस छोटे कागज पर जांच लिखकर दे रहे हैं, लैब से उसी कागज पर रिपोर्ट दी जा रही है। खासकर बुजुर्ग मरीजों के लिए यह व्यवस्था परेशानी वाली है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान पहले ही कई स्तरों पर इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी दस्तावेज भी सामान्य तरीके से नहीं मिलना उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है।
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पिछले चार दिनों से कागज की कमी के कारण फीस काउंटर पर मरीजों का मोबाइल लेकर उसी में बिल की फोटो खींचकर दी जा रही है। वहीं, जांच रिपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए भी छोटी पर्चियों और मोबाइल फोटो का सहारा लिया जा रहा है। यह स्थिति तब है जब चंडीगढ़ प्रशासन ने वित्त वर्ष 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए करीब 740 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसके बावजूद जीएमएसएच-16 में कागज की आपूर्ति बाधित होने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है।
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छोटी पर्ची के सहारे मिल रही जांच रिपोर्ट:कागज की कमी का असर जांच और अन्य दस्तावेजों पर भी पड़ रहा है। मरीजों को छोटी पर्चियों पर जरूरी जानकारी दी जा रही है। कई लोग इन्हें सुरक्षित रखने के लिए मोबाइल से फोटो खींच रहे हैं। जांच रिपोर्ट को लेकर भी समस्या सामने आ रही है। डॉक्टर ओपीडी में जिस छोटे कागज पर जांच लिखकर दे रहे हैं, लैब से उसी कागज पर रिपोर्ट दी जा रही है। खासकर बुजुर्ग मरीजों के लिए यह व्यवस्था परेशानी वाली है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान पहले ही कई स्तरों पर इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी दस्तावेज भी सामान्य तरीके से नहीं मिलना उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है।
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