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Chandigarh News: सेक्टर-21 में मकान बेचने के नाम पर 25 लाख की ठगी, पति-पत्नी समेत तीन पर केस
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चंडीगढ़। सेक्टर-21ए में मकान बेचने का झांसा देकर 25 लाख रुपये ठगने के आरोप में यूटी पुलिस ने पति-पत्नी समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि आरोपियों ने न तो संपत्ति अपने नाम से स्थानांतरित की और न ही पीड़ित को दी गई रकम लौटाई। मामले की जांच सेक्टर-19 थाना पुलिस कर रही है और अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सेक्टर-28 निवासी सुभाष चंदर खटाना ने शिकायत में बताया कि विकास बिबरा, उसकी पत्नी इंदरप्रीत बिबरा उर्फ रोजी तथा सेक्टर-20 निवासी हरमोहिंदर सिंह विर्क ने मकान बेचने के नाम पर उनसे 25 लाख रुपये ऐंठ लिए। वर्ष 2024 में वह आवासीय संपत्ति खरीदना चाहते थे। इसी दौरान एक परिचित संपत्ति दलाल ने उन्हें सेक्टर-21ए का मकान दिखाया। फरवरी 2024 में उनकी मुलाकात इंदरप्रीत से कराई गई, जिसने खुद को मकान की मालकिन बताया और वर्ष 2001 से वहां रहने का दावा किया।
पीड़ित के अनुसार, बाद में इंदरप्रीत ने अपने पति विकास बिबरा और हरमोहिंदर सिंह विर्क से मिलवाया। विकास ने भारत के सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय से संबंधित डिक्री और बिक्री समझौते की प्रति दिखाकर भरोसा दिलाया कि उसके पास संपत्ति बेचने का पूरा अधिकार है। सौदा 4 करोड़ 70 लाख रुपये में तय हुआ। पीड़ित ने दो लाख रुपये नकद टोकन राशि दी और बाद में पांच लाख रुपये बैंक के माध्यम से भेजे। सेक्टर-17 स्थित एस्टेट कार्यालय में नोटरीकृत बिक्री समझौता तैयार किया गया और 18 लाख रुपये का चेक भी दिया गया। भूतल के एक हिस्से का कब्जा भी सौंपा गया।
आरोप है कि तीन महीने में नामांतरण का वादा किया गया, लेकिन समय बीतने पर आरोपी टालमटोल करने लगे। जब पीड़ित मौके पर पहुंचा तो दिए गए हिस्से के ताले टूटे मिले। बाद में आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सेक्टर-19 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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सेक्टर-28 निवासी सुभाष चंदर खटाना ने शिकायत में बताया कि विकास बिबरा, उसकी पत्नी इंदरप्रीत बिबरा उर्फ रोजी तथा सेक्टर-20 निवासी हरमोहिंदर सिंह विर्क ने मकान बेचने के नाम पर उनसे 25 लाख रुपये ऐंठ लिए। वर्ष 2024 में वह आवासीय संपत्ति खरीदना चाहते थे। इसी दौरान एक परिचित संपत्ति दलाल ने उन्हें सेक्टर-21ए का मकान दिखाया। फरवरी 2024 में उनकी मुलाकात इंदरप्रीत से कराई गई, जिसने खुद को मकान की मालकिन बताया और वर्ष 2001 से वहां रहने का दावा किया।
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पीड़ित के अनुसार, बाद में इंदरप्रीत ने अपने पति विकास बिबरा और हरमोहिंदर सिंह विर्क से मिलवाया। विकास ने भारत के सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय से संबंधित डिक्री और बिक्री समझौते की प्रति दिखाकर भरोसा दिलाया कि उसके पास संपत्ति बेचने का पूरा अधिकार है। सौदा 4 करोड़ 70 लाख रुपये में तय हुआ। पीड़ित ने दो लाख रुपये नकद टोकन राशि दी और बाद में पांच लाख रुपये बैंक के माध्यम से भेजे। सेक्टर-17 स्थित एस्टेट कार्यालय में नोटरीकृत बिक्री समझौता तैयार किया गया और 18 लाख रुपये का चेक भी दिया गया। भूतल के एक हिस्से का कब्जा भी सौंपा गया।
आरोप है कि तीन महीने में नामांतरण का वादा किया गया, लेकिन समय बीतने पर आरोपी टालमटोल करने लगे। जब पीड़ित मौके पर पहुंचा तो दिए गए हिस्से के ताले टूटे मिले। बाद में आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सेक्टर-19 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।