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Chandigarh News: एक इशारा और जोरदार नृत्य शुरू, स्पेशल बच्चों ने दी शानदार प्रस्तुति
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चंडीगढ़। न बोल सकते हैं, न सुन सकते हैं। लेकिन टैगोर थिएटर के मंच पर उनके पैर ऐसे थिरके जैसे वे बड़े पेशेवर कलाकार हों। ढोल बज रहे हों, गीत चल रहे हों और पैर थिरक रहे हों। जी हां, बात हो रही है सेक्टर 19 के वाटिका स्पेशल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों की।
रविवार को सेक्टर 18 के टैगोर थिएटर में डांस एंड आर्ट रिसर्चर्स सोसाइटी, मोहाली की ओर से डार फोक फेस्टिवल का आयोजन हुआ। इसमें कई लोगों ने अपने जलवे बिखेरे। जब वाटिका स्कूल के स्पेशल बच्चों ने मंच संभाला तो उन्होंने ऐसा रिदम पकड़ा कि लोग आश्चर्यचकित रह गए। प्रस्तुति के उपरांत पूरा टैगोर थिएटर तालियों से गूंज उठा। लोग खड़े होकर तालियां बजाते रहे। यह सब भंगड़ा के कलाकार गुरप्रीत प्लाहा की मेहनत से संभव हो सका।
गुरप्रीत प्लाहा ने बताया कि इन बच्चों को सिखाने में आठ महीने का वक्त लगा। उन्होंने बताया कि बच्चों को समझने में चार महीने लगे और उन्हें रिदम सिखाने में चार महीने लगे। मंच पर बच्चों के बारे में बात करते हुए गुरप्रीत प्लाहा भावुक भी हो गए।
ये बच्चे केवल इशारों की भाषा समझते हैं। वे न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। इसलिए यह काम काफी कठिन था, लेकिन गुरप्रीत प्लाहा ने इसे कर दिखाया। कुल दस बच्चों में छह लड़कियां हैं। ये सातवीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी मां और पत्नी से भी चर्चा की, तब जाकर यह काम शुरू किया। प्लाहा ने कहा कि यह मेरे लिए एक चुनौती थी, लेकिन मैंने इसे स्वीकार किया और बच्चों ने इसे साकार करके दिखा दिया। प्लाहा ने बताया कि वे ब्लाइंड इंस्टीट्यूट के बच्चों से भी भंगड़ा करवा चुके हैं। ब्लाइंड बच्चे देख नहीं सकते, लेकिन सुन तो सकते हैं। ये बच्चे देख तो सकते हैं, लेकिन न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। इसलिए उन्हें हाथ के इशारों का सहारा लेना पड़ा।
स्कूल की प्रिंसिपल कविता सोबती ने कहा कि उन्हें अपने विद्यार्थियों पर गर्व है। उन्होंने अपना जलवा दिखा दिया। डार के चेयरमैन प्रवेश कुमार ने बताया कि इस दौरान नृत्य और संगीत के क्षेत्र के कई नामी लोगों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।
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रविवार को सेक्टर 18 के टैगोर थिएटर में डांस एंड आर्ट रिसर्चर्स सोसाइटी, मोहाली की ओर से डार फोक फेस्टिवल का आयोजन हुआ। इसमें कई लोगों ने अपने जलवे बिखेरे। जब वाटिका स्कूल के स्पेशल बच्चों ने मंच संभाला तो उन्होंने ऐसा रिदम पकड़ा कि लोग आश्चर्यचकित रह गए। प्रस्तुति के उपरांत पूरा टैगोर थिएटर तालियों से गूंज उठा। लोग खड़े होकर तालियां बजाते रहे। यह सब भंगड़ा के कलाकार गुरप्रीत प्लाहा की मेहनत से संभव हो सका।
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गुरप्रीत प्लाहा ने बताया कि इन बच्चों को सिखाने में आठ महीने का वक्त लगा। उन्होंने बताया कि बच्चों को समझने में चार महीने लगे और उन्हें रिदम सिखाने में चार महीने लगे। मंच पर बच्चों के बारे में बात करते हुए गुरप्रीत प्लाहा भावुक भी हो गए।
ये बच्चे केवल इशारों की भाषा समझते हैं। वे न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। इसलिए यह काम काफी कठिन था, लेकिन गुरप्रीत प्लाहा ने इसे कर दिखाया। कुल दस बच्चों में छह लड़कियां हैं। ये सातवीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी मां और पत्नी से भी चर्चा की, तब जाकर यह काम शुरू किया। प्लाहा ने कहा कि यह मेरे लिए एक चुनौती थी, लेकिन मैंने इसे स्वीकार किया और बच्चों ने इसे साकार करके दिखा दिया। प्लाहा ने बताया कि वे ब्लाइंड इंस्टीट्यूट के बच्चों से भी भंगड़ा करवा चुके हैं। ब्लाइंड बच्चे देख नहीं सकते, लेकिन सुन तो सकते हैं। ये बच्चे देख तो सकते हैं, लेकिन न सुन सकते हैं और न बोल सकते हैं। इसलिए उन्हें हाथ के इशारों का सहारा लेना पड़ा।
स्कूल की प्रिंसिपल कविता सोबती ने कहा कि उन्हें अपने विद्यार्थियों पर गर्व है। उन्होंने अपना जलवा दिखा दिया। डार के चेयरमैन प्रवेश कुमार ने बताया कि इस दौरान नृत्य और संगीत के क्षेत्र के कई नामी लोगों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।
