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Chandigarh News: एक मिनट की मुलाकात...रातोंरात दिल्ली तक पहुंच गई बात
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चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सांसद मनीष तिवारी की एक मिनट की बातचीत चर्चा बनी हुई है। पीएम के साथ सांसद तिवारी की ये चर्चा बीते रोज रातोंरात दिल्ली तक पहुंच गई। यही कारण है कि सांसद मनीष तिवारी को शनिवार को सुबह खुलकर सामने आना पड़ा। सांसद मनीष तिवारी ने अपने एक्स पर पीएम के साथ कुछ तस्वीरें साझा की है। इनमें कुछ पुरानी और कुछ पेक में आयोजित कार्यक्रम की है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया चंडीगढ़ दौरे और विकास परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह में अपनी उपस्थिति को लेकर उठे सवालों पर सोशल मीडिया के माध्यम से विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके लिए विकास की आवश्यकता हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर रही है और यही उनके सार्वजनिक जीवन का मूल सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार किसी भी दल की हो, यदि कोई परियोजना जनता के हित में है तो उसका समर्थन करना जनप्रतिनिधि का दायित्व है। मनीष तिवारी ने दोहराया कि लोगों की राय चाहे जो भी हो, वह विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक शालीनता के सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यही उनकी पहचान है और आगे भी वह इसी सोच के साथ सार्वजनिक जीवन में कार्य करते रहेंगे।
पोस्ट में वर्ष 2022 का भी उल्लेख किया
सांसद तिवारी ने अपने पोस्ट में वर्ष 2022 का भी उल्लेख किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यू चंडीगढ़ स्थित डॉ. होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (टाटा मेमोरियल सेंटर) का उद्घाटन किया था। उस समय वह श्री आनंदपुर साहिब से सांसद थे और कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि आज यह अस्पताल पूरे क्षेत्र के हजारों कैंसर मरीजों के लिए जीवनदायिनी संस्था बन चुका है। इससे यह साबित होता है कि विकास परियोजनाओं का महत्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं अधिक होता है। उन्होंने कहा कि 17 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने चंडीगढ़ और उनकी पूर्व संसदीय सीट श्री आनंदपुर साहिब से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसी सोच के तहत उन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया, क्योंकि जनता की सेवा के लिए चुने गए प्रतिनिधियों का पहला दायित्व लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।
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पहले वैचारिक प्रतिद्वंद्वी होते थे, अब दुश्मन बना दिया जाता है
अपने करीब 45 वर्षों के राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि भारतीय राजनीति का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले राजनीतिक विरोधी केवल वैचारिक प्रतिद्वंद्वी होते थे, लेकिन अब उन्हें व्यक्तिगत दुश्मन की तरह देखा जाने लगा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है और दिल्ली आज इस बदलती राजनीतिक संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है। तिवारी ने कहा कि वह आज भी ओल्ड स्कूल पॉलिटिक्स में विश्वास रखते हैं, जहां राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शिष्टाचार, लोकतांत्रिक मर्यादा और प्रोटोकॉल का सम्मान किया जाता है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन विकास के मुद्दों पर सभी दलों को एकजुट होकर जनता के हित में काम करना चाहिए।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया चंडीगढ़ दौरे और विकास परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह में अपनी उपस्थिति को लेकर उठे सवालों पर सोशल मीडिया के माध्यम से विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके लिए विकास की आवश्यकता हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर रही है और यही उनके सार्वजनिक जीवन का मूल सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार किसी भी दल की हो, यदि कोई परियोजना जनता के हित में है तो उसका समर्थन करना जनप्रतिनिधि का दायित्व है। मनीष तिवारी ने दोहराया कि लोगों की राय चाहे जो भी हो, वह विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक शालीनता के सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यही उनकी पहचान है और आगे भी वह इसी सोच के साथ सार्वजनिक जीवन में कार्य करते रहेंगे।
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पोस्ट में वर्ष 2022 का भी उल्लेख किया
सांसद तिवारी ने अपने पोस्ट में वर्ष 2022 का भी उल्लेख किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यू चंडीगढ़ स्थित डॉ. होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (टाटा मेमोरियल सेंटर) का उद्घाटन किया था। उस समय वह श्री आनंदपुर साहिब से सांसद थे और कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि आज यह अस्पताल पूरे क्षेत्र के हजारों कैंसर मरीजों के लिए जीवनदायिनी संस्था बन चुका है। इससे यह साबित होता है कि विकास परियोजनाओं का महत्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं अधिक होता है। उन्होंने कहा कि 17 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने चंडीगढ़ और उनकी पूर्व संसदीय सीट श्री आनंदपुर साहिब से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसी सोच के तहत उन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया, क्योंकि जनता की सेवा के लिए चुने गए प्रतिनिधियों का पहला दायित्व लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।
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पहले वैचारिक प्रतिद्वंद्वी होते थे, अब दुश्मन बना दिया जाता है
अपने करीब 45 वर्षों के राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि भारतीय राजनीति का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले राजनीतिक विरोधी केवल वैचारिक प्रतिद्वंद्वी होते थे, लेकिन अब उन्हें व्यक्तिगत दुश्मन की तरह देखा जाने लगा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है और दिल्ली आज इस बदलती राजनीतिक संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है। तिवारी ने कहा कि वह आज भी ओल्ड स्कूल पॉलिटिक्स में विश्वास रखते हैं, जहां राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शिष्टाचार, लोकतांत्रिक मर्यादा और प्रोटोकॉल का सम्मान किया जाता है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन विकास के मुद्दों पर सभी दलों को एकजुट होकर जनता के हित में काम करना चाहिए।