लोगों को पसंद आ गया स्वीट टेरोरिस्ट: आम आदमी पार्टी के खिलाफ नहीं कामयाब हुआ कोई दांव, हर विवाद से केजरीवाल को फायदा
इस बार प्रचार अभियान की शुरुआत आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने ही चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुफ्त बिजली का एलान करते हुए की थी। इसके जवाब में कांग्रेस और शिअद ने भी अपने प्रचार एजेंडे में मुफ्त बिजली को महत्व देते हुए जनता से नए वादे किए।
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पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की लहर ने साबित कर दिया कि पार्टी को बाहरी और खालिस्तान समर्थक बताकर अलग-थलग करने का विपक्ष का एकजुट प्रयास इस बार बेअसर साबित हुआ है। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन्हीं दो आरोपों के सहारे कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन ने आप के विजय अभियान को रोक दिया था। विपक्षी दलों ने इस हथियार का फिर से इस्तेमाल किया लेकिन इससे आप को नुकसान होने के बजाय फायदा ही हो गया।
सूबे में मतदान से ठीक तीन दिन पहले कांग्रेस की ओर से आप सुप्रीमो केजरीवाल को निशाना बनाते हुए प्रतिबंधित संगठन सिख फार जस्टिस का एक पत्र जारी किया गया, जिसमें संगठन द्वारा आप को समर्थन की बात कही गई थी। इस पत्र के आधार पर कांग्रेस ने केजरीवाल पर खालिस्तान और अलगाववादियों से मिलीभगत का आरोप लगाया।
कवि कुमार विश्वास ने लगाए थे आरोप
इससे एक दिन पहले भाजपा ने कवि कुमार विश्वास के वायरल वीडियो के आधार पर ऐसे ही आरोप केजरीवाल पर लगाए। वीडियो के जरिए केजरीवाल पर आरोप लगाया कि वह खुद पंजाब के या आजाद देश (खालिस्तान) के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। दूसरी ओर, केजरीवाल ने विपक्ष के आरोपों पर कोई पलटवार करने के बजाय खुद को स्वीट टेरोरिस्ट करार दिया, जो जनता के लिए स्कूल बनाता है, अस्पताल बनाता है, मुफ्त बिजली व पानी देता है।
केजरीवाल की इस सीमित प्रतिक्रिया का विपक्ष को कोई लाभ होता, उससे पहले ही पंजाब भाजपा के प्रधान अश्विनी शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह एक जनसभा में यह कहते सुनाई दिए कि जो भी आप को वोट डालेगा वह देश का गद्दार होगा। शर्मा यह भी कहते दिखे कि भाजपा को वोट नहीं डालना तो कांग्रेस को वोट डाल देना लेकिन आप को वोट मत देना। इसी तरह का एक विधिवत बयान शिअद की ओर से जारी हुआ, जिसमें प्रकाश सिंह बादल ने लोगों को पंजाबियत की दुहाई देते हुए आप जैसी बाहरी पार्टी के हाथों में सूबे की कमान न देने की अपील की। आप के प्रति विपक्ष के इस रुख का आम लोगों पर उलटा असर हुआ और कांग्रेस, शिअद, भाजपा के काडर वोट भी खिसककर आप की झोली में चले गए।
इस बार प्रचार अभियान की शुरुआत आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने ही चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुफ्त बिजली का एलान करते हुए की थी। इसके जवाब में कांग्रेस और शिअद ने भी अपने प्रचार एजेंडे में मुफ्त बिजली को महत्व देते हुए जनता से नए वादे किए। लेकिन इस बार आप का अभियान एक मौका आप को जल्दी ही प्रदेश में बदलाव के प्रबल संकेत देने लगा। सूबे में मतदान से तीन दिन पहले तक यह मान लिया गया था कि मुख्य मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच रहेगा और सूबे में आप की सरकार बन सकती है। लेकिन उसके बाद वोटरों की चुप्पी ने सभी सियासी दलों को मतगणना तक उलझन में डाले रखा।