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Chandigarh News: पीजीआई में सस्ते इलाज का दावा, न्यूरो ओपीडी में लिखी जा रहीं महंगी ब्रांडेड दवाएं

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 02:14 AM IST
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Claims of affordable treatment at PGI; expensive branded medicines being prescribed at the Neuro OPD
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चंडीगढ़। देशभर से हजारों मरीज सस्ते और बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पीजीआई पहुंचते हैं लेकिन एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओपीडी में दवाओं को लेकर मरीजों के सवाल बढ़ते जा रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि जहां इमरजेंसी विभाग में उन्हें जेनेरिक सॉल्ट के आधार पर दवाएं लिखी जाती हैं, वहीं ओपीडी में कई मामलों में सीधे ब्रांडेड दवाएं लिखी जा रही हैं। उनका कहना है कि इससे इलाज का खर्च बढ़ रहा है और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

मरीजों के अनुसार इमरजेंसी में दी गई पर्चियों और ओपीडी में लिखी गई दवाओं में साफ अंतर दिखाई देता है। कई मरीजों का दावा है कि कुछ ब्रांडेड दवाएं शहर के सेक्टर-11 की दवा बाजार की चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। मरीजों का कहना है कि आखिर एक ही संस्थान में दवा लिखने की अलग-अलग व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है। हालांकि इस संबंध में संस्थान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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मरीजों की सुविधा के लिए एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर और गोल मार्केट स्थित अमृत फार्मेसी व जन औषधि केंद्र के बीच सीधा मार्ग बनाया गया है ताकि मरीज आसानी से सस्ती जेनेरिक दवाएं प्राप्त कर सकें लेकिन मरीजों का कहना है कि जब पर्ची पर जेनेरिक सॉल्ट के बजाय किसी विशेष ब्रांड का नाम लिखा जाता है तो उन्हें इस सुविधा का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
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गरीब मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और बिहार समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज पीजीआई पहुंचते हैं। अधिकांश मरीज निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में महंगी दवाओं की पर्चियां उनकी परेशानी बढ़ा रही हैं। बिहार से आए दीपक कुमार ने कहा कि हम सरकारी संस्थान में सस्ता इलाज मिलने की उम्मीद से आए थे, लेकिन बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कुछ दवाएं केवल एक-दो दुकानों पर ही उपलब्ध हैं।
2023 में जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने के लिए जारी हुए थे निर्देश
केंद्र सरकार के निर्देश पर वर्ष 2023 में पीजीआई परिसर में जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने के लिए कई स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाए गए थे। इनमें साफ लिखा था कि कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल प्रतिनिधि सीधे मरीजों से संपर्क नहीं करेगा। मरीजों की सहायता के लिए 98768-86810 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया था। इसके अलावा ओपीडी के दौरान मेडिकल प्रतिनिधियों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। मरीजों का कहना है कि मौजूदा समय में इन आदेशों का कोई मतलब नहीं बचा।

मरीज बोले
पीजीआई में इसलिए आए थे कि इलाज का खर्च कम होगा, लेकिन कई दवाएं बाहर से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं। -संदीप कुमार, हरियाणा
इमरजेंसी में सॉल्ट के नाम पर दवा लिखी गई, जबकि ओपीडी में ब्रांड नेम लिखा गया। एक ही संस्थान में दो अलग व्यवस्था समझ से परे है। -योगिता सिंह, हरिद्वार

पीजीआई का पक्ष
हम हमेशा मरीजों को अमृत फार्मेसी के बारे में जानकारी देते हैं। हमारे लगभग 90 प्रतिशत मरीज अपनी दवाएं अमृत फार्मेसी से ही प्राप्त करते हैं। -पीजीआई प्रवक्ता
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