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Punjab: 'मुझे मूसेवाला की तरह गोली मरवा दो... पर चुप नहीं रहूंगा', सुरक्षा कम करने पर मजीठिया को मिला ये जवाब
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 03 Apr 2025 01:15 PM IST
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सार
सुरक्षा कम करने के सवाल पर शिअद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि मुझे मूसेवाला की तरह गोली मरवा दो... पर चुप नहीं रहूंगा। इस पर पंजाब पुलिस ने कहा कि सुरक्षा वापस नहीं ली, सिर्फ कम की है।
बिक्रम मजीठिया
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की जेड प्लस सुरक्षा कम करने का मामला गरमा गया है। मजीठिया ने इसके विरोध में कहा कि मुझे पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की तरह गोली मरवा दो, लेकिन मैं चुप नहीं बैठूंगा। सरकार का विरोध करना जारी रखूंगा। मेरी हत्या करवा दो या फिर सुखबीर बादल की तरह हमला करवा दो, लेकिन मैं पंजाब के मुद्दे उठाता रहूंगा।
वहीं, पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा वापस नहीं ली गई है, सिर्फ कम की गई है। मजीठिया के पास पर्याप्त सुरक्षा है, जिसमें एस्कॉर्ट वाहन और पर्याप्त संख्या में बंदूकधारी शामिल हैं। कांग्रेस व भाजपा ने सुरक्षा कम करने पर आपत्ति जताई है। वहीं, शिअद के पूर्व प्रधान सुखबीर सिंह बादल बुधवार को मजीठिया से मिलने उनके आवास पर भी पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा कम करने पर सवाल उठाए।
यह भी पढ़ें: कर्नल से मारपीट मामला: हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की SIT कैंसिल की, अब चंडीगढ़ पुलिस करेगी जांच
इससे पहले मजीठिया ने बताया कि शनिवार की रात को उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई, लेकिन विरोध के बाद अब सरकार सफाई दे रही है कि सुरक्षा सिर्फ कम की गई है। आज तीन साल बाद सरकार को मेरी सुरक्षा की समीक्षा करने की याद आई है।
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक बिभव कुमार को जेड प्लस सुरक्षा दी गई है। उन पर पार्टी की एक सांसद से छेड़छाड़ का आरोप है। इसी तरह दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी सुरक्षा दी गई, जिनका नाम शराब घोटाले में आया।
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वहीं, पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा वापस नहीं ली गई है, सिर्फ कम की गई है। मजीठिया के पास पर्याप्त सुरक्षा है, जिसमें एस्कॉर्ट वाहन और पर्याप्त संख्या में बंदूकधारी शामिल हैं। कांग्रेस व भाजपा ने सुरक्षा कम करने पर आपत्ति जताई है। वहीं, शिअद के पूर्व प्रधान सुखबीर सिंह बादल बुधवार को मजीठिया से मिलने उनके आवास पर भी पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा कम करने पर सवाल उठाए।
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इससे पहले मजीठिया ने बताया कि शनिवार की रात को उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई, लेकिन विरोध के बाद अब सरकार सफाई दे रही है कि सुरक्षा सिर्फ कम की गई है। आज तीन साल बाद सरकार को मेरी सुरक्षा की समीक्षा करने की याद आई है।
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक बिभव कुमार को जेड प्लस सुरक्षा दी गई है। उन पर पार्टी की एक सांसद से छेड़छाड़ का आरोप है। इसी तरह दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी सुरक्षा दी गई, जिनका नाम शराब घोटाले में आया।
यहां तक कि दोनों को जेल भी जाना पड़ा। इसी तरह मजीठिया ने विजय नायर को भी सुरक्षा देने पर सवाल उठाए हैं और इस संबंध में आप पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा से जवाब मांगा है। मजीठिया ने कहा कि सुरक्षा को लेकर सरकार लिखित स्पष्टीकरण जारी करे कि मुझे इसकी जरूरत नहीं है।
'मेरे आवास से सुरक्षा गार्ड को हटा दिया गया'
एक महीने पहले एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने अमृतसर में उनके आवास का दौरा कर उनसे किसी भी बम, ग्रेनेड के हमले से बचने के लिए अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाने व अन्य सुरक्षात्मक कदम उठाने के सुझाव दिया था।
अब अचानक मेरे के लिए खतरा कैसे कम हो गया। मेरे आवास से सुरक्षा गार्ड को हटा दिया गया। एआईजी मनबीर सिंह ने उनके सुरक्षा इंचार्ज चरनजीत सिंह से मिलने से इन्कार कर दिया। इससे साफ है कि यह फैसला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है।
एक महीने पहले एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने अमृतसर में उनके आवास का दौरा कर उनसे किसी भी बम, ग्रेनेड के हमले से बचने के लिए अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाने व अन्य सुरक्षात्मक कदम उठाने के सुझाव दिया था।
अब अचानक मेरे के लिए खतरा कैसे कम हो गया। मेरे आवास से सुरक्षा गार्ड को हटा दिया गया। एआईजी मनबीर सिंह ने उनके सुरक्षा इंचार्ज चरनजीत सिंह से मिलने से इन्कार कर दिया। इससे साफ है कि यह फैसला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है।
मान के खिलाफ बोल रहे मजीठिया, इसलिए बनाया निशाना: सुखबीर
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि मजीठिया सीएम मान के खिलाफ बोल रहे हैं और सिर्फ इसलिए उनको निशाना बनाया गया है। मजीठिया की सुरक्षा कम करके एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है। अकाली दल की लीडरशिप को खत्म करने की साजिश के खिलाफ वह डटकर मुकाबला करेंगे। मजीठिया के सुरक्षा इंचार्ज को सूचित किए बिना ऐसा किया गया। शिअद खुद मजीठिया की रक्षा करेगा। मुझ पर अटैक में कमजोर केस तैयार किया गया, जिस कारण आज आरोपी खुलेआम घूम रहा है।
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि मजीठिया सीएम मान के खिलाफ बोल रहे हैं और सिर्फ इसलिए उनको निशाना बनाया गया है। मजीठिया की सुरक्षा कम करके एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है। अकाली दल की लीडरशिप को खत्म करने की साजिश के खिलाफ वह डटकर मुकाबला करेंगे। मजीठिया के सुरक्षा इंचार्ज को सूचित किए बिना ऐसा किया गया। शिअद खुद मजीठिया की रक्षा करेगा। मुझ पर अटैक में कमजोर केस तैयार किया गया, जिस कारण आज आरोपी खुलेआम घूम रहा है।
शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा वापस नहीं ली गई, बल्कि सिर्फ कम की गई है। सुरक्षा समीक्षा समिति की नई सिफारिशों के बाद ये बदलाव किए गए हैं। किसी भी प्रमुख व्यक्ति की सुरक्षा की समय-समय पर संभावित खतरे के मूल्यांकन के आधार पर समीक्षा की जाती है। इस आधार पर, सुरक्षा कवच को बढ़ाया या घटाया जाता है। सुरक्षा के लिहाज से ऐसे फैसले आम बात हैं और यह महज संभावित खतरों की रिपोर्टों के आधार पर लिए जाते हैं।-अर्पित शुक्ला, स्पेशल डीजीपी, लॉ एंड ऑर्डर।
ड्रग्स केस में मजीठिया के खिलाफ चार्जशीट पेश करना आसान नहीं
पूर्व राजस्व मंत्री बिक्रम मजीठिया के खिलाफ ड्रग्स केस में पांचवीं एसआईटी बन चुकी है। नई एसआईटी का मजीठिया के खिलाफ जांच पूरी कर चालान पेश करना मुख्य फोकस होगा, लेकिन इसमें भारी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ेगा। मजीठिया के खिलाफ चार्जशीट पेश करना आसान नहीं है।
अभी तक मजीठिया के खिलाफ सीनियर अधिकारी ही जांच टीम के प्रमुख रहे हैं। अब जूनियर अधिकारी को एसआईटी की कमान दी गई है। मजीठिया के खिलाफ 20 दिसंबर, 2021 को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पूर्व राजस्व मंत्री बिक्रम मजीठिया के खिलाफ ड्रग्स केस में पांचवीं एसआईटी बन चुकी है। नई एसआईटी का मजीठिया के खिलाफ जांच पूरी कर चालान पेश करना मुख्य फोकस होगा, लेकिन इसमें भारी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ेगा। मजीठिया के खिलाफ चार्जशीट पेश करना आसान नहीं है।
अभी तक मजीठिया के खिलाफ सीनियर अधिकारी ही जांच टीम के प्रमुख रहे हैं। अब जूनियर अधिकारी को एसआईटी की कमान दी गई है। मजीठिया के खिलाफ 20 दिसंबर, 2021 को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
तत्कालीन चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने जांच के लिए एआईजी बलराज सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित की थी, जो केस में ज्यादा गवाह व सबूत जुटा नहीं पाई। मई, 2023 में आईजी पटियाला मुखविंदर सिंह छीना को डीआईजी राहुल एस के स्थान पर एसआईटी प्रमुख बनाया गया, जिसमें तत्कालीन एआईजी रैंक के अधिकारी रंजीत सिंह ढिल्लों, रघबीर सिंह (डीएसपी, एसटीएफ, रूपनगर) और अमरप्रीत सिंह (डीएसपी, खरड़-2) शामिल थे, जबकि आईजी गुरशरण सिंह संधू को जांच टीम की प्रगति की निगरानी करने के लिए कहा गया था। जब छीना को अतिरिक्त डीजीपी के पद पर पदोन्नत किया गया, तो उन्होंने दिसंबर 2024 में अपनी सेवानिवृत्ति तक एसआईटी प्रमुख के रूप में मजीठिया मामले की जांच जारी रखी।
सात माह बाद छीन रिटायर हो गए। जनवरी, 2024 में हरचरण सिंह भुल्लर को एसआईटी प्रमुख बनाया गया। तीन सदस्यीय एसआईटी में तत्कालीन पटियाला एसएसपी वरुण शर्मा और धुरी एसपी योगेश शर्मा सदस्य थे। टीम ने आखिरी बार मार्च में मजीठिया से दो दिन तक रोजाना आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को उनके खिलाफ ड्रग्स मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।
इस केस में उछला था बिक्रम मजीठिया का नाम
एचएस भुल्लर को अब बदला गया है। दरअसल, जांच के लिए एसआईटी को सत्ता, पिंदी व लाडी के बयान व उनके द्वारा इस्तेमाल किए मोबाइल और उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट, टावर लोकेशन, मोइबाल कॉल्स डिटेल को आधार बनाना था, लेकिन एसआईटी इसे जांच में शामिल करने में विफल रही। सत्ता व पिंदी कनाडा निवासी हैं। इनके माध्यम से ही बिक्रम मजीठिया का नाम इस केस में उछला था। सूत्रों के मुताबिक, मामला 2013 का है और एसटीएफ के पूर्व चीफ हरप्रीत सिद्धू ने 2018 में अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की और दिसंबर 2021 में केस दर्ज किया गया। अब 2025 साल चल रहा है और इस केस में चार्जशीट पेश नहीं हुई है, जिससे केस लटक सकता है और अदालत में बचाव पक्ष इसे आधार बना सकता है।
एचएस भुल्लर को अब बदला गया है। दरअसल, जांच के लिए एसआईटी को सत्ता, पिंदी व लाडी के बयान व उनके द्वारा इस्तेमाल किए मोबाइल और उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट, टावर लोकेशन, मोइबाल कॉल्स डिटेल को आधार बनाना था, लेकिन एसआईटी इसे जांच में शामिल करने में विफल रही। सत्ता व पिंदी कनाडा निवासी हैं। इनके माध्यम से ही बिक्रम मजीठिया का नाम इस केस में उछला था। सूत्रों के मुताबिक, मामला 2013 का है और एसटीएफ के पूर्व चीफ हरप्रीत सिद्धू ने 2018 में अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की और दिसंबर 2021 में केस दर्ज किया गया। अब 2025 साल चल रहा है और इस केस में चार्जशीट पेश नहीं हुई है, जिससे केस लटक सकता है और अदालत में बचाव पक्ष इसे आधार बना सकता है।
अकाली दल पर संकट गहराएगा
मजीठिया के खिलाफ नई एसआईटी अगर जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट पेश करने में कामयाब हो जाती है, तो अकाली दल बादल के लिए बड़ा झटका होगा। विरोधियों को मुद्दा मिलेगा, जिससे अकाली दल बैकफुट पर आ सकता है। वहीं, माझा में विरसा सिंह वल्टोहा के अकाली दल से चले जाने के बाद बिक्रम ही ऐसे नेता हैं, जो अकाली दल के कद्दावर नेता हैं। उनसे पहले आदेश प्रताप कैरों को पार्टी से निकाला जा चुका है। माझा पंथक वोट का केंद्र है और अकाली दल को बड़ा नुकसान होना तय है।
मजीठिया के खिलाफ नई एसआईटी अगर जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट पेश करने में कामयाब हो जाती है, तो अकाली दल बादल के लिए बड़ा झटका होगा। विरोधियों को मुद्दा मिलेगा, जिससे अकाली दल बैकफुट पर आ सकता है। वहीं, माझा में विरसा सिंह वल्टोहा के अकाली दल से चले जाने के बाद बिक्रम ही ऐसे नेता हैं, जो अकाली दल के कद्दावर नेता हैं। उनसे पहले आदेश प्रताप कैरों को पार्टी से निकाला जा चुका है। माझा पंथक वोट का केंद्र है और अकाली दल को बड़ा नुकसान होना तय है।