ओना चिर पाणी छड्डो, तुपका नी देंगे...पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के 26 दिन बाद रिलीज उनके इस गाने पर हरियाणा के कलाकारों ने नाराजगी जताई है। एसवाईएल का पानी हरियाणा को नहीं देने वाले शब्दों का विरोध करते हुए हरियाणवी कलाकार गजेंद्र फौगाट ने इस गाने की काट में नया गाना बनाने की घोषणा की है। वहीं, केडी ने कहा कि यह गाना परिजनों और मूसेवाला की टीम को रिलीज नहीं करना चाहिए था। ऐसे गानों से दोनों प्रदेश का भाईचारा बिगड़ता है। प्रदेशवासी भी सोशल मीडिया पर गाने के विरोध कर रहे हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर विजेन्द्र सिंह का कहना है कि कंफ्यूजन की वजह से लोग गाने के बोल सही तरह से समझ नहीं पा रहे हैं। विजेन्द्र का कहना है कि गाने से उन्हीं लोगों को जलन हो रही है जिनको किसानों में आतंकवाद दिखता था।
2 of 6
सिद्धू मूसेवाला का नया गीत रिलीज।
- फोटो : twitter
कलाकारों की प्रतिक्रिया: मुख्यमंत्री के प्रचार ओएसडी गजेंद्र फौगाट का कहना है कि वे सिद्धू मूसेवाला के फैन हैं लेकिन उनके इस गाने से सहमत नहीं हैं। इसी प्रकार हरियाणवी गायक केडी ने मूसेवाला की हत्या की निंदा की है लेकिन उनके एसवाईएल पर उनके गाने का विरोध किया है। केडी ने कहा कि एसवाईएल का पानी न तो कलाकारों ने रोक रखा है और न ही वह दे सकते हैं। पंजाब को बड़ा भाई कहते हुए केडी ने कहा कि छोटे भाई का हक कैसे रख सकता है।
3 of 6
सिद्धू मूसेवाला
- फोटो : इंस्टाग्राम: sidhu_moosewala
मुक्केबाज विजेन्द्र सिंह की यह दलील: ओना चिर पाणी छड्डो, तुपका नहीं देंदे को लेकर लोगों में भ्रम है कि पानी की एक बूंद किसको नहीं देने की कही है। सानू साड्डा पिछोकड़ अते साड्डा लाणा दे देयो। चंडीगढ़, हिमाचल अते हरियाणा दे देयो, को ध्यान से समझें कि शुरुआत में ही परिवार एक करने की बात कही जा रही है।
4 of 6
सिद्धू मूसेवाला
- फोटो : इंस्टाग्राम: sidhu_moosewala
अगली लाइन में ही अंग्रेजी शब्द सोवेरिएनिटी का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब है कि हमारा परिवार (राज्य) एक कर दो और संप्रभुता दे दो। क्यों पग्गां नाल खहन्दा फिरदां, टोपी वालेया इस लाइन को भी समझने की जरूरत है। पग्ग (पगड़ी) को सिर्फ सिखी से जोड़कर मत देखा जाना चाहिए। हरियाणा और राजस्थान में भी पगड़ी को बहुत अहम माना जाता है। टोपी वाले नेता उनको कहा गया है जो लोगों को आपस में लड़वाते हैं।
5 of 6
सिद्धू मूसेवाला
- फोटो : twitter
यह है एसवाईएल विवाद
पंजाब से अलग होकर हरियाणा राज्य के गठन के समय ही एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक नहर) के पानी को लेकर विवाद शुरू हो गया था। एसवाईएल निर्माण को लेकर पंजाब की आनाकानी पर 1979 में हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में पंजाब को निर्देश दिया कि एक वर्ष में एसवाईएल का निर्माण करवाए या कार्य केंद्र के हवाले किया जाए।