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निर्यात में छलांग: ऑटोमोबाइल से बासमती तक वैश्विक बाजार में हरियाणा की दमदार मौजूदगी, टेक्सटाइल में भी अव्वल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 16 Feb 2026 02:45 PM IST
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सार
ऑटोमोबाइल से बासमती तक वैश्विक बाजार में हरियाणा की दमदार मौजूदगी दर्ज हुई है। नीति आयोग की 2023-24 की रिपोर्ट में निर्यात करने वाले शीर्ष राज्यों हरियाणा शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा कृषि से आगे बढ़कर एक मजबूत औद्योगिक और निर्यात केंद्र बन चुका है। ऑटोमोबाइल, चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में उसकी पकड़ मजबूत है।
Haryana Export
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नीति आयोग की 2023-24 की रिपोर्ट में हरियाणा ने खुद को देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में मजबूती से स्थापित किया है। राज्य न केवल पारंपरिक कृषि उत्पादों में आगे है बल्कि ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 1.48 लाख करोड़ रुपये रहा है। राज्य का समग्र स्कोर 55.01 रहा और रैंकिंग में हरियाणा शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका 23.35 फीसदी निर्यात के साथ हरियाणा का सबसे बड़ा बाजार है।
अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ) में कमी करने से हरियाणा को सीधा लाभ मिलेगा। सबसे ज्यादा फायदा ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, बासमती चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी सेक्टर को होगा। कम टैरिफ का मतलब है कि भारतीय उत्पाद वहां सस्ते पड़ेंगे जिससे मांग बढ़ेगी और ऑर्डर ज्यादा मिलेंगे।
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वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 1.48 लाख करोड़ रुपये रहा है। राज्य का समग्र स्कोर 55.01 रहा और रैंकिंग में हरियाणा शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका 23.35 फीसदी निर्यात के साथ हरियाणा का सबसे बड़ा बाजार है।
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अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ) में कमी करने से हरियाणा को सीधा लाभ मिलेगा। सबसे ज्यादा फायदा ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, बासमती चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी सेक्टर को होगा। कम टैरिफ का मतलब है कि भारतीय उत्पाद वहां सस्ते पड़ेंगे जिससे मांग बढ़ेगी और ऑर्डर ज्यादा मिलेंगे।
इससे राज्य की कंपनियों का उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विदेशी मुद्रा आय में इजाफा होगा। साथ ही प्रदेश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी और निर्यात लक्ष्य हासिल करना आसान होगा।
ऑटोमोबाइल, चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में पकड़ मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा कृषि से आगे बढ़कर एक मजबूत औद्योगिक और निर्यात केंद्र बन चुका है। ऑटोमोबाइल, चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में उसकी पकड़ मजबूत है। साथ ही नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा कृषि से आगे बढ़कर एक मजबूत औद्योगिक और निर्यात केंद्र बन चुका है। ऑटोमोबाइल, चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में उसकी पकड़ मजबूत है। साथ ही नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
ऑटोमोबाइल के साथ चावल, टेक्सटाइल निर्यात में अव्वल
राज्य के निर्यात की सबसे बड़ी ताकत ऑटोमोबाइल सेक्टर है। देश के 60 फीसदी से अधिक यात्री वाहनों का उत्पादन हरियाणा में होता है। गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी वाहन कंपनियों के कारखाने हैं। मोटर कार, मोटर वाहन के पुर्जे, मोटरसाइकिल और साइकिल राज्य के प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं।
राज्य के निर्यात की सबसे बड़ी ताकत ऑटोमोबाइल सेक्टर है। देश के 60 फीसदी से अधिक यात्री वाहनों का उत्पादन हरियाणा में होता है। गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी वाहन कंपनियों के कारखाने हैं। मोटर कार, मोटर वाहन के पुर्जे, मोटरसाइकिल और साइकिल राज्य के प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं।
इसी तरह चावल भी हरियाणा के निर्यात की मजबूत कड़ी है। खासकर बासमती और मिल्ड राइस की विदेश में बड़ी मांग है। करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल जिले चावल उत्पादन और प्रोसेसिंग के बड़े केंद्र हैं।
इसके अलावा ज्वेलरी, खासकर कीमती धातुओं से बने आभूषण भी निर्यात में अहम भूमिका निभाते हैं। टेक्सटाइल सेक्टर में पानीपत का नाम प्रमुख है। यहां कालीन, दरी और अन्य घरेलू वस्त्र बड़े पैमाने पर तैयार किए जाते हैं। महिलाओं के सूती और सिंथेटिक परिधान भी निर्यात सूची में शामिल हैं।
उभरते क्षेत्र और नई संभावनाएं
रिपोर्ट में बताया गया है कि हरियाणा पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रहा है। टर्बो जेट और एयरोस्पेस से जुड़े उपकरणों का निर्यात राज्य की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्र आने वाले समय में निर्यात को और बढ़ा सकते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हरियाणा पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रहा है। टर्बो जेट और एयरोस्पेस से जुड़े उपकरणों का निर्यात राज्य की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्र आने वाले समय में निर्यात को और बढ़ा सकते हैं।
राज्य में 30 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र और विशेष आर्थिक जोन हैं। यहां बेहतर सड़क और रेल संपर्क, एयर कार्गो टर्मिनल और कंटेनर डिपो जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो निर्यात को आसान बनाती हैं।
कृषि के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र बने आर्थिक ताकत और आधार
हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2023-24 में लगभग 10.9 लाख करोड़ रुपये रहा और इसमें लगभग 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। कृषि अब भी राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और लगभग 15 फीसदी योगदान देती है। लेकिन अब उद्योग और सेवा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2023-24 में लगभग 10.9 लाख करोड़ रुपये रहा और इसमें लगभग 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। कृषि अब भी राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और लगभग 15 फीसदी योगदान देती है। लेकिन अब उद्योग और सेवा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
राज्य की भौगोलिक स्थिति भी बड़ी ताकत है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नजदीक होने से यहां उद्योगों को बड़ा बाजार और बेहतर संपर्क मिलता है। गुरुग्राम अंतरराष्ट्रीय आईटी और वित्तीय केंद्र के रूप में उभरा है।
निर्यात दो लाख करोड़ के पार पहुंचाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने 2020 में निर्यात प्रोत्साहन नीति लागू की थी। इसका लक्ष्य 2025 तक निर्यात को 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसके तहत औद्योगिक पार्क, निर्यात सुविधा केंद्र, लॉजिस्टिक सहायता और बाजार विकास योजनाएं शुरू की गईं। 2024 तक राज्य का निर्यात 1.5 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है।
राज्य सरकार ने 2020 में निर्यात प्रोत्साहन नीति लागू की थी। इसका लक्ष्य 2025 तक निर्यात को 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसके तहत औद्योगिक पार्क, निर्यात सुविधा केंद्र, लॉजिस्टिक सहायता और बाजार विकास योजनाएं शुरू की गईं। 2024 तक राज्य का निर्यात 1.5 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है।
चुनौतियां भी मौजूद
रिपोर्ट में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का कम उपयोग, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कुछ क्षेत्रों में सीमित विविधीकरण जैसी चुनौतियां हैं। अगर इन क्षेत्रों में सुधार होता है तो हरियाणा और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
रिपोर्ट में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का कम उपयोग, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कुछ क्षेत्रों में सीमित विविधीकरण जैसी चुनौतियां हैं। अगर इन क्षेत्रों में सुधार होता है तो हरियाणा और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
इन जिलों का दबदबा
ऑटोमोबाइल - गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद, सोनीपत
चावल- करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल
टेक्सटाइल - पानीपत
इंजीनियरिंग व स्टील- हिसार, फरीदाबाद
ऑटोमोबाइल - गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद, सोनीपत
चावल- करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल
टेक्सटाइल - पानीपत
इंजीनियरिंग व स्टील- हिसार, फरीदाबाद
विदेश में हरियाणा का निर्यात (फीसदी में)
| देश | प्रतिशत (%) |
|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका | 23.35 |
| सऊदी अरब | 6.62 |
| संयुक्त अरब अमीरात | 6.45 |
| यूनाइटेड किंगडम | 4.72 |
| इराक | 4.09 |