Punjab Election Result Live: आप ने 92 सीट जीत रचा इतिहास, झूम उठे कार्यकर्ता, केजरीवाल बोले-पंजाबियों ने दिल जीत लिया
आम आदमी पार्टी की जीत पर आप संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान के साथ एक फोटो शेयर कर अपनी खुशी जताई।
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सभी पूर्वानुमानों को ध्वस्त करते हुए आम आदमी पार्टी ने पंजाब में 92 सीट जीत कर इतिहास रच दिया। आप की आंधी ने बड़े-बड़े दिग्गज धराशाही कर दिए। आम आदमी का झाडू़ ऐसा चला कि सूबे की 117 सीटों में से 92 पर पार्टी का परचम लहरा गया। पंजाब के इतिहास में अब तक की ये सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले किसी दल को अकेले इतना बहुमत नहीं मिला। अकाली दल ने मिलकर 1997 में 75 सीटें जीती थीं और 2017 में कांग्रेस ने 77 सीट जीत कर रिकार्ड बनाया था।
आम आदमी पार्टी का जादू पंजाब में ऐसा चला कि सारे अनुमान धरे रह गए। प्रदेश की सियासत के नामी चेहरे जीत के लिए तरस गए। मुख्यमंत्री चरण जीत सिंह चन्नी और वित्त मंत्री मनप्रीत बादल तक अपनी सीट नहीं बचा सके। इसके अलावा पंजाब लोक कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह, पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल, कांग्रेस प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, शिअद प्रधान सुखबीर बादल, पूर्व मंत्री शिअद नेता बिक्रम जीत सिंह मजीठिया भी अपना किला नहीं बचा पाए।
आप की जीत का सबसे बड़ा कारण एकतरफा वोटिंग रही। नशा, माइनिंग, शराब, केबल और ट्रांसपेार्ट माफिया के खिलाफ जनता ने अपना जनादेश दिया। डेरा और पंथ के नाम पर वोट मांगने वाले राजनीतिक दलों को जनता ने किनारे कर दिया। किसान आंदोलन के बाद से केंद्र सरकार से खफा पंजाब की जनता ने जी खोल कर आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोटिंग की। पिछली गलतियों को न दोहराते हुए पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने किसी सधे हुए राजनीतिज्ञ की तरह यह चुनाव लड़ा। यहां तक कि कुमार विश्वास के खालिस्तान अटैक को भी वे हंसते हुए झेल गए।
पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 20 सीटें हासिल की थीं। पंजाब में मजबूत विपक्ष था लेकिन धीरे-धीरे विपक्ष कम होता गया और दस सीटों पर सिमट गया। पार्टी ने नई रणनीति बनाई और दिल्ली मॉडल को पंजाब की जनता के सामने प्रभावी ढंग से पेश किया। पार्टी ने मौजूदा विधायकों के साथ नए चेहरों पर दांव खेला और पंजाब की सियासत का रुख मोड़ दिया।
अश्विनी शर्मा और कालिया ने लाज बचाई
भाजपा के लिए राहत की बात है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा और वरिष्ठ नेता मनोरंजन कालिया चुनाव जीत गए हैं। अश्विनी शर्मा पार्टी के टिकट पर पठानकोट और कालिया मुकेरियां से चुनाव लड़े थे। भाजपा को यह अंदेशा था कि अकालियों से गठबंधन तोड़ने और कैप्टन के सहारे पंजाब की सियासत में बढ़त बनाने का मौका मिलेगा, लेकिन बात बन नहीं पाई।
कांग्रेस की आपसी कलह ने किया बंटाधार
विधानसभा चुनाव में पंजाब कांग्रेस की आपसी कलह ने पार्टी का बंटाधार कर दिया। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को आपसी लड़ाई से ही फुर्सत नहीं मिली। सिद्धू की मुख्यमंत्री पद की लालसा के कारण चन्नी से शुरुआती दौर से विवाद रहा। चुनाव के अंतिम दिनों तक भी आलाकमान इस विवाद को सुलझा नहीं पाया।
कैप्टन और बादल को संन्यास के समय मिली हार
पंजाब की सियासत में प्रकाश सिंह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए यह चुनाव बहुत अहम था। दोनों नेता बड़े नेता हैं और यह चुनाव इनका अंतिम चुनाव माना जा रहा था। राजनीति से संन्यास के तौर पर इस चुनाव को देखा जा रहा था, लेकिन संन्यास के समय दोनों के खाते में हार लिखी गई।
आप की झोली में आए पंजाब के 42 फीसदी वोट
चंडीगढ़। पंजाब में शाम 4 बजे तक के रुझान देखें तो आम आदमी पार्टी ने 42.06 फीसदी वोट हासिल कर लिए हैं। जबकि कांग्रेस 22.94 फीसदी वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। शिअद को 18.34 फीसदी वोट हासिल हुए हैं। भाजपा का वोट शेयर 6.59 फीसदी, बसपा का 1.78 फीसदी, सीपीआई का 0.05 फीसदी और सपा का 0.03 फीसदी रहा है।