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Highcourt: बच्ची से दुष्कर्म-हत्या मामले में हाईकोर्ट ने पलटी मौत की सजा, पांच साल पहले झज्जर में हुआ था कांड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 21 Jan 2026 09:38 AM IST
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सार
हाईकोर्ट ने पाया कि अभियुक्त का बयान जिस तरीके से दर्ज किया गया वह कानूनन दोषपूर्ण था। महत्वपूर्ण साक्ष्य जैसे डीएनए रिपोर्ट, बच्ची के माता-पिता के बयान और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट अभियुक्त के समक्ष स्पष्टीकरण के लिए रखे ही नहीं गए।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झज्जर में वर्ष 2020 में पांच वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के जघन्य मामले में 27 वर्षीय आरोपी को सुनाई गई मौत की सजा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला ट्रायल के दौरान हुई गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियों के आधार पर सुनाया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध चाहे कितना ही गंभीर क्यों न हो, न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने डेथ रेफरेंस और अभियुक्त की अपील पर एक साथ सुनवाई करते हुए सत्र अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई व नए निर्णय के लिए ट्रायल कोर्ट को वापस भेज दिया।
हाईकोर्ट ने पाया कि अभियुक्त का बयान जिस तरीके से दर्ज किया गया वह कानूनन दोषपूर्ण था। महत्वपूर्ण साक्ष्य जैसे डीएनए रिपोर्ट, बच्ची के माता-पिता के बयान और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट अभियुक्त के समक्ष स्पष्टीकरण के लिए रखे ही नहीं गए। इसके अलावा प्रश्न लंबे और संयुक्त रूप में पूछे गए जिनमें कई तथ्यों को एक साथ जोड़ दिया गया, जिससे अभियुक्त को प्रत्येक आरोप पर अलग-अलग उत्तर देने का वास्तविक अवसर नहीं मिला।
मामले के अनुसार, 20-21 दिसंबर 2020 की रात बच्ची के जन्मदिन के दौरान उसका अपहरण किया गया था। आरोप था कि प्लंबर आरोपी नशे की हालत में बच्ची को उसके किराये के मकान से उठा ले गया।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध चाहे कितना ही गंभीर क्यों न हो, न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने डेथ रेफरेंस और अभियुक्त की अपील पर एक साथ सुनवाई करते हुए सत्र अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई व नए निर्णय के लिए ट्रायल कोर्ट को वापस भेज दिया।
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हाईकोर्ट ने पाया कि अभियुक्त का बयान जिस तरीके से दर्ज किया गया वह कानूनन दोषपूर्ण था। महत्वपूर्ण साक्ष्य जैसे डीएनए रिपोर्ट, बच्ची के माता-पिता के बयान और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट अभियुक्त के समक्ष स्पष्टीकरण के लिए रखे ही नहीं गए। इसके अलावा प्रश्न लंबे और संयुक्त रूप में पूछे गए जिनमें कई तथ्यों को एक साथ जोड़ दिया गया, जिससे अभियुक्त को प्रत्येक आरोप पर अलग-अलग उत्तर देने का वास्तविक अवसर नहीं मिला।
मामले के अनुसार, 20-21 दिसंबर 2020 की रात बच्ची के जन्मदिन के दौरान उसका अपहरण किया गया था। आरोप था कि प्लंबर आरोपी नशे की हालत में बच्ची को उसके किराये के मकान से उठा ले गया।