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Chandigarh: गोशाला में 60 गोवंश की मौत पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 21 Jan 2026 09:13 AM IST
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सार
अदालत ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कहा कि नौ गायों के पोस्टमार्टम में से कम से कम सात के पेट से पॉलिथीन और प्लास्टिक कचरा बरामद हुआ। चंडीगढ़ में पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बावजूद इसका खुलेआम उपयोग होना नियामक तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज एक स्थित सीटीयू वर्कशॉप के पास गोशाला के हाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ की रायपुर कलां की गोशाला में 60 से अधिक गोवंश की मौत के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने टिप्पणी की है कि नियामक एजेंसियों ने आंखें मूंदे रखीं, जिसका खामियाजा बेजुबान पशुओं को जान देकर चुकाना पड़ा।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन, उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रथम दृष्टया प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी की कमी और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कहा कि नौ गायों के पोस्टमार्टम में से कम से कम सात के पेट से पॉलिथीन और प्लास्टिक कचरा बरामद हुआ। चंडीगढ़ में पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बावजूद इसका खुलेआम उपयोग होना नियामक तंत्र की विफलता को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि तथाकथित शिक्षित नागरिक भी सब्जियों और खाद्य पदार्थों का कचरा पॉलिथीन में डालकर फेंक देते हैं जिसे आवारा पशु खा लेते हैं और यही उनकी मौत का कारण बनता है।
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हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने टिप्पणी की है कि नियामक एजेंसियों ने आंखें मूंदे रखीं, जिसका खामियाजा बेजुबान पशुओं को जान देकर चुकाना पड़ा।
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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन, उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रथम दृष्टया प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी की कमी और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कहा कि नौ गायों के पोस्टमार्टम में से कम से कम सात के पेट से पॉलिथीन और प्लास्टिक कचरा बरामद हुआ। चंडीगढ़ में पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बावजूद इसका खुलेआम उपयोग होना नियामक तंत्र की विफलता को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि तथाकथित शिक्षित नागरिक भी सब्जियों और खाद्य पदार्थों का कचरा पॉलिथीन में डालकर फेंक देते हैं जिसे आवारा पशु खा लेते हैं और यही उनकी मौत का कारण बनता है।