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आईडीएफसी बैंक घोटाला: सोडा वॉटर की दुकान चलाने वाला विक्रम वधावा कैसे बना करोड़पति, जांच में बड़ा खुलासा
संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 16 Mar 2026 08:41 AM IST
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सार
आईडीएफसी बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में पकड़े गए विक्रम वधावा के पास चंडीगढ़ में करोड़ों रुपये की कोठियां हैं। उसने खरड़ में एक हाउसिंग सोसाइटी भी विकसित की है। जिसमें सबसे बड़ा निवेश रिभव ऋषि ने किया था।
विक्रम वधावा
- फोटो : संवाद
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विस्तार
आईडीएफसी बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के निवेश और घोटाले की जांच में गिरफ्तार आरोपी विक्रम वधावा को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि कभी सोडा वॉटर की छोटी दुकान चलाने वाला विक्रम वधावा आज ट्राइसिटी में करोड़ों रुपये की संपत्तियों का मालिक बन चुका है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी के पास चंडीगढ़ के सेक्टर-33 और सेक्टर-36 में करोड़ों रुपये की कोठियां हैं। इसके अलावा मोहाली के खरड़ क्षेत्र में उसने प्रिज्मा रेजीडेंसी एलएलपी के नाम से एक हाउसिंग सोसाइटी भी विकसित की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा निवेश रिभव ऋषि की ओर से किया गया था।
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी मुलाकात सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी बैंक में रिभव ऋषि से हुई थी। बैंक में आने-जाने के दौरान दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी और बाद में यह दोस्ती में बदल गई। इसके बाद रिभव ने विक्रम वधावा को रियल एस्टेट समेत अन्य प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए रकम देनी शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार शुरुआत में करीब पांच करोड़ रुपये निवेश के लिए दिए गए थे, जो बाद में बढ़कर करीब 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। आरोपी का दावा है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह पैसा कहां से आया था। उसका कहना है कि उसे केवल निवेश के लिए रकम दी जाती थी और वह उसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स में लगाता था।
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जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी के पास चंडीगढ़ के सेक्टर-33 और सेक्टर-36 में करोड़ों रुपये की कोठियां हैं। इसके अलावा मोहाली के खरड़ क्षेत्र में उसने प्रिज्मा रेजीडेंसी एलएलपी के नाम से एक हाउसिंग सोसाइटी भी विकसित की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा निवेश रिभव ऋषि की ओर से किया गया था।
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पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी मुलाकात सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी बैंक में रिभव ऋषि से हुई थी। बैंक में आने-जाने के दौरान दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी और बाद में यह दोस्ती में बदल गई। इसके बाद रिभव ने विक्रम वधावा को रियल एस्टेट समेत अन्य प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए रकम देनी शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार शुरुआत में करीब पांच करोड़ रुपये निवेश के लिए दिए गए थे, जो बाद में बढ़कर करीब 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। आरोपी का दावा है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह पैसा कहां से आया था। उसका कहना है कि उसे केवल निवेश के लिए रकम दी जाती थी और वह उसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स में लगाता था।