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सीमा क्षेत्र में अवैध खनन बेहद गंभीर: HC ने कहा-हम आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते, पठानकोट डीसी से मांगा जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jan 2026 08:22 PM IST
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सार
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि विवादित भूमि खेवट नंबर-1 के अंतर्गत आती है और वर्ष 2020-21 की जमाबंदी में इसे केंद्र सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। यह भूमि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के नियंत्रणाधीन बताई गई है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पठानकोट जिले में कथित अवैध खनन और अतिक्रमण के मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा क्षेत्र में अवैध खनन राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है और अदालत इस पर आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती। कोर्ट ने पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर को पूरे मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह आदेश नरोट जैमल सिंह तहसील के चक कौशल्या (चक कोशलियां) गांव निवासी किसान करन सिंह की याचिका पर पारित किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विवादित भूमि पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आईजी परमराज उमरानंगल के रिश्तेदारों सहित अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का अवैध कब्जा है।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा क्षेत्र में अवैध खनन राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है और अदालत इस पर आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती। कोर्ट ने पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर को पूरे मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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यह आदेश नरोट जैमल सिंह तहसील के चक कौशल्या (चक कोशलियां) गांव निवासी किसान करन सिंह की याचिका पर पारित किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विवादित भूमि पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आईजी परमराज उमरानंगल के रिश्तेदारों सहित अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का अवैध कब्जा है।