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युद्ध विराम का असर: फार्मा उद्योग को मिली राहत, कच्चा माल हुआ सस्ता
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चंडीगढ़। युद्ध विराम के बाद फार्मा उद्योग ने राहत की सांस ली है। युद्ध के कारण बढ़े दामों में अब कमी आई है। खासतौर से अमोनिया पर आधारित वस्तुओं के दामों में 40 फीसदी गिरावट दर्ज हुई है। एल्युमिनियम और सिल्वर फॉयल के दाम भी 40 फीसदी कम हो गए हैं।
फार्मा उद्योग के जानकारों ने बताया कि युद्ध विराम से पहले कई कंपनियों ने कच्चा माल रोक लिया था। युद्ध समाप्त होते ही कंपनियों ने अपना भंडार जारी करना शुरू कर दिया। इससे दामों में दोबारा गिरावट आ गई। पैकिंग सामग्री के दाम भी करीब चालीस फीसदी तक घट गए हैं।
प्रमुख रसायनों के दामों में कमी
आईसो प्रोपिल एल्कोहल, प्रोपलीन ग्लाईकॉल और स्टार्च के दाम भी 40 फीसदी तक कम हुए हैं। अमोनिया सॉल्यूशन, एसीटोन, एसीटोनाइट्राइल और मेथेनॉल के दामों में भी गिरावट आई है। चंडीगढ़ में फार्मा कंपनी के मालिक अरुण गोयल ने बताया कि युद्ध के समय कच्चे माल का भंडार कर लिया गया था। इससे कंपनियों ने दाम सौ फीसदी तक बढ़ा दिए थे जिससे दवाओं के उत्पादन पर सीधा असर पड़ा। अमोद अग्रवाल ने कहा कि फार्मा उद्योग को सामान्य होने में अभी थोड़ा समय लगेगा।
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फार्मा उद्योग के जानकारों ने बताया कि युद्ध विराम से पहले कई कंपनियों ने कच्चा माल रोक लिया था। युद्ध समाप्त होते ही कंपनियों ने अपना भंडार जारी करना शुरू कर दिया। इससे दामों में दोबारा गिरावट आ गई। पैकिंग सामग्री के दाम भी करीब चालीस फीसदी तक घट गए हैं।
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प्रमुख रसायनों के दामों में कमी
आईसो प्रोपिल एल्कोहल, प्रोपलीन ग्लाईकॉल और स्टार्च के दाम भी 40 फीसदी तक कम हुए हैं। अमोनिया सॉल्यूशन, एसीटोन, एसीटोनाइट्राइल और मेथेनॉल के दामों में भी गिरावट आई है। चंडीगढ़ में फार्मा कंपनी के मालिक अरुण गोयल ने बताया कि युद्ध के समय कच्चे माल का भंडार कर लिया गया था। इससे कंपनियों ने दाम सौ फीसदी तक बढ़ा दिए थे जिससे दवाओं के उत्पादन पर सीधा असर पड़ा। अमोद अग्रवाल ने कहा कि फार्मा उद्योग को सामान्य होने में अभी थोड़ा समय लगेगा।
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