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चुनाव परिणाम 2019: हरियाणा में 5 हॉट सीटों पर कांटे की टक्कर, मनोहर-हुड्डा पर रहेगी खास नजर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 23 May 2019 08:54 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Lok Sabha Election 2019 Result, BJP vs Congress in Haryana
मनोहर लाल और भूपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : File Photo
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हरियाणा की चुनावी महाभारत में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने अपने दिग्गजों को उतारकर कांटे की टक्कर कर दी है। रोहतक, करनाल के साथ ही सोनीपत, हिसार और अंबाला हॉट सीट बनी हुई हैं। यह लोकसभा चुनाव सीधा सीएम मनोहर लाल के साथ पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है।
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सीएम बनने के बाद मनोहर लाल की अध्यक्षता में पहली बार लोकसभा चुनाव हो रहा है। मोदी के बाद प्रदेश में मनोहर ही सबसे बड़ा चेहरा हैं। पांचों नगर निगमों में जीत व जींद में पहली बार कमल खिलाने के कारण सीएम जहां लोकसभा चुनाव में भी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं, वहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस बार 2009 का इतिहास दोहराने का दावा कर रहे हैं।
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कौन कितनी सीटें जीतेगा, ये तो 23 मई को ही तय होगा, मगर साख दोनों की दांव पर लगी है। पार्टी की जीत-हार के साथ ही सीएम और पूर्व सीएम के कद को हाईकमान आंकेगा। हुड्डा पर भरोसा जताकर ही कांग्रेस ने उन्हें चुनावी दंगल में उतारा है ताकि उनके चुनाव लडऩे से कार्यकर्ता व पार्टी में जोश आए। हुड्डा शीर्ष नेतृत्व की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए दिन-रात ताकत झोंके हुए हैं, अंतिम फैसला अब जनता के हाथ में है।

ये है पांच हॉट सीटों की स्थिति

रोहतक में तीन बार के सांसद और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा की सीधी टक्कर पूर्व सांसद व भाजपा प्रत्यशाी डॉ. अरविंद शर्मा से है। इस सीट पर लड़ाई जाट बनाम गैर जाट की चल रही है। भाजपा गैर जाट वोटों का धु्रवीकरण कर पहली बार रोहतक का अभेद्य दुर्ग भेदने की कोशिश में जुटी है। यह सीट हुड्डा परिवार का गढ़ है। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा यहां से चार बार, उनके पिता रणवीर हुड्डा दो बार और पुत्र दीपेंद्र तीन बार सांसद रह चुके।

हुड्डा ने एक बार ही इनेलो के इंद्र सिंह से मात खाई थी। भाजपा और कांग्रेस ने जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंकी हुई है। कांग्रेस ने यहां प्रियंका गांधी का रोड शो कराया तो भाजपा ने पीएम नरेंद्र मोदी की रैली। भाजपा मोदी लहर के सहारे यहां जीत का दम भर रही है तो हुड्डा परिवार को अपने रसूख, समर्थक विधायकों और जनता पर विश्वास है।
 
करनाल लोकसभा
करनाल सीएम सिटी है। मनोहर लाल यहीं से पहली बार विधायक बनकर सीधा मुख्यमंत्री बने। करनाल अब कांग्रेस के बजाए भाजपा का गढ़ बन चुका है। इस सीट को भाजपा अपनी सबसे सुरक्षित सीट मानकर चल रही है। मुकाबला संजय भाटिया व कुलदीप शर्मा के बीच है। संजय भाटिया भाजपा संगठन का बड़ा चेहरा हैं। जमीन से जुड़े हुए हैं। सीएम का वरदहस्त उनपर है। पंजाबी चेहरा होने के साथ ही पीएम मोदी व सीएम के नाम का पूरा फायदा मिल रहा है।

कांग्रेस ने यहां से चार बार सांसद रह चुके चिरंजी लाल शर्मा केबेटे विधायक कुलदीप शर्मा को उतारा है। कुलदीप सोनीपत के गन्नौर से विधायक हैं। उन पर बाहरी होने का भी ठप्पा लग रहा है। लड़ाई धरतीपुत्र बनाम बाहरी की भी है। कांग्रेस की राह इस सीट पर आसान नहीं। कांग्रेस ब्राह्मïण चेहरे के सहारे वापसी की उम्मीद लगाए हुए है। 2014 में भाजपा ने यह सीट बड़े अंतर से जीती थी।

सोनीपत सीट
इस सीट पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व भाजपा सांसद रमेश कौशिक के बीच टक्कर है। ताऊ देवीलाल परिवार की चौथी पीढ़ी के लाल दिग्विजय चौटाला मुकाबले को तिकोना बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हुड्डा की तुलना व दमदार जाट चेहरा नहीं हैं। सोनीपत को जाटलैंड कहा जाता है। देशवाली बेल्ट में आने वाली इस सीट को कांग्रेस के साथ ही हुड्डïा भी सेफ मानकर चल रहे हैं।

भाजपा यहां मोदी मैजिक के सहारे दोबारा जीत दर्ज करना चाह रही है। हुड्डा के मैदान में उतरने से भाजपा की राह मुश्किल हुई है। पूरी भाजपा ने हुड्डा को संसद पहुंचने से रोकने के लिए ताकत लगा दी है। हुड्डा यहां से जीत दर्ज कर हाईकमान के सामने अपना कद और ऊंचा करना चाह रहे हैं। साथ ही इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सीएम पद पर भी अपनी दावेदारी पुख्ता करेंगे।
 
हिसार
पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल और पूर्व सीएम भजनलाल के गढ़ में सीधी टक्कर नहीं, बल्कि त्रिणोकीय मुकाबला है। यहां देलीलाल की चौथी पीढ़ी के सांसद दुष्यंत चौटाला मैदान में हैं तो भजनलाल के पोते भव्य बिश्नोई पहली बार चुनावी दंगल में उतरे हैं। भाजपा ने यहां लालों के परिवार से चौधर छीनने के लिए केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह को उतारा है। जाट व गैर जाट की लड़ाई में यहां चुनावी जंग बेहद रोचक हो गई है।

तीनों उम्मीदवारों के अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। ऐसे में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, इसका विश्लेषण करने में विश्लेषकों का भी सिर चकरा रहा है। बृजेंद्र सिंह को पिता व मोदी का सहारा है तो दुष्यंत अपने कामों और पड़दादा देवीलाल के नाम पर वोट मांग रहे हैं। भव्य को दादा भजन लाल के नाम व पिता कुलदीप बिश्नोई के दम पर जीत की आस है। दुष्यंत प्रतिद्वंदियों को पछाड़ दोबारा संसद पहुंचने का दावा कर रहे हैं।

अंबाला लोकसभा
यहां मुकाबला कांग्रेस की राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा और भाजपा सांसद रतनलाल कटारिया के बीच है। कटारिया ने पार्टी हाईकमान से लड़कर टिकट लिया है। वह दोबारा जीत हासिल करने के लिए जोर लगाए हुए हैं। सैलजा से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है। सैलजा अंबाला सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं।

बीता चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा था। इस बार उन्हें ठीक रिस्पांस मिल रहा है। कटारिया को पांच साल जनता के बीच न जाने पर विरोध भी झेलना पड़ रहा है। कटारिया खुद या भाजपा के लिए नहीं, पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। सैलजा से कांटे की टक्कर में भाजपा सांसद समझ चुके हैं कि मोदी के सहारे ही उनकी चुनावी नैया पार लग सकती है।
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