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हड्डियों की बीमारियों पर राष्ट्रीय रजिस्ट्री जरूरी, तभी बेहतर होगा इलाज : डॉ. झा
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चंडीगढ़। देश में हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इनके व्यवस्थित आंकड़ों की कमी के कारण नई उपचार तकनीकों पर व्यापक शोध और प्रभावी नीति निर्माण में बाधा आ रही है। यह बात ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसएस झा ने कही। उन्होंने बताया कि देश में कई बीमारियों के लिए राष्ट्रीय स्तर की रजिस्ट्रियां मौजूद हैं, लेकिन हड्डियों से संबंधित रोगों और उनके इलाज की कोई समग्र राष्ट्रीय रजिस्ट्री नहीं है।
शहर में आयोजित ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के सम्मेलन ‘आयोरा शोल्डर कॉन्क्लेव-2026’ के दौरान देशभर से आए विशेषज्ञों ने हड्डियों से जुड़ी बीमारियों और उनके आधुनिक इलाज पर चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया और पीजीआई के ऑर्थोपेडिक विभाग की ओर से किया गया।
डॉ. झा ने बताया कि यदि हड्डी रोगों की राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाई जाए तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों, सर्जरी के परिणामों और नई तकनीकों के प्रभाव से जुड़ा बड़ा डाटा उपलब्ध हो सकेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आज कई जटिल हड्डी रोगों के उपचार में बोन सीमेंट, आर्टिफिशियल बोन और मरीज के शरीर से ली गई हड्डी का सफल उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों में आर्टिफिशियल बोन ग्राफ्ट का प्रयोग किया जाता है, जबकि कुछ स्थितियों में मरीज के शरीर के ऐसे हिस्से से हड्डी ली जाती है जिससे सामान्य कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह तकनीक विशेष रूप से बोन कैंसर और गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों में काफी प्रभावी साबित हो रही है।
विशेषज्ञों ने लोगों से हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि बढ़ती उम्र, शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खान-पान और विटामिन-डी की कमी हड्डियों को कमजोर बना सकती है।
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शहर में आयोजित ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के सम्मेलन ‘आयोरा शोल्डर कॉन्क्लेव-2026’ के दौरान देशभर से आए विशेषज्ञों ने हड्डियों से जुड़ी बीमारियों और उनके आधुनिक इलाज पर चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया और पीजीआई के ऑर्थोपेडिक विभाग की ओर से किया गया।
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डॉ. झा ने बताया कि यदि हड्डी रोगों की राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाई जाए तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों, सर्जरी के परिणामों और नई तकनीकों के प्रभाव से जुड़ा बड़ा डाटा उपलब्ध हो सकेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आज कई जटिल हड्डी रोगों के उपचार में बोन सीमेंट, आर्टिफिशियल बोन और मरीज के शरीर से ली गई हड्डी का सफल उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों में आर्टिफिशियल बोन ग्राफ्ट का प्रयोग किया जाता है, जबकि कुछ स्थितियों में मरीज के शरीर के ऐसे हिस्से से हड्डी ली जाती है जिससे सामान्य कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह तकनीक विशेष रूप से बोन कैंसर और गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों में काफी प्रभावी साबित हो रही है।
विशेषज्ञों ने लोगों से हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि बढ़ती उम्र, शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खान-पान और विटामिन-डी की कमी हड्डियों को कमजोर बना सकती है।