{"_id":"6a7821c58d5b79e01304182a","slug":"nayab-singh-saini-emerges-as-key-mediator-in-modi-sukhbir-meeting-full-details-in-hindi-2026-08-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पुरानी दोस्ती, नए समीकरण: मोदी-सुखबीर की मुलाकात के सूत्रधार बने सैनी, BJP-अकाली गठजोड़ की जमीन तलाशेंगे नायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुरानी दोस्ती, नए समीकरण: मोदी-सुखबीर की मुलाकात के सूत्रधार बने सैनी, BJP-अकाली गठजोड़ की जमीन तलाशेंगे नायब
Sun, 09 Aug 2026 01:01 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:01 PM IST
सार
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पीएम मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह की मुलाकात के सूत्रधार बने। हरियाणा सीएम पंजाब में भाजपा-अकाली गठजोड़ की जमीन तलाशेंगे। पीएम से मिलने से दो दिन पहले सुखबीर बादल चंडीगढ़ में सैनी से मिले थे।
विज्ञापन
Nayab Singh Saini
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच जमी सियासी बर्फ पिघलने लगी है और इस पूरी कवायद में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अहम सूत्रधार बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुखबीर बादल की मुलाकात से ठीक दो दिन पहले चार अगस्त को चंडीगढ़ में सैनी और बादल की करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक इसी मुलाकात के बाद बादल की मोदी से मुलाकात का रास्ता साफ हुआ। सुखबीर बादल की सैनी से मुलाकात को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पंजाब दौरे के दौरान सैनी ने जालंधर में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर भरोसा रखने वाले दलों और नेताओं के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं।
इसके बाद बादल की सैनी से मुलाकात हुई और फिर मोदी से मुलाकात का रास्ता बना। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा हाईकमान ने सैनी को पंजाब में संभावित गठबंधन के लिए दलों और नेताओं से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी है। भाजपा और शिअद के बीच बढ़ती नजदीकियों को इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक इसी मुलाकात के बाद बादल की मोदी से मुलाकात का रास्ता साफ हुआ। सुखबीर बादल की सैनी से मुलाकात को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पंजाब दौरे के दौरान सैनी ने जालंधर में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर भरोसा रखने वाले दलों और नेताओं के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं।
विज्ञापन
इसके बाद बादल की सैनी से मुलाकात हुई और फिर मोदी से मुलाकात का रास्ता बना। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा हाईकमान ने सैनी को पंजाब में संभावित गठबंधन के लिए दलों और नेताओं से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी है। भाजपा और शिअद के बीच बढ़ती नजदीकियों को इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
विज्ञापन
बातें मुद्दों...और बड़े बादल की भी
सूत्रों के मुताबिक मोदी-बादल मुलाकात में पंजाब के राजनीतिक हालात के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सुखबीर ने इस दौरान अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से जुड़े कुछ किस्से भी साझा किए। मोदी का प्रकाश सिंह बादल के साथ पुराना आत्मीय संबंध रहा है।
सूत्रों के मुताबिक मोदी-बादल मुलाकात में पंजाब के राजनीतिक हालात के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सुखबीर ने इस दौरान अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से जुड़े कुछ किस्से भी साझा किए। मोदी का प्रकाश सिंह बादल के साथ पुराना आत्मीय संबंध रहा है।
अप्रैल 2019 में वाराणसी में लोकसभा चुनाव का नामांकन दाखिल करने पहुंचे मोदी ने एनडीए नेता के तौर पर मौजूद प्रकाश सिंह बादल के पैर छूकर उनका अभिवादन किया था।
बैठक में सुखबीर ने पंजाब में कानून-व्यवस्था, गैंगस्टरवाद, किसान संगठनों, कारोबारियों, उद्यमियों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी प्रधानमंत्री के सामने रखे। सूत्रों के मुताबिक केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन बिल पर शिअद की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल के समर्थन को लेकर भी चर्चा हुई।
पुरानी दोस्ती, नए समीकरण
भाजपा और शिअद लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के साथी रहे हैं। दोनों ने 1997, 2007 और 2012 में मिलकर सरकार बनाई। 1970 में भी अकाली सरकार को जनसंघ का समर्थन मिला था। हालांकि 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया और शिअद ने एनडीए से नाता तोड़ लिया।
भाजपा और शिअद लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के साथी रहे हैं। दोनों ने 1997, 2007 और 2012 में मिलकर सरकार बनाई। 1970 में भी अकाली सरकार को जनसंघ का समर्थन मिला था। हालांकि 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया और शिअद ने एनडीए से नाता तोड़ लिया।
अब फिर नजदीकियों के संकेत मिल रहे हैं। संभावित गठबंधन में अकाली दल के ग्रामीण सिख आधार और भाजपा के शहरी प्रभाव को साथ लाने की कोशिश दिखाई दे रही है। ऐसे में पंजाब की सियासत में सैनी की भूमिका आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।